12 फ़रवरी से शुरू हो रहा पशु मेला: किसान ध्यान दें ये जरूरी बातें
हर साल की तरह इस बार भी 12 फरवरी से क्षेत्र में पारंपरिक पशु मेला शुरू होने जा रहा है। यह मेला न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है बल्कि किसानों के लिए अपने पशुधन को बेचने, खरीदने और नए नस्ल के जानवरों की जानकारी हासिल करने का सुनहरा अवसर भी है। हालांकि, इस मेले में भाग लेने से पहले कुछ सावधानियाँ और नियमों का पालन करना बेहद ज़रूरी है, ताकि लेन-देन सुरक्षित, कानूनी और लाभदायक रहे।
1. पशु की पहचान और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र साथ रखें
मेला स्थल पर प्रवेश से पहले पशु का स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (Health Certificate) अनिवार्य है। यह प्रमाणपत्र किसी पशु चिकित्सक (Veterinary Officer) से प्राप्त करना चाहिए, जो यह पुष्टि करे कि जानवर में कोई संक्रामक बीमारी नहीं है। साथ ही, पशु पहचान टैग (Ear Tag) या पहचान चिन्ह स्पष्ट रूप से होना चाहिए ताकि विवाद या चोरी की स्थिति में पहचान आसान रहे।
2. खरीद-बिक्री का दस्तावेज तैयार करें
पशु खरीदते या बेचते समय एक लिखित रसीद या अनुबंध बनाना ज़रूरी है। इसमें पशु का प्रकार, उम्र, कीमत, और लेन-देन की तारीख साफ़-साफ़ दर्ज हो। इससे आगे चलकर किसी विवाद की स्थिति में प्रमाण के तौर पर काम लिया जा सकता है।
3. नस्ल और दूध उत्पादन की जानकारी लें
पशु खरीदते समय उसकी नस्ल, दूध देने की क्षमता, उम्र, और पिछले स्वास्थ्य रिकॉर्ड की जानकारी अवश्य लें। यदि संभव हो तो विक्रेता से दूध उत्पादन का प्रमाण या वीडियो प्रमाण प्राप्त करें कई बार आकर्षक दिखने वाले पशु दूध देने में कमजोर निकलते हैं।
4. पशु परिवहन के नियमों का पालन करें
खरीदे गए पशु को अपने गाँव या शहर तक लाने के लिए वैध परिवहन अनुमति पत्र (Transport Permit) ज़रूरी है। पशु को ढोने वाले वाहन में पर्याप्त जगह, पानी, और हवा की व्यवस्था होनी चाहिए। अत्यधिक पशु ठूसकर ले जाना पशु क्रूरता अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act) के तहत अपराध है।
5. टीकाकरण और देखभाल पर ध्यान दें
मेला समाप्त होने के बाद खरीदे गए पशु को 10–15 दिन तक अलग बाड़े में रखें, ताकि यदि कोई संक्रमण हो तो अन्य पशुओं में न फैले। साथ ही, खुरपका-मुंहपका (FMD), ब्रुसेलोसिस, और ब्लैक क्वार्टर जैसी बीमारियों के टीके अवश्य लगवाएं।
6. नकद या डिजिटल सुरक्षित लेन-देन करें
धोखाधड़ी से बचने के लिए विश्वसनीय भुगतान माध्यम अपनाएं। डिजिटल भुगतान (UPI, बैंक ट्रांसफर) या गवाहों की मौजूदगी में नकद लेन-देन करें। कभी भी बिना पक्की रसीद के पैसा न दें।
7. पशु मेले के नियमों का पालन करें
मेले में प्रशासन द्वारा तय की गई जगहों पर ही पशु खरीद-बिक्री करें। किसी भी अवैध पशु वध या अवैध व्यापार की सूचना तुरंत स्थानीय अधिकारियों को दें। पशु की सुरक्षा, साफ-सफाई और पानी की उचित व्यवस्था बनाए रखें।
8. अनुभव साझा करें और नई नस्लों की जानकारी लें
पशु मेले का उद्देश्य केवल खरीद-बिक्री नहीं, बल्कि ज्ञान का आदान-प्रदान भी है। किसान यहां नई नस्लों, चारे, दवाइयों और पशुपालन तकनीकों की जानकारी लेकर अपने व्यवसाय को लाभदायक बना सकते हैं।
पशु मेला ग्रामीण जीवन का उत्सव है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। अगर किसान थोड़ी सावधानी और तैयारी से जाएं तो यह मेला न सिर्फ मुनाफे का सौदा साबित होगा बल्कि स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण पशुपालन की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगा।
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