सीएम योगी का बड़ा एक्शन! अब यूपी में बेसमेंट में कोचिंग पूरी तरह बैन
लखनऊ का वो रिहायशी इलाका, जहाँ पढ़ाई के नाम पर मौत का शोरूम चल रहा था, वहाँ लगी एक आग ने पूरे सूबे की सियासत और प्रशासन में वो भूचाल ला दिया है जिसकी गूंज सीधे मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच गई है! अलीगंज के एक कोचिंग सेंटर में भड़की उस काल-रूपी आग ने 15 मासूम युवाओं की जिंदगी को हमेशा-हमेशा के लिए लील लिया! 15 घरों के चिराग बुझ गए, और वजह क्या थी? सिर्फ और सिर्फ चंद पैसों की हवस, नियमों को ठेंगे पर रखना और अधिकारियों की अंधाधुंध लापरवाही! लेकिन अब...मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक्शन मोड अब ऑन हो चुका है! सीएम योगी ने साफ कह दिया है कि मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले जितने भी सफेदपोश और भ्रष्ट अधिकारी हैं, उन्हें पाताल से भी ढूंढकर निकाला जाएगा। लखनऊ की इस त्रासदी को पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक बड़ा सबक बताते हुए मुख्यमंत्री ने ऐसा फरमान जारी कर दिया है, जिसने अवैध कोचिंग संचालकों और बेसमेंट के व्यापारियों की रातों की नींद उड़ा दी है! जी हां अब यूपी में नो कंप्रोमाइज की पॉलिसी चलेगी। आइए आपको बताते हैं इस मामले की पूरी जानकारी!
सोमवार की उस मनहूस दोपहर को अलीगंज इलाके की उस तीन मंजिला इमारत में जब आग लगी, तो वो कोई साधारण हादसा नहीं था, बल्कि वो सीधे-सीधे एक डेथ ट्रैप यानी मौत का कुआँ साबित हुई। जांच में जो सच सामने आया है, उसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। उस पूरी बिल्डिंग में आने और जाने के लिए सिर्फ और सिर्फ एक ही रास्ता था! और हद तो देखिए, उस इकलौते रास्ते को भी एयर-कंडीशनिंग पैनल्स, उलझे हुए बिजली के तारों और कबाड़ जैसे उपकरणों से पाट दिया गया था। जब आग भड़की, तो बच्चों के पास भागने की जगह ही नहीं बची। पूरी बिल्डिंग में धुआं बाहर निकलने का कोई वेंटिलेशन नहीं था। आग लगने के बाद कमरों में ऐसा दमघोंटू काला धुआं भरा कि ज्यादातर मासूमों की मौत जलने से नहीं, बल्कि दम घुटने से हो गई! हालात इतने बदतर थे कि फायर ब्रिगेड और NDRF की टीमों को दीवारें काटकर अंदर घुसना पड़ा और बच्चों को बाहर निकालना पड़ा। आपको बता दें इस भीषण आग को बुझाने में 4 लाख लीटर पानी बहाना पड़ा, 20 फायर टेंडर्स और एक विशाल हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म ने दिन-रात एक करके 70 से 80 चक्कर लगाए, तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका। अब फायर विभाग ने साफ कर दिया है कि इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का जितना भी लाखों का खर्च आया है, वो पाई-पाई उस अवैध कॉम्प्लेक्स के मालिक की जेब से वसूली जाएगी! वहीं इस दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आला अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल बैठक की और सीधे शब्दों में ऑर्डर पास कर दिया। सीएम योगी ने साफ कह दिया कि अब से उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले में, किसी भी इमारत के बेसमेंट में कोई भी कोचिंग सेंटर नहीं चलाया जा सकेगा। बेसमेंट में क्लास लगाने पर पूरी तरह ताला लगेगा। बेसमेंट में सिर्फ कोचिंग ही नहीं, बल्कि किसी भी तरह की दुकान, ऑफिस या व्यापारिक गतिविधि की इजाजत नहीं होगी। अगर किसी बिल्डिंग का बेसमेंट पार्किंग के लिए पास हुआ है, तो वहां सिर्फ गाड़ियां ही खड़ी होंगी, नोट छापने की मशीनें नहीं चलेंगी!
