लखनऊ में श्रद्धा के सैलाब में चोरों की सेंध,बड़े मंगल' पर मोबाइल चुराने आए नन्हे 'शातिर
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इस समय आस्था का सागर उमड़ा हुआ है। श्री हनुमान जी के बड़े मंगल पर हर गली, हर मोहल्ला भक्ति के रंग में रंगा नजर आ रहा है। मंदिरों में घंटियों की गूंज, जगह-जगह लगे भंडारे और श्रद्धालुओं की लंबी कतारें इस पर्व की गरिमा को चार चांद लगा रही हैं। लेकिन इस आध्यात्मिक माहौल में कुछ चेहरे ऐसे भी हैं जो भीड़ को मौका समझ कर अपने काले कारनामों को अंजाम देने से नहीं चूक रहे।
ऐसी ही एक चौंकाने वाली घटना अलीगंज के प्रगति बाजार के पास देखने को मिली, जहां भंडारे में प्रसाद पाने को लाइन में लगे श्रद्धालुओं के बीच एक 10-12 साल का बच्चा चोर बनकर पहुंचा। इस भीड़ में मौजूद रणविजय त्रिपाठी भी भक्तिभाव से खड़े थे, तभी उन्हें अचानक महसूस हुआ कि कोई उनकी जेब में हाथ डाल रहा है। उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए उस बच्चे का हाथ दबोच लिया।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अपने को फंसा देख नन्हा चोर एक पल में राक्षसी चालाकी दिखाता है और रणविजय की उंगली पर ज़ोरदार काट मारता है! रणविजय जी दर्द से चिल्लाए, और जब तक लोग कुछ समझ पाते, चोर बच्चा भीड़ में गायब हो चुका था। रणविजय जी का मोबाइल तो बच गया, लेकिन उंगली में गहरा घाव लेकर वे वहां से लौटे।
इस घटना ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर भक्ति और विश्वास के इस पर्व पर पुलिस की सतर्कता कहां थी? यह घटना दिन दहाड़े, वह भी एक पॉश और भीड़भाड़ वाले इलाके में होती है, और एक मासूम दिखने वाला चोर बड़ी सफाई से वारदात को अंजाम देता है — यह चिंता का विषय है।
स्थानीय लोग अब कहने लगे हैं कि “बड़े मंगल” जैसे श्रद्धा के पर्व पर जहां हम प्रसाद के लिए कतार में लगते हैं, वहीं जेब कटने का डर भी साथ लेकर चलना होगा। सवाल यह है कि जब नाबालिग बच्चों को गिरोह में शामिल कर चोरी करवाई जा रही है, तो इन मासूमों के पीछे असली 'खेल' कौन खेल रहा है?
अब ज़रूरत है कि पुलिस प्रशासन ऐसे मौकों पर अतिरिक्त सतर्कता बरते, ताकि श्रद्धा का यह उत्सव श्रद्धा और सुरक्षा – दोनों का पर्व बन सके।
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