भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस, जांच व कार्रवाई की मांग

लोहरदगा : शहर के होटल केतकी पैलेस में 16 फरवरी 2026 को भारतीय सूचना अधिकार रक्षा मंच की जिला कमेटी द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंचायत सचिव विश्वनाथ प्रजापति पर लगे आरोपों को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। मंच के जिला अध्यक्ष शकील अख्तर ने आरोप लगाया कि पंचायत सचिव को जिला पंचायती राज पदाधिकारी द्वारा बचाया जा रहा है, जो नियम के विरुद्ध है।

प्रेस वार्ता में जिला संरक्षक प्रदीप राणा, जिला उपाध्यक्ष उपेंद्र यादव, एजाज अख्तर, सुनील राम एवं जिला सचिव संजय विश्वकर्मा मौजूद थे।
कई प्रखंडों में अनियमितता का आरोप
शकील अख्तर ने बताया कि विश्वनाथ प्रजापति की बहाली वर्ष 2010 में प्रखंड सेन्हा में हुई थी। इसके बाद कुडू, सेन्हा, लोहरदगा, पेसरार और वर्तमान में किस्को प्रखंड में पदस्थापन के दौरान 13वें, 14वें एवं 15वें वित्त आयोग की योजनाओं में लघु खनिज मद में बिना स्वामित्व कटौती भुगतान करने, सरकारी राशि के दुरुपयोग तथा मनरेगा योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं।
उन्होंने कहा कि उप विकास आयुक्त लोहरदगा द्वारा पूर्व में गबन राशि जमा कराने एवं प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया गया था, इसके बावजूद संबंधित पंचायत सचिव को अतिरिक्त प्रभार दिए जाते रहे।
प्रखंड विकास पदाधिकारी सेन्हा एवं अन्य प्रखंडों द्वारा भी पत्राचार कर अनियमितता की जांच व कार्रवाई की अनुशंसा की गई है। जिला खनन पदाधिकारी द्वारा भी वित्त आयोग मद से संबंधित निर्माण कार्यों में प्रयुक्त लघु खनिजों की जांच का निर्देश दिया गया है।
कार्रवाई नहीं होने पर उठाया सवाल
मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि उप विकास आयुक्त द्वारा 6 फरवरी 2026 को जांच कर 10 फरवरी तक कृत कार्रवाई प्रतिवेदन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी श्रीमती अंजना दास पर आदेश की अवहेलना का आरोप लगाया गया।
न्यायालय में मामले दर्ज
मंच ने बताया कि पंचायत सचिव के विरुद्ध सीजेएम न्यायालय में कंप्लेन केस संख्या 0000002/2026 दर्ज है, जिसमें पैसे की ठगी का आरोप है। वहीं अनुमंडल पदाधिकारी (विधि शाखा) लोहरदगा की अदालत में वाद संख्या 21/2026, धारा 126 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत भी मामला दर्ज है।
इसके अलावा आरटीआई कार्यकर्ता को धमकी देने तथा हथियार दिखाने का आरोप भी लगाया गया है। सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6(1) एवं 6(2) के तहत विभिन्न पदाधिकारियों को आवेदन दिए जाने के बावजूद सूचना अप्राप्त रहने की बात कही गई।
उच्च न्यायालय जाने की चेतावनी
शकील अख्तर ने कहा कि यदि शीघ्र निष्पक्ष जांच व कार्रवाई नहीं हुई तो मंच द्वारा झारखंड उच्च न्यायालय में रिट दायर की जाएगी। जरूरत पड़ने पर रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस एवं महाधरना प्रदर्शन भी किया जाएगा।
जिला संरक्षक प्रदीप राणा ने कहा कि मनरेगा जैसी योजना, जो मजदूरों को रोजगार की गारंटी देती है, उसमें अनियमितता गंभीर विषय है। उन्होंने संबंधित पंचायत सचिव के पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कर कठोर कार्रवाई की मांग की।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच ने जिला प्रशासन से सूचना का अधिकार अधिनियम का पालन सुनिश्चित करने तथा आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

रिपोर्टर : निहाल 

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