दरअसल, लखनऊ की वो बिल्डिंग नक्शे में आवासीय पास कराई गई थी, लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाकर उसे कमर्शियल हब बना दिया गया। सीएम योगी ने कड़क लहजे में कहा कि जमीन और भवन का इस्तेमाल सिर्फ उसी काम के लिए होगा जिसकी मंजूरी मिली है। रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रहे ऐसे धंधों को बख्शा नहीं जाएगा। सीएम ने अधिकारियों को यह भी हिदायत दी कि यह अभियान जनता की भलाई के लिए है, इसलिए कार्रवाई के नाम पर किसी भी निर्दोष को अनावश्यक परेशान या प्रताड़ित न किया जाए। लेकिन सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं होगा। वहीं योगी सरकार का आदेश मिलते ही पूरे उत्तर प्रदेश में प्रशासन, विकास प्राधिकरण और फायर विभाग की संयुक्त टीमों ने मिशन मोड में फायर सेफ्टी ऑडिट शुरू कर दिया है।
लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, आगरा, गाजियाबाद...ऐसा कोई शहर नहीं बचा जहां हड़कंप न मचा हो। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के वीसी नंद किशोर कलाल के निर्देश पर 8 जोन की टीमों ने धावा बोल दिया। जांच में 206 ऐसी इमारतें मिलीं जहां फायर सेफ्टी के इंतजाम पूरी तरह फेल थे या उनके पास NOC ही नहीं थी! जहां प्राधिकरण ने तुरंत एक्शन लेते हुए 62 इमारतों को सील कर दिया है। इंदिरापुरम के गौर ग्रीन एवेन्यू में हुए हादसे के बाद सोसायटियों, होटलों और बैंक्वेट हॉलों की भी बारीकी से जांच हो रही है। आपको बता दें लखनऊ में ही CFO राहुल पाल की अगुवाई में 81 कोचिंग सेंटरों पर छापा मारा गया, जिसमें से 35 सेंटर नियमों के खिलाफ चलते मिले। उन्हें 15 दिन का अल्टीमेटम देकर नोटिस थमा दिया गया है। इतना ही नहीं इस हादसे के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय ने भी अपने पूरे परिसर, हॉस्टल्स, लैब्स और लाइब्रेरी का व्यापक फायर ऑडिट कराने का फैसला किया है। उच्च शिक्षा विभाग की विशेष सचिव निधि श्रीवास्तव ने सभी कप्तानों और जिलाधिकारियों को सर्वे के आदेश दिए हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे प्रदेश में सिर्फ 3152 कोचिंग संस्थान ही रजिस्टर्ड हैं, जबकि बिना रजिस्ट्रेशन के अवैध रूप से हजारों कोचिंग सेंटर गलियों और छोटे-छोटे कमरों में बच्चों को ठूस-ठूस कर पढ़ा रहे हैं।
आपको बता दें हादसे की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, भ्रष्ट तंत्र की परतें खुल रही हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण की जांच में 18 अधिकारी और इंजीनियर दोषी पाए गए हैं, जिनमें 5 जोनल अधिकारी भी शामिल हैं! एलडीए उपाध्यक्ष ने इन सभी दोषियों की रिपोर्ट शासन को कार्रवाई के लिए भेज दी है। इससे पहले एक जूनियर इंजीनियर और एक असिस्टेंट इंजीनियर को सस्पेंड किया जा चुका है। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि साल 2016 में इस अवैध बिल्डिंग को गिराने का आदेश जारी हुआ था, लेकिन तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव ने उस आदेश को ही निरस्त कर दिया था! अब एलडीए ने इस खूनी बिल्डिंग पर बकायदा नोटिस चस्पा कर दिया है। मालिकों को 15 दिन की मोहलत दी गई है कि वो अपना पक्ष रखें। अगर जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो इस मौत की इमारत को बुलडोजर से जमींदोज कर दिया जाएगा! वहीं इस अग्निकांड के बाद सस्पेंशन की कार्रवाई को लेकर विभागों के अंदर भी जबरदस्त घमासान छिड़ गया है।
