फर्जी पुलिस बनकर अपहरण, 13 लाख की फिरौती और जेवर वसूलने वाले गिरोह का पर्दाफाश
BY-UMESH VISHWAKARMA
लखनऊ। कृष्णानगर पुलिस और सर्विलांस टीम दक्षिणी ने फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर लोगों का अपहरण करने और फिरौती वसूलने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। संयुक्त कार्रवाई में पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से दो अवैध तमंचे, तीन जिंदा कारतूस, 2.50 लाख रुपये नकद, चार कूटरचित पुलिस अधिकारी आईडी कार्ड, दो कूटरचित नंबर प्लेट और वारदात में प्रयुक्त स्कॉर्पियो बरामद की गई है।
ऑफिस के पास से किया था अपहरण
मामला 12 सितंबर का है। पुलिस के मुताबिक आलमबाग के राजेंद्रनगर निवासी सुदर्शन घोष अपने कार्यालय जा रहे थे। इसी दौरान आरोपियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए उन्हें रोक लिया और पूछताछ के बहाने जबरन स्कॉर्पियो में बैठा लिया। फर्जी पुलिस आईडी दिखाकर विश्वास में लेने के बाद आरोपियों ने उन्हें असलहे के बल पर डराया-धमकाया और मारपीट की। पीड़ित के मुताबिक आरोपियों ने उनकी पत्नी को फोन कर फिरौती की मांग की और रकम नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। मामले में 13 सितंबर को कृष्णानगर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया।
रेकी के बाद वारदात को दिया अंजाम
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्यों ने पूछताछ में बताया कि वे आर्थिक रूप से संपन्न लोगों को निशाना बनाते थे। पहले उनकी रेकी की जाती थी और आने-जाने की गतिविधियों की जानकारी जुटाने के बाद वारदात की जाती थी। लखनऊ की घटना में पीड़ित के एक करीबी के माध्यम से उसकी गतिविधियों और आर्थिक स्थिति की जानकारी गिरोह तक पहुंचने की बात सामने आई है।
अपहरण कर्ताओं ने वसूले 13 लाख नकद और जेवर
आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पीड़ित को बंधक बनाने के बाद उससे पत्नी को फोन कराया गया। इसके बाद फिरौती की रकम की मांग की गई। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ में 13 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के जेवर मिलने की बात स्वीकार की है। रकम और जेवर मिलने के बाद पीड़ित को शहीद पथ के पास छोड़ दिया गया था।
रकम बांटकर अलग-अलग राज्यों में भागे
पुलिस के मुताबिक वारदात के बाद आरोपी अलग-अलग राज्यों में चले गए थे। फिरौती की रकम को आपस में बांटने और कुछ पैसा ऐशो-आराम में खर्च करने की बात भी पूछताछ में सामने आई है।
अगली वारदात की फिराक में लौटे थे लखनऊ
पुलिस के अनुसार आरोपी दोबारा लखनऊ आए थे और अगली वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे। इसी दौरान पुलिस और सर्विलांस टीम ने उन्हें दबोच लिया। आरोपियों तक पहुंचने में 220 से 240 सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, मैनुअल इनपुट और स्थानीय सूचना तंत्र की मदद ली गई।
फर्जी नंबर प्लेट से पुलिस को चकमा
गिरोह वारदात में इस्तेमाल वाहनों पर कूटरचित नंबर प्लेट लगाता था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो कूटरचित नंबर प्लेट भी बरामद की हैं। इससे आरोपियों द्वारा पहचान छिपाने और पुलिस की निगरानी से बचने की कोशिश का पता चलता है।
बुलंदशहर और बिहार के रहने वाले हैं आरोपी
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनुराग पुत्र धर्मेंद्र सिंह, अनुराग कुमार पुत्र स्व. प्रमोद कुमार, लवी कुमार, दीपांशु कुमार, आकाश चौधरी और मनीष कुमार के रूप में हुई है। इनमें अधिकांश आरोपी बुलंदशहर के शिकारपुर क्षेत्र के रहने वाले हैं, जबकि दो आरोपी बिहार से बताए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक आरोपी आकाश चौधरी के खिलाफ शिकारपुर, बुलंदशहर में पूर्व के कई मुकदमे दर्ज हैं। इनमें मारपीट, बलवा, धमकी और आर्म्स एक्ट से संबंधित मामले शामिल हैं। वहीं अनुराग पुत्र धर्मेंद्र के खिलाफ गाजियाबाद के विजय नगर थाने में भी मुकदमा दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
चार फर्जी पुलिस आईडी ने खोली गिरोह की करतूत
गिरफ्तार आरोपियों के पास से चार कूटरचित पुलिस अधिकारी आईडी कार्ड बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार इन्हीं फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर आरोपियों ने पीड़ित को पुलिस अधिकारी होने का विश्वास दिलाया और उसे अपने साथ ले गए।
आठ टीमों ने शुरू की थी तलाश
घटना के खुलासे के लिए डीसीपी दक्षिणी ने आठ पुलिस टीमों का गठन किया था। सर्विलांस सेल जोन दक्षिणी को भी जांच में लगाया गया। लगातार सीसीटीवी फुटेज खंगालने और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
25 हजार के इनाम से पुलिस टीम सम्मानित
घटना का सफल अनावरण करने वाली कृष्णानगर पुलिस और सर्विलांस टीम को डीसीपी दक्षिणी की ओर से 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में कार्रवाई कर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है। गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
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