LPG संकट पर मोदी सरकार का 'एस्मा' प्रहार: जमाखोरों की खैर नहीं
आज की सबसे बड़ी खबर आपके घर के चूल्हे से जुड़ी है। जी हां मिडिल ईस्ट में मचे युद्ध के कोहराम ने भारत की रसोई का जायका बिगाड़ दिया है। दिल्ली की गलियों से लेकर मुंबई की चौपाटी और लखनऊ के नवाबों के शहर तक...हर तरफ सिर्फ एक ही सवाल है कि 'सिलेंडर कब मिलेगा?' कहीं गैस एजेंसियों के बाहर मीलों लंबी कतारें हैं, तो कहीं 178 साल पुराने ऐतिहासिक होटलों के चूल्हे ठंडे पड़ने की कगार पर हैं। लेकिन ठहरिए! घबराइए मत, क्योंकि दिल्ली के सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मोदी सरकार सुपर-एक्टिव मोड में है और कालाबाजारी करने वालों की कमर तोड़ने के लिए 'एस्मा' लागू कर दिया गया है। आइए देखते हैं इस गैस संकट की पूरी पड़ताल और सरकार के वो 6 मास्टरस्ट्रोक जो आपकी रसोई को बचाएंगे!
आपको बता दें गैस किल्लत की खबर मिलते ही केंद्र सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है। जिसके चलते सरकार ने कुछ बड़े फैसले लिए हैं जो आपकी रसोई को बचाएंगे। दरअसल, सरकार ने साफ कर दिया है कि आम जनता को परेशान होने की जरूरत नहीं है। जमाखोरी रोकने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। जैसे..
सभी रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे LPG का उत्पादन अपनी पूरी क्षमता के साथ करें।
PNG, CNG और घरेलू LPG को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाएगी।
पैनिक बुकिंग रोकने के लिए अब आप 21 नहीं, बल्कि 25 दिन के अंतर पर ही दूसरा सिलेंडर बुक कर पाएंगे।
पेट्रोकेमिकल इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि घरेलू गैस की सप्लाई में एक सेकंड की भी देरी न हो।
अतिरिक्त LPG अब सिर्फ IOCL, BPCL और HPCL जैसी सरकारी कंपनियों को ही बेची जाएगी।
होटलों की किल्लत दूर करने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक स्पेशल कमेटी बना दी है।
आपको बता दें कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने से देश के महानगरों में एलपीजी का भारी संकट खड़ा हो गया है। राजधानी दिल्ली में जहाँ गैस बुकिंग सिस्टम ठप पड़ा है, वहीं मुंबई में ईंधन की कमी ने 178 साल पुराने ऐतिहासिक होटलों के चूल्हे भी ठंडे करने शुरू कर दिए हैं। दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर प्रदेश और बिहार में सिलेंडर के लिए हाहाकार मचा है। सरकार द्वारा जारी टोल-फ्री नंबर स्विच ऑफ आ रहे हैं। ऑनलाइन बुकिंग न होने के कारण उपभोक्ता कड़ाकती धूप में गैस एजेंसियों के बाहर घंटों लाइनों में लगने को मजबूर हैं। लोग सड़कों पर उतर आए हैं और गैस एजेंसियों के बाहर सुबह 4 बजे से ही कतारें लग रही हैं। 7 मार्च को हुई कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई में 80% तक की कटौती के बाद मुंबई के लोगों ने अपना रास्ता बदल लिया है। लोग अब गैस के भरोसे बैठने के बजाय इलेक्ट्रिक कुकर, एयर फ्रायर, माइक्रोवेव और इंडक्शन जैसे बिजली से चलने वाले उपकरणों की ओर रुख कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक बाजारों में किचन के सामानों की मांग में अचानक भारी उछाल देखा जा रहा है। कमर्शियल गैस की किल्लत का सबसे दर्दनाक असर मुंबई के ऐतिहासिक होटलों पर पड़ा है। CSMT के पास स्थित 1848 से चल रहा 'पंचम पुरीवाला' होटल आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। जहाँ कभी 79 तरह के पकवान मिलते थे, वहाँ गैस की कमी के कारण अब सिर्फ पूरी-भाजी और आमरस-पूरी ही मिल पा रही है। वहीं राम नगरी अयोध्या में शाम तक चलने वाली रसोई दोपहर 2 बजे ही बंद करनी पड़ी। अब मंदिरों में फिर से लकड़ी और कोयले का दौर लौट आया है। लखनऊ में मारामारी है, तो हरियाणा और पंजाब में शादियों का सीजन फीका पड़ रहा है। हलवाई परेशान हैं क्योंकि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई 80% तक कट गई है। दूसरी तरफ उत्तराखंड सरकार ने होटलों और ढाबों को गैस देने पर लगभग रोक लगा दी है। अब सिर्फ अस्पताल और स्कूल ही प्राथमिकता पर रहेंगे।
वहीं ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर फेडरेशन का कहना है कि यह दिक्कत बस कुछ दिनों की है। जैसे ही रूस से सप्लाई शुरू होगी, ये संकट धुएं की तरह उड़ जाएगा। आपको बता दें सिर्फ रसोई ही नहीं, सड़कों पर भी सन्नाटा पसरने का डर है। भोपाल समेत उत्तर भारत के कई शहरों में पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के लिए घंटों इंतजार कर रहे हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो चुनौती बड़ी है, लेकिन सरकार के इंतजाम भी कड़े हैं। रूस से सप्लाई शुरू होने की उम्मीद है, जिससे ये किल्लत जल्द खत्म हो सकती है। हमारी आपसे अपील है कि 'पैनिक बुकिंग' न करें और जमाखोरी से बचें, ताकि गैस हर जरूरतमंद तक पहुंच सके। इस युद्ध काल में संयम ही सबसे बड़ा हथियार है!

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