मुशायरे का रंगीन शायर ख़ुमार बाराबंकवी और डिप्टी कमिश्नर जमाल का आमने-सामने वाक़या
उर्दू के मशहूर शायर ख़ुमार बाराबंकवी के मुशायरे के दौरान एक अनोखा वाक़या हुआ, जिसे निदा फ़ाज़ली ने अपनी किताब चेहरे में याद किया है। उदयपुर में आयोजित मुशायरे के दौरान फ़ाज़ली होटल के कमरे में हिंदी और उर्दू के शायरों और पत्रकारों से बातचीत में व्यस्त थे, तभी डिप्टी पुलिस कमिश्नर अहमद जमाल अचानक कमरे में प्रवेश कर गए। उन्होंने बेतकल्लुफ़ और तू-तकार वाले अंदाज़ में फ़ाज़ली से बात करना शुरू किया और उनके बचपन और पिता का हवाला देते हुए मज़ाकिया लहजे में उलझा दिया।
फ़ाज़ली ने जमाल को टालने के लिए चालाकी दिखाई और कहा कि ख़ुमार बाराबंकवी रेलवे पुलिस के लाकअप में फँस गए हैं और उनकी मदद की ज़रूरत है। यह सुनते ही जमाल दौड़ पड़े, लेकिन तभी ख़ुमार साहिब की टैक्सी होटल में पहुँची। उन्होंने जमाल से पूछा कि किस लाकअप की बात कर रहे हैं। जमाल और ख़ुमार के बीच यह आमने-सामने संवाद कुछ देर तक मज़ाक और उलझन में रहा, लेकिन जैसे ही हालात गंभीर हुए, दोनों के बीच गाली-गलौज और हाथापाई तक का विवाद बढ़ गया।
फ़ाज़ली लिखते हैं कि मुशायरे के मंच पर जहाँ ख़ुमार शेर सुनाते और वाह-वाह पाते थे, वही उनकी असली तीखी और हाज़िरजवाब शैली सामने आई। जमाल की बनावटी ताक़त के सामने ख़ुमार ने अपनी शेरवानी और तेज़ दिमाग़ से उन्हें झकझोर दिया। इस घटना ने सभी को चौंका दिया और साबित किया कि केवल मंच पर ही नहीं, आमने-सामने भी ख़ुमार की शैली और प्रभावी व्यक्तित्व अद्वितीय था।


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