लखनऊ में 'लकीर का फकीर' पुस्तक पर विवाद, पुस्तक में भगवान विष्णु को बोला गया है बलात्कारी
हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को जगत का पालनहार और धर्म का पालक माना जाता है। सनातन परंपरा के अनुसार, देश और दुनिया में होने वाली हर छोटी-बड़ी पूजा, अनुष्ठान या मांगलिक कार्य में भगवान विष्णु का स्मरण किए बिना कोई भी पूजा संपन्न नहीं होती है। ऐसे आराध्य और पूजनीय देव को लेकर लखनऊ में एक बेहद आपत्तिजनक मामला सामने आया है। राजधानी के हजरतगंज थाने में 'लकीर का फकीर' नामक एक विवादित पुस्तक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें भगवान विष्णु के स्वरूप और अवतारों पर अमर्यादित टिप्पणियां करते हुए सनसनीखेज आरोप लगाए गए हैं।
लखनऊ प्रेस क्लब में राजनीतिक विलय और पुस्तक पर तीखा हमला
दिनांक 13 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के ऐतिहासिक प्रेस क्लब में संविधानवादी समाज पार्टी की ओर से एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इस प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए अपना औपचारिक विलय पंजीकृत राजनीतिक दल 'अखिल भारतीय सर्वजन हित पार्टी' में कर लिया। इस अवसर पर पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए अहम नियुक्तियां भी की गईं, जिसके तहत पंकज त्रिपाठी को पार्टी का नया राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किया गया।
इस महत्वपूर्ण घोषणा के बाद पार्टी के पदाधिकारियों ने प्रेस के माध्यम से देश और प्रदेश से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को मीडिया के सामने रखा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजनीतिक मुद्दों पर बात करते हुए पंकज त्रिपाठी ने सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा निशाना साधा। इसी कड़ी में उन्होंने हाल ही में चर्चा में आई 'लकीर का फकीर' नामक पुस्तक का विशेष रूप से जिक्र किया और उस पर समाज में वैमनस्य फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। पंकज त्रिपाठी का कहना था कि इस तरह की किताबें समाज के वैचारिक माहौल को दूषित करती हैं। इस पुस्तक को लेकर पहले ही हजरतगंज थाने में लिखित शिकायत दी जा चुकी है।
पुस्तक की डिटेल्स और शिकायती पत्र में लगाए गए गंभीर आरोप
संविधानवादी समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष (उत्तर प्रदेश) सुरेश कुमार त्रिपाठी द्वारा थाना अध्यक्ष हजरतगंज को एक शिकायती पत्र (पत्रांक - राम/10/26, दिनांक 03/10/2026) सौंपा गया है। शिकायत के मुताबिक, इस विवादित पुस्तक से जुड़ी मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं:
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लेखक: राजीव पटेल और संजय कुमार सिंह
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प्रकाशक: सम्यक प्रकाशन, बालाजी प्रिंटर्स, दयाबस्ती, नई दिल्ली
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ISBN नंबर: 978-81-949470-3-5
शिकायती पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि पुस्तक में सनातन धर्म, संस्कृति और महापुरुषों के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिससे धार्मिक एवं जातीय विद्वेष फैल सकता है:
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रावण वध पर टिप्पणी (पृष्ठ संख्या 15): पुस्तक में लिखा गया है कि "रावण की हत्या की खुशी सिर्फ महाराष्ट्र में ही क्यों, पूरे भारत में क्यों नहीं?"
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भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार पर टिप्पणी (पृष्ठ संख्या 33): इसमें भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को लेकर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए इसे जानवर का मुखौटा लगाकर हत्या करने की घटना बताया गया है।
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होलिका दहन और होली पर आपत्तिजनक बातें (पृष्ठ संख्या 36-37): होलिका दहन और होली पर्व को लेकर अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया है तथा सामूहिक दुष्कर्म जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
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छत्रपति संभाजी महाराज की हत्या (पृष्ठ संख्या 14): इसमें छत्रपति संभाजी महाराज की हत्या को लेकर सीधे तौर पर ब्राह्मण समाज पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा, पत्र में यह भी कहा गया है कि पुस्तक में भगवान श्री राम और श्री कृष्ण को काल्पनिक बताकर उनका अपमान किया गया है और हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों को निशाने पर लिया गया है, जिससे सनातन धर्म को मानने वाले करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं गहरी आहत हुई हैं।
पुलिस से कठोर कार्रवाई और FIR की मांग
पार्टी का कहना है कि इस प्रकार का प्रकाशन भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत एक दंडनीय अपराध है और यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(2) (वाक् स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त प्रतिबंध) तथा अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का खुला उल्लंघन है। अखिल भारतीय सर्वजन हित पार्टी ने प्रशासन से मांग की है कि इस पुस्तक के लेखन, मुद्रण और प्रकाशन से जुड़े सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ तुरंत कठोर कानूनी कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज की जाए। फिलहाल, हजरतगंज पुलिस ने तहरीर प्राप्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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