कृष्णानगर पुलिस के दरोगा सच्चिदानंद पांडेय फिर बने देवदूत, नहर में कूदे युवक को बचाकर पेश की मानवता की मिसाल
लखनऊ। वर्दी केवल कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने का प्रतीक नहीं, बल्कि संकट में फंसे लोगों के लिए उम्मीद और जीवन की रक्षा का भरोसा भी है। इसी मानवीय भावना को एक बार फिर चरितार्थ किया है कृष्णानगर थाने में तैनात दरोगा सच्चिदानंद पांडेय ने। आत्महत्या के इरादे से नहर में छलांग लगाने वाले एक युवक को पुलिस टीम और स्थानीय लोगों की मदद से सुरक्षित बाहर निकालकर उन्होंने कर्तव्यपरायणता, तत्परता और मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश की।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को अपराह्न करीब 4:30 बजे कृष्णानगर थाना क्षेत्र के भोलाखेड़ा चौकी के पास स्थित नहर में आलोक सिंह (करीब 30 वर्ष), निवासी कनौसी, मानकनगर ने कथित तौर पर आत्महत्या के उद्देश्य से छलांग लगा दी। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बिना समय गंवाए राहत एवं बचाव की कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस टीम ने स्थानीय लोगों के सहयोग से युवक को नहर से बाहर निकाला और तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए लोकबंधु अस्पताल भिजवाया।
परिजनों से बातचीत के दौरान पता चला कि युवक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जूझ रहा है और उसका चिकित्सकीय उपचार चल रहा है। परिजनों के अनुसार, घटना से पहले उसने अपने हाथ पर कई जगह चोटें भी पहुंचाई थीं और साबुन का सेवन कर लिया था। ऐसे में समय रहते पुलिस की सक्रियता और तत्काल बचाव प्रयास युवक के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुए।
संकट की घड़ी में पुलिस बनी जीवन की उम्मीद
इस पूरे घटनाक्रम में दरोगा सच्चिदानंद पांडेय और पुलिस टीम की तत्परता ने यह संदेश दिया कि पुलिस का दायित्व केवल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर किसी की जिंदगी बचाने के लिए आगे आना भी उसकी सर्वोच्च जिम्मेदारियों में शामिल है। संकट की घड़ी में दिखाई गई संवेदनशीलता और कर्तव्यनिष्ठा पुलिस के मानवीय चेहरे को उजागर करती है।
थाना प्रभारी निरीक्षक पीके सिंह के नेतृत्व में कृष्णानगर पुलिस टीम की इस कार्रवाई ने खाकी की गरिमा को एक बार फिर सम्मान दिलाया। वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों की सजगता, साहस और सेवा भावना यह भरोसा मजबूत करती है कि मुसीबत के समय पुलिस जनता के साथ खड़ी है।
एक बार फिर दरोगा सच्चिदानंद पांडेय ने अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण से यह साबित किया कि वर्दी की असली पहचान केवल सख्ती नहीं, बल्कि संवेदना, सेवा और जीवन की रक्षा भी है।
रिपोर्टर - उमेश विश्वकर्मा

No Previous Comments found.