जरूरी जानकारी: भारत-अमेरिका ट्रेड डील से किसानों को खतरा

लखनऊ - 1 से 4 जून 2026 तक अमेरिका का उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में है। इसका नेतृत्व अमेरिका के चीफ ट्रेड नेगोशिएटर कर रहे हैं। मकसद है इंटरिम ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देना।

अमेरिका क्या-क्या भारत भेजना चाहता है? इस डील में मार्केट एक्सेस सबसे बड़ा मुद्दा है। अमेरिका चाहता है कि ये चीजें बिना टैक्स या कम टैक्स पर भारत आएं: गेहूं और मक्का दाल और सोयाबीन दूध और डेयरी उत्पाद सेब,बादाम जैसे फल किसान को क्या नुकसान होगा? भाव गिरेंगे: अमेरिका में खेती पर बहुत ज्यादा सरकारी सब्सिडी है। उनका माल सस्ता पड़ेगा। अगर वो भारत में डंप हुआ तो मंडी में हमारे किसान का गेहूं 1200-1400 ₹/क्विंटल पर भी नहीं बिकेगा।

MSP बेकार हो जाएगी: जब बाजार में ही बाहर का सस्ता माल भरा होगा तो सरकार MSP पर खरीद क्यों करेगी? MSP गारंटी कानून की मांग ही खत्म हो जाएगी। डेयरी सेक्टर तबाह: पंजाब, हरियाणा, यूपी का छोटा पशुपालक अमेरिकी पाउडर वाले दूध के आगे टिक नहीं पाएगा। बीज पर कब्जा: डील में बीज और पेटेंट के नियम भी हैं। बाद में अमेरिकी कंपनियां बीज के रेट खुद तय करेंगी।

 किसका फायदा-किसका नुकसान?
नुकसान: छोटा-मझोला किसान, डेयरी वाले, दाल-तिलहन उगाने वाले।
फायदा: बड़ी अमेरिकी कंपनियां और कुछ एक्सपोर्टर।

निष्कर्ष : 7 फरवरी 2026 को ही इस डील के फ्रेमवर्क पर सहमति बन गई थी। अब 1-4 जून की मीटिंग में इसे पक्का किया जा रहा है। अगर ये डील हो गई तो खेती घाटे का सौदा बन जाएगी। राष्ट्र सर्वोपरि, जय किसान जय भारत निवेदक: भारतीय किसान यूनियन खालसा।

रिपोर्टर - मुकेश 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.