अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का अंबालिका इंस्टीट्यूट में दूसरे दिन हुआ आयोजन

मोहनलालगंज :  शनिवार के दिन अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में आयोजित दूसरे दिन पहले दिन शुक्रवार की गति को आगे बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का सेमिनार हॉल में आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रतापगढ़ रामपुर खास से कांग्रेस पार्टी की विधायक श्रीमती अराधना मिश्रा व लखनऊ सरोजिनी नगर से भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। चुनौतियाँ और अवसर कृत्रिम बुद्धिमत्ता में इंजीनियरिंग और प्रबंधन अनुप्रयोग” (कोआइमा- 2025) का दूसरा और अंतिम दिन अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी मोहनलालगंज, लखनऊ में 8 मार्च 2024 को आयोजित हुआ। पहले दिन की तरह, इस दिन भी प्रतिष्ठित वक्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता ए.आई के विभिन्न पहलुओं पर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया। जहां उद्घाटन दिवस में मुख्य विषयों पर चर्चा हुई थी, वहीं दूसरे दिन विशेष अनुप्रयोगों, नैतिक विचारों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के भविष्य को लेकर गहन विमर्श हुआ। सम्मेलन का समापन समापन सत्र के साथ हुआ, जिसमें गणमान्य अतिथियों ने ए.आई अनुसंधान और विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। तकनीकी सत्र एवं विशेषज्ञ व्याख्यान करते हुए अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक प्रो. (डॉ.) आशुतोष द्विवेदी ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ए.आई के व्यापक प्रभाव को रेखांकित किया। सुबह के सत्र में जॉन डीरे यूएसए से जुड़े बृज एन. सिंह ने एक वर्चुअल सत्र के माध्यम से नवीनतम शोध और ए.आई में उभरते रुझानों पर प्रकाश डाला। आई.आई.आई टी लखनऊ के डॉ. दीपक सिंह ने डेटा सर्वेक्षण पद्धतियों पर विस्तृत जानकारी दी, जबकि यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक, यू.के. के अमीर रज़ा ने “सतत विकास और नैतिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता” (स्थिरता और नैतिक एआई) की महत्वपूर्णता को रेखांकित किया। बेंगलुरु स्थित के.एस.जी सेंटर फॉर क्वालिटी माइंड्स के निदेशक प्रो. (डॉ.) के.एस. गुप्ता ने छात्रों से संवाद करते हुए “रिवर्स ग्लास सिंड्रोम” और आत्म-देखभाल के महत्व पर चर्चा की। एम.एन.एन.आई.टी प्रयागराज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीष तिवारी ने एलओटी और ए.आई अनुप्रयोगों के बीच तालमेल पर बात रखी। वहीं, मेलबर्न, ऑस्ट्रेलिया से देवेंद्र गुप्ता ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में मौजूदा चुनौतियों और अवसरों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। कैलिफोर्निया, अमेरिका से शिवेश सिन्हा ने ए. एमडी में ए.आई कार्यान्वयन की व्यावहारिक जानकारी दी और कंपनी के नवीनतम जीपीयू विकास प्रयासों पर चर्चा की।समापन सत्र में सरोजिनी नगर (लखनऊ) के विधायक एवं पूर्व संयुक्त निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), डॉ. राजेश्वर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने नैतिक शासन और तकनीकी प्रगति के संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे ए.आई समाज के लिए एक लाभदायक साधन बन सके। उन्होंने अपने कानून प्रवर्तन और सार्वजनिक सेवा अनुभवों के आधार पर उत्तरदायी ए.आई विकास की जरूरत को रेखांकित किया। इस अवसर पर अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की उपाध्यक्ष एवं रामपुर खास (प्रतापगढ़) की विधायक, श्रीमती अराधना मिश्रा ने भी उपस्थित होकर ए.आई के क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी जैसे संस्थानों को भविष्य की पीढ़ी को ए.आई की शक्ति को सकारात्मक दिशा में उपयोग करने के लिए तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाला बताया। उन्होंने सभी वर्गों के छात्रों के लिए तकनीकी शिक्षा की समावेशिता और पहुँच एआई शिक्षा तक पहुंच पर विशेष जोर दिया। अंबालिका इंस्टिट्यूट में आयोजित 8वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी डॉ. राजेश्वर सिंह ने ए.आई की शक्ति और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। भारत को ए.आई क्रांति में नेतृत्व करना चाहिए डॉ. राजेश्वर सिंह ने इंजीनियरों के लिए डिजिटल साक्षरता का आह्वान किया। हर साल 1.5 मिलियन इंजीनियर स्नातक होते हैं, डॉ. राजेश्वर सिंह ने वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए ए.आई को अपनाने पर जोर दिया। डॉ. राजेश्वर सिंह ने बताया की भविष्यवक्ताओं का अनुमान 2045 तक मशीनें मानव बुद्धिमत्ता से आगे निकल जाएंगी। लखनऊ सरोजनीनगर विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने शनिवार को मोहनलालगंज स्थित अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड साइंस में आयोजित "कृत्रिम बुद्धिमत्ता ए.