लघु कथा: नवरात्रि का मेला

नवरात्रि का समय था। गांव में रंग-बिरंगा मेला लगा हुआ था। हर तरफ खुशियों का माहौल था। बच्चे झूले झूल रहे थे और मिठाइयों की खुशबू चारों ओर फैल रही थी।

रीतु और उसके दोस्त मेले में गए। उन्होंने झूला झूला, गुब्बारे खरीदे और तिलक वाले मिठाई की दुकान पर रुककर लड्डू खाए। रीतु ने अपने हाथों से रंग-बिरंगे राखी और छोटी-छोटी मूर्तियाँ भी खरीदी।

मेले में संगीत और नृत्य का आनंद देखते ही बन रहा था। लोग ढोलक की धुन पर गरबा और डांडिया खेल रहे थे। रीतु भी अपने दोस्तों के साथ नाचने लगी।

साँझ होते-होते, मेले की रोशनी और हर्ष का नजारा देखकर रीतु के चेहरे पर मुस्कान खिल गई। वह खुश थी कि उसने नवरात्रि का मेला अच्छे से एन्जॉय किया और अपने दोस्तों के साथ यादगार पल बिताए।

इस तरह नवरात्रि का मेला न केवल मनोरंजन का स्थान था बल्कि लोगों को एक साथ लाने का भी जरिया बन गया।

संदेश:
यह कहानी हमें सिखाती है कि त्योहार केवल खुशियाँ मनाने का अवसर नहीं हैं, बल्कि यह दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने, प्रेम और भाईचारे को बढ़ाने का मौका भी देते हैं। खुशियाँ बाँटने से बढ़ती हैं और सरल चीज़ों में भी जीवन में आनंद पाया जा सकता है।

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