फरवरी ही क्यों है सबसे छोटा महीना? 2000 साल पुरानी रोमन कहानी में बताया इसके पीछे की कहानी

BY- ANJALI SHUKLA

आज हम जिस Gregorian Calendar का इस्तेमाल करते हैं, उसकी कहानी काफ़ी पुरानी और दिलचस्प है। इसकी जड़ें प्राचीन रोम से जुड़ी हैं, जहाँ शुरुआत में कैलेंडर चांद की चाल पर आधारित था और साल में सिर्फ 10 महीने होते थे मार्च से दिसंबर तक। सर्दियों के महीनों को तब गिना ही नहीं जाता था। बाद में रोमन राजा Numa Pompilius ने साल को पूरा करने के लिए जनवरी और फरवरी को जोड़ा, लेकिन 365 दिनों को 12 महीनों में बांटते समय समस्या खड़ी हो गई। 

रोमन लोग सम संख्याओं को अशुभ मानते थे, इसलिए ज़्यादातर महीनों को 29 या 31 दिन दिए गए और फरवरी को सबसे कम दिन मिले। इसके अलावा फरवरी को मृत आत्माओं, शुद्धिकरण और धार्मिक रीति-रिवाजों से जुड़ा महीना माना जाता था, इसी वजह से इसे 28 दिनों तक ही सीमित रखा गया।

बाद में Julius Caesar ने चंद्र कैलेंडर की जगह सौर आधारित जूलियन कैलेंडर लागू किया और हर चार साल में एक दिन जोड़कर लीप ईयर की व्यवस्था की, लेकिन फरवरी की लंबाई फिर भी नहीं बदली। साल 1582 में Pope Gregory XIII ने ग्रेगोरियन कैलेंडर लागू किया, जो आज पूरी दुनिया में चलता है। इस तरह फरवरी के 28 दिन होना किसी एक कारण की वजह से नहीं, बल्कि सदियों पुराने इंसानी फैसलों, धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक सुधारों का नतीजा है।

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