लखनऊ में डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों का भव्य लोकार्पण

लखनऊ :  हिन्दी दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब, कैसरबाग में 24 ग्रंथों के रचनाकार एवं चिंतक डॉ. विद्यासागर उपाध्याय की दो बहुचर्चित कृतियों—‘संक्रान्ति का संहार’ एवं ‘काल यात्रा : वेद से बर्लिन तक’—का भव्य लोकार्पण हुआ।
मुख्य अतिथि पेशवा बाजीराव के वंशज श्रीमंत राजराजेश्वर प्रभाकर नारायणराव पेशवा ने कहा कि डॉ. उपाध्याय ने अपनी लेखनी के माध्यम से पेशवा परंपरा और उनके पूर्वजों के गौरवशाली इतिहास को साहित्य के केंद्र में लाकर जनस्मृति में पुनर्जीवित किया है। मुख्य वक्ता डॉ. रिंकी ‘मणिकर्णिका’ ने पुस्तक के पीछे के वर्षों के शोध व प्रामाणिकता को रेखांकित किया। वहीं, कथाकार महेन्द्र भीष्म ने इसे आचार्य चतुरसेन शास्त्री की ऐतिहासिक उपन्यास परंपरा को आगे बढ़ाने वाला गंभीर प्रयास बताया।
बीज वक्ता डॉ. जयप्रकाश तिवारी ने 'संक्रांति का संहार' को पानीपत के युद्ध का सांस्कृतिक पुनर्मूल्यांकन और राष्ट्रधर्म का संदेश देने वाला ग्रंथ कहा। पूर्व मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल मिश्र ने ‘काल यात्रा’ को भारतीय ज्ञान-परंपरा व आधुनिक विश्व के बीच का सेतु बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. निर्भय नारायण गुप्त ने की, संचालन डॉ. ममता पंकज ने किया तथा श्रीमती सीमा मधुरिमा ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में डॉ. नरेंद्र भूषण, राजेश सिंह 'श्रेयश', डॉ. इंद्रजीत तिवारी निर्भीक, डॉ. ओमप्रकाश द्विवेदी, डॉ. राजीव वत्सल, करुणानिधि तिवारी, डॉ. विजय प्रताप आर्य, डॉ. आर वी एन पाण्डेय, डॉ. अनिल कुमार तिवारी, आनंद सिंह, राहुल पाण्डेय, शिव नाथ सिंह, वेद प्रकाश द्विवेदी, राम लखन वर्मा, वीरेंद्र प्रताप यादव, जितेंद्र शर्मा, राजेश यादव, रामसुतार सिंह और रोनित पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

रिपोर्टर : चौधरी मुकेश सिंह

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