निगोहां में श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन उमड़ा भक्तों का सैलाब,राम जन्म व श्रीकृष्ण लीला सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
लखनऊ : निगोहां क्षेत्र में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। कथा स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी और सैकड़ों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने कथा श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त किया। पूरा परिसर भक्ति रस में डूबा नजर आया और भगवान के जयकारों से वातावरण गूंज उठा।कथावाचक आचार्य दुर्गेश अवस्थी ने अपने मधुर वाणी में भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर उनके बाल्यकाल की दिव्य लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार महर्षि वशिष्ठ ने भगवान राम को राजनीति, धर्म, सत्य, मर्यादा और अस्त्र-शस्त्र का ज्ञान देकर उन्हें एक आदर्श राजा बनने की शिक्षा दी। इसके साथ ही माता सीता और भगवान राम के विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पावन कथा का भी विस्तार से वर्णन किया गया। आचार्य ने बताया कि अत्याचारी राजा कंस को यह भय सताने लगा था कि उसकी बहन देवकी की आठवीं संतान ही उसकी मृत्यु का कारण बनेगी। इसी भय के कारण उसने देवकी और उनके पति वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया था। लेकिन जब भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य प्राकट्य हुआ तो कंस का अहंकार चूर-चूर हो गया और ईश्वर की लीला का संदेश संसार को मिला।कथावाचक ने ध्रुव चरित्र का उल्लेख करते हुए बताया कि बालक ध्रुव ने अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प के बल पर भगवान को प्रसन्न किया और अमर ध्रुव तारा का स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही भगवान के विभिन्न अवतारों का महत्व, चतुर्सन ऋषियों की कथा तथा महाराज पृथु के जीवन से जुड़े प्रेरणादायक प्रसंगों पर भी प्रकाश डाला गया।आचार्य दुर्गेश अवस्थी ने कहा कि श्रीमद भागवत कथा हमें सच्ची निष्ठा, दृढ़ संकल्प और भगवान के प्रति अटूट भक्ति का मार्ग दिखाती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करता है, भगवान स्वयं उसके जीवन के कष्टों को दूर कर देते हैं।कथा के दौरान भजन-कीर्तन और भगवान के जयकारों से पूरा पंडाल भक्तिमय माहौल में डूबा रहा। कार्यक्रम में क्षेत्र के बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और युवा उपस्थित रहे तथा अंत में प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
रिपोर्टर : धीरज


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