महादेवी वर्मा की कौन तुम मेरे हृदय में - कविता

महादेवी वर्मा की प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं - नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, यामा और दीपशिखा । कविता के अतिरिक्त उन्होंने सशक्त गद्य भी रचा है, जिसमें रेखाचित्र तथा संस्मरण प्रमुख हैं। पथ के साथी, अतीत के चलचित्र तथा स्मृति की रेखाएँ उनकी कलात्मक गद्य रचनाएँ हैं । उनकी महान रचनाओं में से आईये पढ़ते हैं कौन तुम मेरे हृदय में?

कौन तुम मेरे हृदय में?

कौन मेरी कसक में नित

मधुरता भरता अलक्षित?
कौन प्यासे लोचनों में

घुमड़ घिर झरता अपरिचित?
स्वर्ण-स्वप्नों का चितेरा

नींद के सूने निलय में!
कौन तुम मेरे हृदय में?

अनुसरण नि:श्वास मेरे
कर रहे किसका निरंतर?

चूमने पदचिह्न किसके
लौटते यह श्वास फिर-फिर?

कौन बंदी कर मुझे अब
बँध गया अपनी विजय में?

कौन तुम मेरे हृदय में?
एक करुण अभाव में चिर—

तृप्ति का संसार संचित;
एक लघु क्षण दे रहा

निर्वाण के वरदान शत-शत;
पा लिया मैंने किसे इस

वेदना के मधुर क्रय में?
कौन तुम मेरे हृदय में?

गूँजता उर में न जाने
दूर के संगीत-सा क्या?

आज खो निज को मुझे
खोया मिला, विपरीत-सा क्या?

क्या नहा आई विरह-निशि
मिलन-मधु-दिन के उदय में?

कौन तुम मेरे हृदय में?
तिमिर-पारावार में

आलोक-प्रतिमा है अकंपित;
आज ज्वाला से बरसता

क्यों मधुर घनसार सुरभित?
सुन रही हूँ एक ही

झंकार जीवन में प्रलय में?
कौन तुम मेरे हृदय में?

मूक सुख-दुख कर रहे
मेरा नया शृंगार-सा क्या?

झूम गर्वित स्वर्ग देता—
नत धरा को प्यार-सा क्या?

आज पुलकित सृष्टि क्या
करने चली अभिसार लय में?

कौन तुम मेरे हृदय में?

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