नवरात्र का तात्पर्य जीवन के नवप्रभात का उदय है : सपना गोयल

लखनऊ : सनातन ध्वज वाहिका सपना गोयल की अगुआई में नवरात्र के पावन अवसर पर नवमी के दिन सोमवार 19 अक्टूबर को नवरात्र का विशेष सत्संग एवं वृहद कन्या पूजन का अनुष्ठान किया गया। यह अनुष्ठान दो चरणों में सम्पन्न हुआ। पहले चरण में देवा रोड स्थित प्रतिष्ठा श्री परमानंद हरि हर मंदिर में दोपहर में हवन-पूजन-कीर्तन किया गया। इस अनुष्ठान का समापन भव्य और दिव्य भंडारे से हुआ। दूसरे चरण में चिनहट वी-मार्ट के पास स्थित रजत डिग्री कॉलेज के सामने स्थित पावन सनातन धाम लॉन में सत्संग और कन्यापूजन का भव्य अनुष्ठान हुआ। इस अवसर पर 501 से अधिक कन्याओं का पूजन किया गया। बच्चियों में आध्यात्मिक जागृति के लिए उन्हें पुस्तकें, वस्त्र, स्टेशनी आदि की भेंट दी गईं।

सनातन ध्वजवाहिका सपना गोयल ने बताया कि नवरात्र के अवसर पर अपने कल्याणकारी संदेश में यह आध्यात्मिक सत्य का उद्घाटन किया है कि नवरात्र महज व्रत, फलाहार, कीर्तन और डांडिया नहीं है। यह वह नौ दिन हैं जब आप अपनी दैनिक जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हुए आंतरिक चेतना को जागृत करते हैं किन्तु अमूमन लोग नवरात्र में अपने दैनिक कर्तव्यों से विमुख हो जाते हैं पर यह उनके लिए सबसे बड़ा पाप बन जाता है इसीलिए नवरात्र में ऐसे व्यक्ति को यथेष्ठ फल की प्राप्ति नहीं हो पाती है। कर्तव्यों का पालन ही तो हमारा धर्म है। आंख का धर्म देखना है जबकि नाक का श्वास लेना इसलिए सच्चा सनातनी वह है जो अपने दैनिक कार्यों के धर्म का पालन करता है। मां भी उनसे प्रेम करती हैं जो अपने धर्म का पालन करता है। ऐसे में हमें अपने समस्त दैनिक कार्यों को सहर्ष करते हुए नवरात्र की आराधना करनी चाहिए। आदिशक्ति मां के आशीर्वाद से जीवन में चाहे जितना बड़ा संकट आ जाए वह सूखे पत्तों की तरह सहजता से झड़ जाता हैं। वास्तव में नवरात्र का तात्पर्य जीवन का नवप्रभात है। नवरात्र में रात्रि 12:30 के बाद दिन पलटता है जिससे परिस्थितयां बदलनी शुरू हो जाती है। दैनिक चक्र उस समय नए क्रम में प्रवेश करता है। उस दौरान किया हुआ तप, पूजन और अराधना, व्यक्ति के जीवन के समस्त कष्टों को दूर करती हुई मनवांच्छित फलों की प्राप्ति करवाती है। मां दुर्गा हिंदू धर्म में सर्वोच्च शक्ति, ब्रह्मांड की माता और आदि पराशक्ति का स्वरूप हैं। उन्हें सृष्टि, स्थिति और संहार की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। 'दुर्गा' शब्द का अर्थ है जिसे भेदना या जीतना असंभव हो। वे बुराई, असुरों और अन्याय का नाश करने वाली और अपने भक्तों की रक्षा करने वाली दिव्य ऊर्जा हैं। ऋग्वेद के देवी सूक्त और श्रीदुर्गासप्तशती के अनुसार, वे केवल एक देवी नहीं हैं, बल्कि पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त चेतना और दिव्य शक्ति का साक्षात रूप हैं। जो सच्चे मन से नवरात्र में साधना करता है उसके जीवन में नव प्रभात हो जाता है। शक्ति ने ही प्रभु राम को सीता से मिलाया और भगवान श्याम को राधा से मिलाया। वास्तव में मां, जगत जननी और भाग्य विधाता है इसलिए मां की आराधना गंगाजल की तरह अपने को पावन करके, करनी चाहिए। यह परम आवश्यक है कि मनुष्य वाह्य दिखावे को त्याग कर तप मार्ग का अनुसरण करे। नवरात्र के पावन अवसर पर अपने अंदर परिवर्तन लाए। सात्विकता को अपनाएं आचरण को शुद्ध करें तभी उसे, परमानंद की प्राप्ति होगी और परम शान्ति मिलेगी। बार-बार यहां-वहां भटकने से अच्छा है कि एक बार दृढ़ निश्चय कर मन को स्थिर करके अपने अंदर निखार लाए। एक बार व्यक्ति के अंदर का अमृत जागृत हो जाएगा तो अपने आप ही उसकी परिस्थितियां भी उसके अनुकूल हो जाएंगी और नवरात्र, वास्तिवक अर्थों में नव प्रभात ला देगा।
इस वृहद आध्यात्मिक सत्संग के उपरांत 501 कन्याओं का पूजन करके उन्हें स्कूल बैग भेंट किये गये। उस बैग में कन्याओं के श्रंगार का सामान जैसे कंगन, माला, वस्त्र, चुनरी के साथ टिफिन बॉक्स, वाटर बॉटल, एक गेम लूडो या बैडमिंटन का रैकेट आदि को शामिल किया गया था। उनकी आध्यात्मिक उन्नति के लिए देवी स्वरूपा कन्याओं को पूजन की सामग्री सहित हनुमान चालीसा की पुस्तिका भी भेंट की गईं। इस अनुष्ठान में पीली सनातनी साड़ी पहने सैकड़ों मातृशक्तियां ने जगत जननी आदि शक्ति मां के जयकारे भी लगाए।
परम पिता परमात्मा की असीम अनुकम्पा से सपना गोयल के द्वारा उत्तर प्रदेश ही नहीं वरन राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक रूप से “सुंदरकांड महा अभियान, भारत वर्ष की बने पहचान” का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में सुंदरकांड महा अभियान उत्तर प्रदेश के 42 जिलों और देश के 10 राज्यों तक पहुंच चुका है। उनका एक मात्र लक्ष्य है कि संतों और ऋषियों की पावन भूमि, “भारत” एक बार पुन: “विश्व गुरु” के रूप में प्रतिष्ठित हो। इस महा अभियान के अंतर्गत उत्तराखंड कोटद्वार के प्राचीन सिद्धबली मंदिर, काशी विश्वनाथ मंदिर, हर की पौड़ी हरिद्वार, रुड़की महादेव मंदिर, चित्रकूट के पावन तीर्थ परिसर रामघाट, प्रयागराज के लेटे हुए हनुमान मंदिर, अयोध्या तीर्थ के प्रभु राम मंदिर एवं मथुरा तीर्थ के भगवान कृष्ण मंदिर एवं कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर के गंगाजी घाट परिसर में भी भव्य सुंदरकाण्ड का पाठ सफलतापूर्वक आयोजित किया जा चुका है। इस क्रम में 18 नवम्बर से त्रिदिवसीय ऋषिकेष तीर्थयात्रा भी आरंभ होगी वहीं 20 दिसम्बर को लखनऊ में 11 हजार महिलाएं सपना गोयल की अगुआई में एक साथ सुंदरकांड का पाठ करेंगी।

संवाददाता : चौधरी मुकेश सिंह 

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