किरण देसाई : 21वीं सदी की एक सशक्त साहित्यिक आवाज़
किरण देसाई एक भारतीय मूल की अंग्रेज़ी लेखिका हैं, जिनका जन्म 3 सितम्बर 1971 को भारत के चंडीगढ़ में हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा भारत, इंग्लैंड और अमेरिका में प्राप्त की। वे प्रख्यात लेखिका अनिता देसाई की पुत्री हैं। किरण देसाई ने अपने लेखन में सांस्कृतिक टकराव, प्रवासी जीवन, वैश्वीकरण और पहचान जैसे गहरे विषयों को उठाया है।
उनकी भाषा सरल, लेकिन बेहद प्रभावशाली मानी जाती है, और उनके उपन्यासों में समाज और व्यक्तिगत संघर्षों का यथार्थवादी चित्रण मिलता है।
- उनकी पहली किताब: Hullabaloo in the Guava Orchard (1998) → उपन्यास को आलोचकों ने बहुत सराहा और उन्हें एक उभरती हुई प्रतिभाशाली लेखिका के रूप में पहचान दिलाई।
- उनके मुख्य उपन्यास: The Inheritance of Loss (2006) के लिए उन्हें Man Booker Prize मिला। यह किताब National Book Critics Circle Award (USA) से भी सम्मानित हुई।
- किरण देसाई को “21वीं सदी की महत्वपूर्ण आवाज़ों में से एक” माना जाता है।उनके लेखन ने भारतीय अंग्रेज़ी साहित्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और भी मज़बूत पहचान दिलाई।
किरण देसाई का उपन्यास "Hullabaloo in the Guava Orchard" (1998) एक भारतीय युवक संपत चावला की कहानी है, जो अपनी जिम्मेदारियों से भागकर एक अमरूद के पेड़ पर रहने लगता है और स्थानीय लोगों के लिए भविष्यवाणियाँ करता है. यह उपन्यास भारत के एक छोटे से गाँव में आधारित है, जहाँ संपत जीवन की एकरसता से निराश होकर यह रास्ता अपनाता है. ये उपन्यास वास्तव में भारतीय समाज की कई परतों पर व्यंग्य करता है। यह उपन्यास हास्य और व्यंग्य के माध्यम से ग्रामीण भारत के जीवन, परंपराओं और लोगों की मानसिकता को चित्रित करता है।
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1.नायक संपत चावला: एक बेरोज़गार युवक, जो अपने साधारण जीवन और परिवार की अपेक्षाओं से ऊबकर अमरूद के पेड़ पर जा बैठता है।
2.“संत” का रूप: धीरे-धीरे गाँव के लोग उसे संत मानने लगते हैं और उसकी बातों को भविष्यवाणी समझकर अनुसरण करते हैं।
3.व्यंग्य और आलोचना: यह उपन्यास भारतीय मध्यमवर्ग, नौकरशाही, और अंधविश्वासों पर कटाक्ष करता है।
4.शैली: हल्के-फुल्के हास्य, कल्पनाशीलता और तीखे सामाजिक व्यंग्य का मिश्रण है।
यह कृति किरण देसाई का पहला उपन्यास है, और इसे बेटी–माता संबंध (किरण देसाई और उनकी माँ अनिता देसाई, जो स्वयं एक प्रसिद्ध लेखिका हैं) की साहित्यिक परंपरा का भी हिस्सा माना जाता है।


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