आई में चुनौतियाँ और अवसर" विषय पर 8वीं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग लिया। उन्होंने बड़ी संख्या में उपस्थित इंजीनियरिंग छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि ए.आई आने वाले समय में दुनिया को बदलने वाली सबसे महत्वपूर्ण तकनीक है, और युवाओं को इस क्षेत्र में दक्षता हासिल करनी चाहिए। डॉ. सिंह ने बताया कि 1950 में "आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" शब्द गढ़े जाने के बाद से ए.आई ने अभूतपूर्व प्रगति की है, और विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2045 तक मशीनें मानव बुद्धि से आगे निकल सकती हैं। उन्होंने कहा कि ए.आई का विकास इंटरनेट की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से हो रहा है। अमेरिका और भारत सहित कई बड़े देश ए.आई अनुसंधान और विकास में भारी निवेश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ए.आई परियोजनाओं के लिए ₹10,371 करोड़ आवंटित किए हैं, ताकि देश इस क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना रहे। उत्तर प्रदेश में ए.आई के विकास पर चर्चा करते हुए, डॉ. सिंह ने बताया कि सरोजिनी नगर के नादरगंज में एक ए.आई इंटेलिजेंस सेंटर स्थापित किया जा रहा है, जो फोरेंसिक साइंस, मशीन लर्निंग और प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान देगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश तेजी से डिजिटल बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। डॉ. सिंह ने बताया कि ए.आई शासन, स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त और परिवहन सहित कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कुंभ मेले में 65 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की भीड़ प्रबंधन में ए.आई का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिससे यातायात, सुरक्षा और प्रशासनिक कार्यों में अभूतपूर्व सफलता मिली। उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में धोखाधड़ी की रोकथाम, स्वास्थ्य क्षेत्र में रोगों की पहचान और परिवहन में मार्ग अनुकूलन में ए.आई की भूमिका को भी रेखांकित किया। डॉ. सिंह ने डिजिटल साक्षरता को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि ए.आई को समझना अब एक विकल्प नहीं, बल्कि सफलता की कुंजी है। उन्होंने चेताया कि यदि भारत डिजिटल डिवाइड (डिजिटल अंतराल) को दूर नहीं करता, तो देश वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकता है। उन्होंने ए.आई से जुड़े नैतिक मुद्दों पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में ए.आई का उपयोग किस हद तक होना चाहिए, इस पर गंभीर विचार होना चाहिए। उन्होंने युद्ध और सैन्य अभियानों में ए.आई की भूमिका को लेकर चिंता जताई और कहा कि मशीनें कब और कैसे निर्णय लेंगी, यह एक संवेदनशील विषय है, इसलिए ए.आई के उपयोग की सीमाएँ तय करना आवश्यक है। डॉ. सिंह ने भारत में साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई। उन्होंने बताया कि 2018 में जहां साइबर अपराध के 26,000 मामले सामने आए थे, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 26 लाख तक पहुँच गई है। उन्होंने कहा कि देश को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कुशल इंजीनियरों और विशेषज्ञों की आवश्यकता है, ताकि डिजिटल खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके। डॉ. सिंह ने उपस्थित छात्रों से आग्रह किया कि वे ए.आई अनुसंधान, कौशल विकास और नवाचार में सक्रिय रूप से भाग लें, ताकि डिजिटल इंडिया मिशन और ए.आई स्टार्टअप्स के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई ₹10,371 करोड़ की निधि का अधिकतम लाभ उठाया जा सके। इस दौरान विधायक ने सम्बंधित विषय पर आर्टिकल प्रस्तुत  करने वाले विजेताओं को ट्राफी भी प्रदान की। कार्यक्रम में संस्थान के चेयरमैन अंबिका मिश्रा, निदेशक डॉ. अशुतोष द्विवेदी, अतिरिक्त निदेशक डॉ. श्वेता मिश्रा, पूर्व आईंआरएस अधिकारी रामेश्वर सिंह, केएसजी (सेंटर फॉर क्वालिटी माइंड्स, बेंगलुरु) के निदेशक प्रो. के. एस. गुप्ता, अकादमिक विशेषज्ञ कर्नल डॉ. समीर मिश्रा, ब्रिगेडियर आर. के. सिंह, और लखनऊ विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. पुनीत मिश्रा मौजूद रहे  थे। सम्मेलन के सफल समापन के अवसर पर अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की अतिरिक्त निदेशक एवं कोआइमा-2025 की संयोजक प्रो. श्वेता मिश्रा ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों, आयोजकों एवं प्रायोजकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने अंबालिका इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की ओर से ए.आई नवाचार और सहयोग को प्रोत्साहित करने की प्रतिबद्धता दोहराई और भविष्य में इस विषय पर और अधिक सम्मेलन आयोजित करने की बात कही, जिससे इस सम्मेलन द्वारा उत्पन्न ऊर्जा और संवाद को आगे बढ़ाया जा सके।

रिपोर्टर : धीरज 

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