जन्म और मृत्यु कविता - “एक शुरुआत, एक विराम”
जन्म एक फूल की तरह है,
कोमल, नया, सुगंध से भरा —
माँ की गोद में खुलती आँखें,
जैसे भोर में पहली किरण खिला।
मृत्यु भी कोई अंत नहीं,
वो तो एक शांति की लहर है,
थके हुए जीवन की साँसों को
विश्राम देती एक पहर है।
जन्म में है उत्सव का गीत,
मृत्यु में गूँजता मौन संगीत,
दोनों मिलकर रचते जीवन,
दो किनारे, पर एक ही नीत।
मिट्टी से उठे, मिट्टी में जाएँ,
यही तो है सृष्टि का विधान,
जन्म और मृत्यु के बीच जो बचे —
वही कहलाए “जीवन” महान।


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