अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर जागरूकता रैली एवं मूक अभिनय कार्यक्रम आयोजित

लखनऊ :  डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ के विशेष शिक्षा संकाय के श्रवण बाधितार्थ विभाग द्वारा 21 से 27 सितंबर तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय बधिर सप्ताह के अंतर्गत तृतीय दिवस 23 सितम्बर को बधिर विद्यर्थियो द्वारा अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के अवसर पर जागरूकता रैली एवं विभिन्न जागरूकता-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्रशासनिक भवन कॉन्फ्रेंस हॉल, प्रथम तल, प्रशासनिक भवन (Admin Block) में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम जन मानस में  सांकेतिक भाषा के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा बधिर समुदाय के प्रति सम्मान, समानता, संवेदनशीलता और समावेशी दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना रहा। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में प्रातःकाल जागरूकता रैली विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन से निकालकर क्षेत्रीय पुनर्वास केंद्र होते हुए बुद्धेश्वर चौराहा से वापस विश्वविद्यालय के अकादमिक ब्लाक A 2 में समाप्त हुई I रैली के दौरान बुद्धेश्वर से विश्वविद्यालय के बिच में आने जाने वाले आम नागरिकों एवं विभिन्न दुकानदारों को सांकेतिक भासः के महत्त्व तथा किसा वस्तु का संकेत क्या है इसा बारे मे भी लोगों को जागरुक किया गया । रैली को रावण करने में विश्वविद्यालय के विशेष शिक्षा संकाय के संकायाध्यक्ष डॉ.  कौशल शर्मा, श्रवण बाधितार्थ विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.  मृत्युंजय मिश्र, डॉ.  सीता राम पाल, डॉ.  कौशलेन्द्र कुमार श्रवण बाधितार्थ बिभाग  दृष्टि बाधितार्थ विभाग कि विभागाध्यक्ष डॉ.  आद्य शक्ति राय, डॉ.  सुधा राव तथा डॉ.  विजय वर्मा के आलावा विश्वविद्यालय के समस्त इंटरप्रेटर एवं बधिर एवं गैर बधिर विद्यार्थी उपस्थित रहे I 

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में कार्यक्रम के संचालन  डॉ. सीताराम पाल, सहायक आचार्य, श्रवण बाधितार्थ विभाग द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. वी. के. सिंह, अधिष्ठाता शैक्षणिक; डॉ. विजय वर्मा, समाजशास्त्र विभाग; डॉ. आद्या शक्ति राय, विभागाध्यक्ष, दृष्टिबाधितार्थ विभाग; डॉ. विजय शंकर शर्मा, सह आचार्य; डॉ. दिनेश कुमार, दृष्टिबाधितार्थ विभाग,  डॉ. कौशलेन्द्र कुमार सहित अन्य अतिथिगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. मृत्युंजय मिश्र, विभागाध्यक्ष, श्रवण बाधितार्थ विभाग के उद्बोधन से हुआ। उन्होंने बधिर समुदाय को अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए सांकेतिक भाषा के महत्व तथा बधिर व्यक्तियों के अधिकारों और गरिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज में बधिर व्यक्तियों के प्रति सकारात्मक एवं सम्मानजनक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके पश्चात बधिर विद्यार्थियों द्वारा मूक अभिनय की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति के माध्यम से बधिर समुदाय के जीवन, उनकी भावनाओं, सामाजिक सहभागिता तथा समान अवसर की आवश्यकता को अभिव्यक्त किया गया। मूक अभिनय का मुख्य संदेश “बधिर समुदाय का सम्मान, समान अवसर और सामाजिक समावेशन” रहा। इस मूक अभिनय करने वाले विद्यार्थियों में अयान, रोशन , शाहनवाज़, वीर, पीतम, अरिहंत, अब्दुल्ला एवं नोमर थे I 
कार्यक्रम की इसी कड़ी में विश्व विद्यालय के बधिर विद्यार्थियो जिनमें  मुख्य रूप से भोले नाथ , आशीष सिंह , नीरज गुप्ता तथा पी डी सी डी बधिर  शिक्षक  अशोक कुमार साहनी ने भी अपने – अपने अनुभवों को साझा किया I कार्यक्रम कि इसी कड़ी में विद्यार्थियों जिनमे मुख्य रूप से अभिनव वर्मा, सर्वेश कुमार, राज, आकाश शर्मा, सत्यम, कृष्णदेव, सौरभ राय तथा आर्यन जयसवाल द्वारा शोशल मिडिया के दुरुपयोग की प्रस्तुति की गईI
अतिथियों के संबोधन की कड़ी में डॉ. विजय वर्मा, समाजशास्त्र विभाग ने समावेशन एवं समानता की चर्च करते हुए कहा कि श्रवण बाधित बच्चे सामान्य बच्चो की तुलना में सामान्य प्रतिभाशाली हैं इन्हें शिर्फ़ प्रोत्साहन एवं सहयोग प्रदान करने पर जोर दिया तथा सभी विद्यार्थी एवं शिक्षको को सांकेतिक भाषा सीखने हेतु प्रेरित किया I इसी क्रम में सहायक कुलसचिव डॉ. बिंदु त्रिपाठी जी ने अपने उद्बोधन में सभी शिक्षक एवं कर्मचारियों से आग्रह किया कि सभी लोग मेंटर के रूप में बधिर विद्यार्थियो को अडॉप्ट कर सांकेतिक भाषा सीख सकते है I डॉ. आद्या शक्ति राय, विभागाध्यक्ष ने सांकेतिक भाषा समस्या नहीं बल्कि समझने की समस्या है और इन्होने कार्यक्रम की सराहना की I डॉ. विजय शंकर शर्मा, सह आचार्य ने विद्यार्थियों को अपना अनुभव बताया कि सांकेतिक भाषा का प्रयोग सभी सामान्य बच्चो को आरंभिक अवस्था से करने की बात कही I इसी क्रम में डॉ. दिनेश कुमार के द्वारा बधिर बच्चो को ऐसे कार्यक्रम करने की सराहना की एवं स्वाध्याय करने को प्रेरित किया I कार्यक्रम के मुख्या अतिथि एवं अध्यक्ष प्रो. वी. के. सिंह, अधिष्ठाता शैक्षणिक विश्वविद्यालय ने अपने अध्यक्षीय उद्द्बोधन में विद्यार्थियों के कार्यो की प्रसंशा करते हुए कहा कि सांकेतिक भाषा अन्य भाषा कि तरह अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसे सभी शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को सीखने की नितांत आवश्यकता है और इसे सीखने के लिए जों भी बाधाएं प्रशानिक स्तर पर आती है उन्हें दूर करने का भरपूर प्रयास किया जायेगा I  इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त इंटरप्रेटर जिनमे त्रिलोक कुमार, विपिन कुमार शर्मा, बन्दना , अजीत , अभिषेक , निशांत, पायल, चांदनी, शिवा, रिया, नेहा राजपूत, प्रियंका, पूजा, आदर्श, प्रिया, नेहा मेहरोत्रा, अंकित, सबाना , रेशमा, शना, कमलेश तथा शेर अफगान खान, डब्लू कुमार , अशोक कुमार साहनी, एवं अमरज्योति कौर के अलावा अन्य वालेंटियर ने भी अपना सहयोग प्रदान किये I  कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया I कार्यक्रम का कुशल सञ्चालन . सीताराम पाल, सहायक आचार्य, श्रवण बाधितार्थ विभाग एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कौशलेन्द्र कुमार द्वारा किया गयाI

रिपोर्टर : अर्पित कुमार 

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