किसान पंचायत में उमड़ा जनसैलाब बैलगाड़ी जुलूस के साथ भारतीय किसान क्रांति यूनियन’ का ऐलान सड़क से सदन तक लड़ेंगे किसानों के लिए...

मोहनलालगंज :  लखनऊ।मंगलवार को मोहनलालगंज क्षेत्र स्थित एक निजी गेस्ट हाउस में आयोजित किसान पंचायत उस समय ऐतिहासिक बन गई, जब हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने जोरदार उपस्थिति दर्ज कराते हुए अपनी एकजुटता का परिचय दिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान जोश, उत्साह और शक्ति प्रदर्शन का माहौल बना रहा। इसी बीच ‘भारतीय किसान क्रांति यूनियन’ के गठन की औपचारिक घोषणा की गई, जिसे लेकर किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला।किसान पंचायत में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से किसान पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही किसानों का जुटान शुरू हो गया था, जो दोपहर तक जनसैलाब में तब्दील हो गया। आयोजन स्थल पर किसानों की भीड़ और उनके जोशीले नारों ने पूरे माहौल को किसानमय बना दिया।कार्यक्रम का सबसे आकर्षक दृश्य तब देखने को मिला जब संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट ऋषि मिश्रा का किसानों ने फूल मालाओं से भव्य स्वागत किया। इसके बाद उन्हें कार्यक्रम स्थल के मुख्य द्वार से बैलगाड़ी पर बैठाकर जुलूस के रूप में मंच तक लाया गया। यह नजारा पूरे आयोजन का केंद्र बिंदु रहा, जिसे देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

अपने संबोधन में ऋषि मिश्रा ने कहा कि यह संगठन किसानों के हक और अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए बनाया गया है। उन्होंने बताया कि वह पहले किसान यूनियन भानु गुट में प्रदेश प्रभारी के पद पर कार्यरत थे, लेकिन किसानों की आवाज को और मजबूती देने के उद्देश्य से उन्होंने उस संगठन से इस्तीफा देकर नया संगठन खड़ा किया है।उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब किसानों के मुद्दों को दबने नहीं दिया जाएगा और जरूरत पड़ी तो “सड़क से सदन तक आंदोलन किया जाएगा।
राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल वर्मा ने अपने संबोधन में कार्यक्रम में आए सभी किसानों और अतिथियों का अभिवादन करते हुए कहा कि संगठन की ताकत उसकी एकजुटता में है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अपने अधिकारों के लिए एक मंच पर एकत्र होकर संघर्ष करें।
कार्यक्रम के दौरान संगठन की संरचना को भी मजबूती देने का ऐलान किया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश के 38 जिलों में जिलाध्यक्षों और मंडल स्तर के पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई है, जिससे संगठन को गांव-गांव तक मजबूत किया जा सके।बैठक में किसानों से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन की ओर से जल्द ही प्रधानमंत्री के नाम 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपने की घोषणा की गई, जिसमें किसानों की प्रमुख समस्याओं के समाधान की मांग की जाएगी।ज्ञापन में फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी सुनिश्चित करने, किसानों के कर्ज माफी के लिए ठोस नीति लागू करने, सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और नहरों में नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है।इसके साथ ही पंचायत में किसानों ने बिजली, सड़क और पानी की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। ग्रामीण क्षेत्रों में अनियमित बिजली आपूर्ति, जर्जर सड़कों और पेयजल संकट को लेकर किसानों में नाराजगी देखने को मिली। किसानों ने मांग की कि गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, खराब सड़कों का जल्द निर्माण कराया जाए और हर घर तक स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
इसके अलावा आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान को रोकने, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बांधों की नियमित निगरानी और मरम्मत कराने की भी मांग उठाई गई।संगठन ने राजस्व संबंधी मामलों जैसे नामांतरण, पैमाइश, खतौनी आदि का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की है। साथ ही गरीब परिवारों के मकानों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने और पुनर्वास के बाद ही कार्रवाई करने की बात कही गई।इसके अलावा किसानों को समय पर उर्वरक, बीज और कृषि उपकरण उपलब्ध कराने, गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने और 14 दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग भी प्रमुख रूप से रखी गई। गौवंश के गोबर की खरीद कर जैविक खाद बनाने की योजना लागू करने और पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली को पारदर्शी व जवाबदेह बनाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।कार्यक्रम के अंत में संगठन के पदाधिकारियों ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि सरकार द्वारा किसानों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में व्यापक स्तर पर आंदोलन छेड़ा जाएगा।

रिपोर्टर : दीरज

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