राजधानी लखनऊ: “OBC की गिनती भी नहीं, तो OBC का वोट क्यों?”
लखनऊ : राजधानी लखनऊ स्थित यूपी प्रेस क्लब में बुधवार को ओबीसी महासभा ने जातिगत जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की स्पष्ट गणना, सरकारी एवं निजी क्षेत्र की भर्तियों में आरक्षण के प्रभावी अनुपालन तथा अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में सहायक अध्यापक और प्रधानाचार्य पदों पर आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठाई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में महासभा ने सवाल किया कि जब अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी की स्पष्ट गणना और उसके प्रतिनिधित्व की स्थिति ही सामने नहीं होगी, तो सामाजिक न्याय और समान अवसर का उद्देश्य कैसे पूरा होगा?
जातिगत जनगणना में OBC की स्पष्ट गणना की मांग
ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जातिगत जनगणना के प्रपत्र में प्रश्न संख्या 10 के अंतर्गत सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग (SEBC) की स्पष्ट पहचान और राज्यवार सूची को शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए। इससे अन्य पिछड़े वर्गों की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का विश्वसनीय आकलन करने में मदद मिलेगी।
महासभा का कहना है कि पिछड़े वर्गों की आबादी और उनकी सामाजिक स्थिति से जुड़े प्रमाणिक आंकड़ों के अभाव में योजनाओं का निर्माण, संसाधनों का वितरण और विभिन्न क्षेत्रों में उनकी भागीदारी का आकलन करना कठिन हो जाता है। संगठन ने जातिगत जनगणना में OBC की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
सहायता प्राप्त विद्यालयों में आरक्षण व्यवस्था पर सवाल
महासभा के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष मिथलेश शर्मा ने अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में सहायक अध्यापक (स्नातक वेतनक्रम) के विषयवार आरक्षित पदों से संबंधित उपलब्ध सारणी का हवाला देते हुए आरक्षण की स्थिति की विस्तृत समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि बालक एवं बालिका विद्यालयों में पदों का विषयवार, विद्यालयवार और श्रेणीवार विवरण सार्वजनिक होना चाहिए, जिससे आरक्षण के वास्तविक अनुपालन की स्थिति स्पष्ट हो सके।
प्रस्तुत सारणी के अनुसार, संयुक्त श्रेणी में कुल 17,735 पद दर्शाए गए हैं। इनमें सामान्य वर्ग के 6,704, अनुसूचित जाति के 3,698, अनुसूचित जनजाति के 13, अन्य पिछड़ा वर्ग के 4,438 और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के 2,882 पद शामिल बताए गए हैं।
महासभा ने स्पष्ट किया कि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और लागू आरक्षण नियमों के परीक्षण के बाद ही वास्तविक स्थिति का निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए। संगठन ने भर्ती प्रक्रिया, विषयवार रिक्तियों, नियुक्तियों और विभिन्न वर्गों के वास्तविक प्रतिनिधित्व का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
प्रधानाचार्य पदों पर आरक्षण की स्थिति स्पष्ट करने की मांग
ओबीसी महासभा की महिला अध्यक्ष शशि पटेल ने अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रधानाचार्य पदों पर आरक्षण की व्यवस्था और उसके अनुपालन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में नेतृत्वकारी पदों पर विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधित्व की स्थिति भी पारदर्शी होनी चाहिए।
महासभा ने प्रदेश सरकार से मांग की कि प्रधानाचार्य पदों पर लागू कानूनी प्रावधानों, संबंधित सेवा नियमों और न्यायिक निर्णयों के आधार पर आधिकारिक स्थिति सार्वजनिक की जाए। संगठन का कहना है कि जहां आरक्षण लागू है, वहां उसका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यदि नियमों या प्रतिनिधित्व से संबंधित कोई विसंगति सामने आती है, तो उसका विधिसम्मत समाधान किया जाए।
सरकारी और निजी भर्तियों में पारदर्शिता पर जोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस में महासभा ने सरकारी एवं निजी क्षेत्र की भर्तियों में आरक्षण संबंधी लागू प्रावधानों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी उठाई। संगठन ने कहा कि सामाजिक न्याय केवल नीतियों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पात्र वर्गों को शिक्षा, रोजगार और संस्थागत नेतृत्व में अवसर मिलने चाहिए।
महासभा ने सरकार से भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, आरक्षित पदों का स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराने और विभिन्न वर्गों की भागीदारी का नियमित आकलन करने की मांग की।
ओबीसी महासभा की प्रमुख मांगें
1. जातिगत जनगणना में OBC/SEBC की स्पष्ट और प्रमाणिक गणना सुनिश्चित करने की मांग पर विचार किया जाए।
2. जनगणना के प्रपत्र में राज्यवार पिछड़ा वर्ग सूची को शामिल करने के प्रस्ताव की समीक्षा की जाए।
3. सरकारी एवं निजी क्षेत्र की भर्तियों में लागू आरक्षण प्रावधानों और उनके अनुपालन की स्थिति स्पष्ट की जाए।
4. अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में सहायक अध्यापक पदों पर विषयवार आरक्षण और वास्तविक नियुक्तियों का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
5. विद्यालयों में प्रधानाचार्य पदों पर लागू आरक्षण संबंधी कानूनी व्यवस्था, न्यायिक स्थिति और प्रतिनिधित्व पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाए।
6. पिछड़े वर्गों को शिक्षा, रोजगार और संस्थागत नेतृत्व में समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
सामाजिक न्याय और समान भागीदारी का मुद्दा उठा
ओबीसी महासभा ने कहा कि सामाजिक न्याय का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब पिछड़े वर्गों की जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार और नेतृत्वकारी पदों में भागीदारी से जुड़े सवालों पर स्पष्ट नीति और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को प्रभावित अभ्यर्थियों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी संबोधित किया। उन्होंने आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता, पात्र अभ्यर्थियों को अवसर और पिछड़े वर्गों के वास्तविक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
मुख्य संदेश: ओबीसी महासभा ने जातिगत जनगणना में स्पष्ट गणना से लेकर अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में आरक्षण के अनुपालन तक, विभिन्न मुद्दों पर सरकार से आधिकारिक स्पष्टीकरण और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
रिपोर्टर : चौधरी मुकेश सिंह

No Previous Comments found.