नाविक मान-सम्मान गोष्ठी में बोले कैप्टन संजय पाराशर—नाविकों और जहाजों पर हमले नहीं होने चाहिए
लखनऊ। लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एक निजी होटल में VR Maritime की ओर से आयोजित ‘नाविक मान-सम्मान गोष्ठी’ में नेशनल शिपिंग बोर्ड के पूर्व सदस्य कैप्टन संजय पाराशर ने समुद्री क्षेत्र में भारतीय नाविकों के योगदान, उनकी सुरक्षा और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सामने समुद्री सुरक्षा एक बड़ी चुनौती है और जहाजों पर काम करने वाले नाविकों को किसी भी संघर्ष का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जहाज पर काम करने वाले नाविकों को आने वाली समस्याओं और समुद्री क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों के प्रति लगातार आगाह किया जाना जरूरी है।
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उन्होंने बताया कि VR Maritime से करीब 4,500 नाविक जुड़े हुए हैं, जिनमें लगभग 500 नाविक उत्तर प्रदेश से हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में भी उत्तर प्रदेश के नाविक अपनी मेहनत और दक्षता से अलग पहचान बना रहे हैं। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गर्व की बात बताया।
कैप्टन पाराशर ने पोर्ट एजेंटों और नाविकों से जुड़ी आर्थिक चुनौतियों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि नाविकों के हितों की रक्षा और उनके साथ पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
गोष्ठी में Seafarers Welfare Fund Society (SWFS) के बारे में भी जानकारी दी गई। कैप्टन पाराशर ने कहा कि ऐसी कल्याणकारी योजनाएं नाविकों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा हैं। उन्होंने नाविकों से अपील की कि वे उपलब्ध वेलफेयर स्कीम, वित्तीय सहायता, शिक्षा एवं परिवार कल्याण से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी रखें और जरूरत पड़ने पर उनका लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि नाविकों के साथ-साथ उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा पर भी ध्यान देना आवश्यक है।
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कैप्टन संजय पाराशर ने कहा कि “हमारे लिए हर कोई सम्माननीय है।” उन्होंने कहा कि समुद्री क्षेत्र में काम करने वाले प्रत्येक नाविक का योगदान महत्वपूर्ण है। यदि नाविक जहाज पर ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ बेहतर कार्य करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए भी रोजगार के अवसर मजबूत होंगे।
उन्होंने विशेष रूप से उन नाविकों के योगदान को भी सम्मानित किया, जिन्होंने हॉर्मुज संकट जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ईंधन और आवश्यक सामान लेकर समुद्री मार्गों से आवाजाही जारी रखी।
गोष्ठी में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कैप्टन पाराशर ने कहा कि वर्तमान समय में नाविकों के सामने बड़ी चुनौती उनकी सुरक्षा है। उन्होंने कहा कि जो seafarers समुद्र में काम कर रहे हैं, उन पर हमला नहीं होना चाहिए। जहाजों और नाविकों को युद्ध और संघर्ष का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

पाराशर ने कहा कि समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में Artificial Intelligence (AI) की भूमिका भी लगातार बढ़ रही है। तकनीक के माध्यम से जहाजों की निगरानी, जोखिम की पहचान और सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर किया जा सकता है।
गोष्ठी के दौरान समुद्री क्षेत्र में लंबे समय से योगदान देने वाले सीनियर नाविकों और अनुभवी कर्मियों का सम्मान भी किया गया। कार्यक्रम में नाविकों के अनुभव, सुरक्षा, रोजगार और कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। इस अवसर पर प्रवीण शुक्ला, किशोर पति, नेहा सहित सैकड़ों की संख्या में नाविक और उनके परिवार मौजूद रहे।
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