भगवत रावत : जनोन्मुखी दृष्टि के संवेदनशील कवि"
हिंदी साहित्य की आधुनिक कविता में जिन कवियों ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई, उनमें भगवत रावत का नाम सम्मानपूर्वक लिया जाता है। 13 सितंबर 1939 को मध्यप्रदेश के आगर में जन्मे भगवत रावत नई कविता आंदोलन के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रहे। भगवत रावत ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश में पूरी की और आगे चलकर हिंदी साहित्य में उच्च शिक्षा प्राप्त की। वे अध्यापन कार्य से जुड़े और साहित्य-सृजन को निरंतर जारी रखा।
भगवत रावत को उनकी रचनाओं के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। वे केवल कवि ही नहीं, बल्कि विचारक और आलोचक भी थे, जिन्होंने हिंदी कविता को जनोन्मुखी दृष्टि दी।
पेश है उनके द्वारा लिखी हुई कविता- ऐसे घर में
सब कुछ भला-भला
सब तरफ़ उजियाला
कहीं न कोर-कसर
सब कुछ आला-आला
सब कुछ सुथरा-साफ़
सभी कुछ सजा-सजा
बोली बानी मोहक
अक्षर-अक्षर सधा-सधा
सब कुछ सोचा-समझा
सब पहले से तय
ऐसे घर में
जाने क्यों लगता है भय।
-भगवत रावत

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