CSR फंड के खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की उठी आवाज
लोहरदगा - जिले के पाखर, रिचुघुटा कॉल वर्क्स के सचिव हन्नान अंसारी वं महासचिव रियाज अंसारी सहित आसपास के ग्रामीणों का कहना है कि पाखर में लंबे समय से खनन गतिविधियां संचालित हो रही हैं। क्षेत्र की खनिज संपदा से उद्योगों को लाभ मिल रहा है, लेकिन खनन प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं और विकास को लेकर ग्रामीणों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस क्षेत्र की खनिज संपदा देश और उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है, वहां के लोगों को भी विकास का उचित लाभ मिलना चाहिए।
इसी मुद्दे को लेकर हिंडाल्को प्रबंधन से CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) के तहत किए जा रहे कार्यों और उनके वास्तविक प्रभाव को लेकर जवाबदेही की मांग उठ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि CSR के तहत विकास कार्यों की जानकारी और घोषणाओं के साथ-साथ यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पाखर, रिचुघुटा और आसपास के गांवों में धरातल पर कितना बदलाव आया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण जैसी बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता जताई जा रही है। मांग है कि प्रभावित गांवों के सरकारी विद्यालयों की स्थिति का सर्वे कराकर जर्जर भवनों की मरम्मत, बच्चों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं, कंप्यूटर शिक्षा, पुस्तकालय और जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने की दिशा में पहल हो। स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी ग्रामीणों की अपेक्षाएं हैं। खनन प्रभावित क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य शिविर, डॉक्टरों की टीम, आवश्यक दवाइयां, एंबुलेंस सुविधा और खनन से जुड़ी धूल एवं प्रदूषण के संभावित प्रभावों की स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की जानी चाहिए।
वहीं, पेयजल संकट से जूझ रहे गांवों में जलमीनार, खराब चापाकलों की मरम्मत और पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन गतिविधियों और भारी वाहनों के आवागमन से प्रभावित सड़कों की मरम्मत तथा गांवों में नाली, पुलिया और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं के विकास में भी कंपनी को सहयोग करना चाहिए।
स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग
इस पूरे मुद्दे में स्थानीय युवाओं के रोजगार का सवाल भी अहम है। ग्रामीणों की मांग है कि कंपनी और उससे जुड़ी एजेंसियों में योग्यता के अनुसार स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जाएं। इसके लिए ड्राइविंग, मशीन ऑपरेशन, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डिंग और कंप्यूटर जैसे क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं, ताकि युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रोजगार से जुड़ सकें।
इसके अलावा आदिवासी और कमजोर वर्ग के परिवारों के उत्थान, महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने, किसानों एवं पशुपालकों को तकनीकी सहयोग देने तथा ग्रामीण युवाओं के लिए खेल मैदान और अध्ययन केंद्र विकसित करने की भी जरूरत बताई जा रही है।
CSR फंड का खर्च सार्वजनिक करने की मांग
ग्रामीण विकास से जुड़े लोगों का सबसे महत्वपूर्ण सवाल CSR फंड के इस्तेमाल को लेकर है। मांग की जा रही है कि हिंडाल्को प्रबंधन CSR के वार्षिक बजट, खनन प्रभावित गांवों में खर्च की गई राशि, कराए गए कार्यों और अधूरे विकास कार्यों का विवरण सार्वजनिक करे।
साथ ही प्रत्येक गांव की जरूरतों का सर्वे कराकर ग्रामसभा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से विकास योजनाएं तैयार की जाएं। योजनाओं के लिए बजट, काम पूरा करने की समयसीमा और जिम्मेदार अधिकारियों की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए, ताकि ग्रामीण विकास कार्यों की निगरानी कर सकें।
पर्यावरण संरक्षण भी बड़ी चुनौती
खनन गतिविधियों के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी गंभीर पहल की जरूरत बताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में धूल और प्रदूषण पर नियंत्रण, पौधारोपण, जलस्रोतों का संरक्षण, नियमित पर्यावरण निगरानी तथा खनन से प्रभावित भूमि के सुधार पर विशेष ध्यान देने की मांग उठ रही है।
हिंडाल्को प्रबंधन से ग्रामीणों के सीधे सवाल
ग्रामीणों की ओर से प्रबंधन से सवाल किया जा रहा है कि पाखर, रिचुघुटा और आसपास के सभी खनन प्रभावित गांवों की समस्याओं का विस्तृत सर्वे कराया गया है या नहीं? इन गांवों के विकास के लिए CSR के तहत कितना बजट निर्धारित किया गया है? अब तक किन गांवों में कौन-कौन से स्थायी विकास कार्य कराए गए हैं? स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने के लिए कंपनी की क्या योजना है? पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए क्या समयसीमा तय की गई है क्या CSR फंड के खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाएगा
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी कंपनी के विरोध में नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास के पक्षधर हैं। उनकी अपेक्षा है कि कंपनी प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो तथा विकास योजनाएं कार्यालयों तक सीमित रहने के बजाय गांवों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप धरातल पर दिखाई दें।
अब देखना होगा कि हिंडाल्को प्रबंधन ग्रामीणों की इन अपेक्षाओं और सवालों पर क्या रुख अपनाता है तथा खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
रिपोर्टर - नेहाल अहमद

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