आग लगने के बाद बिजली विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर गौरव कुमार को सस्पेंड किया गया था। अब विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति खुलकर मैदान में आ गई है। समिति ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि इंजीनियर गौरव कुमार को जानबूझकर बलि का बकरा बनाया जा रहा है। समिति का तर्क है कि बिल्डिंग में 2016 से एक वैध कमर्शियल कनेक्शन था और लोड बढ़ाने की जानकारी रियल-टाइम में इंजीनियर को नहीं मिलती। अंदरूनी वायरिंग दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी बिल्डिंग मालिक की थी, इसलिए सस्पेंशन तुरंत वापस लेकर किसी टेक्निकल एक्सपर्ट से निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसी तरह सस्पेंड हुए इंदिरा नगर के फायर सब स्टेशन ऑफिसर कमलेंद्र कुमार सिंह ने भी सीएम योगी को चिट्ठी लिखकर सारा ठीकरा अपने सीनियर यानी CFO पर फोड़ दिया। उन्होंने लिखा कि भवनों को फायर क्लीयरेंस देने का अधिकार उनके पास नहीं, बल्कि चीफ फायर ऑफिसर के पास होता है, इसलिए कार्रवाई CFO पर होनी चाहिए। हालांकि, बाद में वो अपने इस बयान से मुकर गए और कहा कि उनसे यह सब जबरन लिखवाया गया था।
वहीं दूसरी तरफ इस खौफनाक मंजर के बीच एक राहत की खबर KGMU अस्पताल से आई है। हादसे में घायल हुए 7 लोगों में से 5 को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। वहीं, सोशल मीडिया पर जिस लड़के का बिल्डिंग से जान बचाने के लिए कूदने का वीडियो वायरल हुआ था, वो चमत्कारिक रूप से बच गया है। दरअसल, बिल्डिंग से कूदते वक्त वो एक लोहे की रॉड पर गिर गया था, जिससे उसकी रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी और पैरों में सुन्नपन आ गया था। KGMU के प्रवक्ता केके सिंह ने बताया कि लड़का अब ICU में खतरे से बाहर है और डॉक्टरों ने साफ किया है कि उसे किसी सर्जरी की जरूरत नहीं है, दवाओं से उसका इलाज चल रहा है।
तो ये थी उत्तर प्रदेश की बदहाल व्यवस्था और उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हंटर की पूरी कहानी! 15 नौजवानों की मौत ने यह साबित कर दिया है कि जब चंद पैसों की लालच में सरकारी बाबू और अवैध कारोबारी हाथ मिला लेते हैं, तो नतीजा ऐसी ही दर्दनाक लाशों के रूप में सामने आता है। गाजियाबाद से लेकर लखनऊ तक, अब तक 100 से ज्यादा कोचिंग सेंटर्स को ताला लगाया जा चुका है, 200 से ज्यादा इमारतों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है और एलडीए का बुलडोजर तैयार खड़ा है! उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने भी साफ कर दिया है कि छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा के माहौल से कोई समझौता नहीं होगा। लेकिन सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है कि जब ये कमियां सालों से थीं, जब ये कोचिंग सेंटर नियमों को ताक पर रखकर बेसमेंट में मौत का धंधा चला रहे थे, तब इन जिम्मेदार विभागों के अधिकारी और इंस्पेक्टर कुंभकर्णी नींद क्यों सो रहे थे? क्या हर बार एक्शन लेने के लिए 15 मासूमों की आहुति देना जरूरी है? खैर, अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के इस कड़े आदेश के बाद क्या यूपी के ये बेसमेंट हमेशा के लिए सुरक्षित हो पाएंगे, या फिर कुछ दिनों के हंगामे के बाद भ्रष्ट तंत्र फिर से किसी नए हादसे का इंतजार करने लगेगा!
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