इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 वापस लेने और बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया पूरी

लखनऊ :  इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 वापस लेने, बिजली के निजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त करने तथा चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग को लेकर आज राजधानी लखनऊ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों, बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं ने संयुक्त किसान मोर्चा और अखिल भारतीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर आयोजित विशाल विरोध प्रदर्शन एवं मार्च में सक्रिय रूप से भाग लिया।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों  ने कहा कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण केवल बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं का सवाल नहीं है, बल्कि यह देश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं, किसानों, मजदूरों और आम जनता के हितों से सीधे जुड़ा प्रश्न है। इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के माध्यम से बिजली वितरण के क्षेत्र में समानांतर लाइसेंस और निजी कंपनियों के प्रवेश का रास्ता खोलना सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करने तथा मुनाफाखोरी को बढ़ावा देने वाला कदम है। इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
     संघर्ष समिति ने निजीकरण के विरोध में हरियाणा के बिजली कर्मचारी और इंजीनियरों की हड़ताल का पूरा समर्थन करते हुए कहा कि 11, 12 और 13 अगस्त को हरियाणा में हो रही हड़ताल का उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी पूरी तरह से समर्थन करते हैं। हरियाणा के बिजली कर्मियों के समर्थन में उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर 11 अगस्त को भोजन अवकाश के दौरान विरोध प्रदर्शन करेंगे।

उन्होंने कहा कि 10 अगस्त को संयुक्त किसान मोर्चा और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर देशभर में विरोध प्रदर्शन और मार्च आयोजित किए गए। इसके तहत लखनऊ में भी मजदूरों, कर्मचारियों, किसानों, शिक्षकों और विभिन्न संगठनों के हजारों कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर केंद्र एवं राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार आवाज बुलंद की।

संघर्ष समिति ने कहा कि चार श्रम संहिताओं को लागू करना मजदूरों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर हमला है। इन संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों के संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है। इसलिए इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।

संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के व्यापक निजीकरण की नीति को तत्काल रोका जाए। बिजली, परिवहन, बैंक, बीमा, रेलवे सहित सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं देश की जनता की संपत्ति हैं और इन्हें निजी कंपनियों को सौंपना देशहित में नहीं है।

आज लखनऊ में परिवर्तन चौक से बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं, किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों और शिक्षकों की विशाल रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारियों ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 वापस लेने, बिजली का निजीकरण बंद करने, श्रम संहिताएं वापस लेने तथा सार्वजनिक क्षेत्र को बचाने के जोरदार नारे लगाए।

रैली को परिवर्तन चौक के निकट मेट्रो स्टेशन के पास रोक दिया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने वहीं जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के उपरांत पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा और महामहिम राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन उनके अधिकृत प्रतिनिधि को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकार की जनविरोधी निजीकरण की  नीतियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।

शैलेन्द्र दुबे ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि “बिजली व्यवस्था मुनाफा कमाने का साधन नहीं, बल्कि जनता की मूलभूत आवश्यकता है। बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों के हवाले कर किसानों, गरीबों और आम उपभोक्ताओं के हितों की बलि नहीं दी जा सकती। बिजली कर्मचारी और अभियंता निजीकरण के खिलाफ देश के किसानों और मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करेंगे।”

उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ संघर्ष अब केवल बिजली कर्मचारियों का आंदोलन नहीं रहा है, बल्कि किसान, मजदूर, कर्मचारी, शिक्षक और आम उपभोक्ता भी इसके साथ मजबूती से खड़े हैं।

आज के विरोध प्रदर्शन में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन एवं विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के संयोजक शैलेन्द्र दुबे, जितेंद्र सिंह गुर्जर, महेंद्र राय, पी.के. दीक्षित, सुहेल आबिद, सरजू त्रिवेदी, के.एस. रावत सहित बड़ी संख्या में बिजली कर्मचारी एवं अभियंता प्रमुख रूप से शामिल रहे।

 

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