हिंदी दिवस: भाषा से जुड़ी हमारी विरासत

हर वर्ष 14 सितंबर को पूरे भारत में हिंदी दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमारे लिए बहुत विशेष है क्योंकि इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा का दर्जा दिया था। इसके बाद 1953 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे पहली बार हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। तब से लेकर आज तक यह परंपरा लगातार जारी है।

हिंदी का महत्व

हिंदी सिर्फ हमारी मातृभाषा ही नहीं, बल्कि हमारी पहचान और संस्कृति का भी अहम हिस्सा है। यह भाषा हमें हमारे साहित्य, परंपराओं और इतिहास से जोड़ती है। जनगणना 2011 के अनुसार, भारत की लगभग 44% आबादी हिंदी को अपनी मातृभाषा के रूप में बोलती है। हिंदी का प्रभाव सबसे अधिक उत्तर भारत में देखने को मिलता है, जिसे आमतौर पर ‘हिंदी बेल्ट’ कहा जाता है। इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली शामिल हैं।

हिंदी की विशेषताएँ

  • हिंदी भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है।
  • इसकी वर्णमाला में कुल 52 अक्षर होते हैं – 13 स्वर और 39 व्यंजन।
  • हिंदी को आमतौर पर ‘खड़ी बोली’ कहा जाता है।

हिंदी साहित्य

हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण दौर छायावादी युग कहलाता है। इसके चार प्रमुख स्तंभ हैं:

जयशंकर प्रसाद
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
सुमित्रानंदन पंत
महादेवी वर्मा

इसके अलावा, हिंदी के राष्ट्रकवि के रूप में 'रामधारी सिंह दिनकर' को जाना जाता है।

हिंदी दिवस का महत्व

हिंदी दिवस का उद्देश्य हमारी राष्ट्रीय भाषा और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करना है। इस दिन लोग निबंध, भाषण, कविता प्रतियोगिता और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदी भाषा के महत्व को बढ़ावा देते हैं। यह दिन हमें हमारी भाषा के प्रति गर्व और सम्मान की भावना से जोड़ता है।

हिंदी सिर्फ एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति, पहचान और इतिहास का प्रतीक है। हमें हिंदी भाषा को बढ़ावा देने और उसे संरक्षित रखने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। हिंदी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हमारी मातृभाषा हमारी असली ताकत है।

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