लखनऊ शर्मसार: आशियाना में 13 साल की मासूम से दरिंदगी, 5 हैवानों ने पार की हदें!

आज लखनऊ की हवाओं में मिट्टी की सोंधी खुशबू नहीं, बल्कि शर्म और दरिंदगी की गंध घुली हुई है। उत्तर प्रदेश की राजधानी, जहाँ से सत्ता का रसूख चलता है, जहाँ जीरो टॉलरेंस के बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगे हैं और जहाँ अपराधियों के मन में बाबा का खौफ होने का दावा किया जाता है, उसी लखनऊ के आशियाना इलाके में एक 13 साल की मासूम के साथ जो हुआ, उसे सुनकर रूह कांप जाएगी। सोचिए, एक बच्ची जो अपनी बीमार मां का हाथ बंटाने के लिए काम पर गई थी, वो आंधी-बारिश से बचने के लिए एक निर्माणाधीन छत के नीचे शरण लेती है, लेकिन उसे क्या पता था कि बाहर कड़कती बिजली से ज्यादा खतरनाक दरिंदे उस इमारत के अंदर घात लगाए बैठे हैं। जी हां पांच हैवानों ने मिलकर उस मासूम को न केवल बंधक बनाया, बल्कि उसके साथ वो घिनौना काम किया जिसे बयां करने में शब्द भी कतरा रहे हैं। ऐसे में सवाल आज सवाल उस 'पिंक बूथ' और 'एंटी रोमियो स्क्वाड' पर भी है जो ऐसे वक्त में कहीं नजर नहीं आते। क्या यही है वो सुरक्षित प्रदेश जहाँ बेटियां बेखौफ घूम सकती हैं? आइए देखते हैं इस रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात की एक-एक हकीकत।

दरअसल, घटना लखनऊ के पॉश इलाके आशियाना के सेक्टर-एम की है। मंगलवार शाम जब शहर में तेज आंधी और बारिश शुरू हुई, तो पूरा जनजीवन ठहर गया। इसी दौरान एक 13 वर्षीय किशोरी, जो अपनी मां की बीमारी के कारण पड़ोस के एक घर में काम करने गई थी, वो घर लौट रही थी। बारिश से बचने के लिए उसने एक निर्माणाधीन मकान में शरण ली। लेकिन वहां पहले से मौजूद पांच मजदूरों जिनमें से कुछ के नाबालिग होने की भी बात सामने आ रही है, उनकी नजर उस मासूम पर पड़ी। उन्होंने बच्ची को दबोच लिया, उसके हाथ-पैर बांध दिए और चिल्लाने से रोकने के लिए उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया। आंधी के शोर का फायदा उठाकर वे उसे पहली मंजिल पर ले गए और वहां पांचों ने मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।
जब काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी, तो उसके राजमिस्त्री पिता और मां उसे ढूंढने निकले। जिस महिला के यहाँ वह काम करती थी, वहां न मिलने पर जब तलाश पास की निर्माणाधीन बिल्डिंग तक पहुंची, तो वहां से कुछ आहट सुनाई दी। परिजनों ने जब अंदर जाकर देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची तीसरी मंजिल पर बदहवास, लहूलुहान और बंधी हुई हालत में मिली। उसके प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोटें थीं और वह बेहोश थी।

परिजनों के चीखने पर मोहल्ले के लोग इकट्ठा हो गए। भागने की कोशिश कर रहे दो मजदूर तो छत से कूद गए, जिन्हें चोटें आईं। वहीं गुस्साई भीड़ ने पांचों आरोपियों को घेर लिया और उनकी जमकर धुनाई कर दी। मौके पर पहुंची आशियाना थाना पुलिस ने पांचों को हिरासत में लिया, जिनमें से मुख्य आरोपी पीड़िता का परिचित बताया जा रहा है। पकड़े गए सभी आरोपी मूल रूप से सीतापुर और कुछ बिहार के रहने वाले बताए जा रहे हैं। वहीं किशोरी को तुरंत लोकबंधु अस्पताल भेजा गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत गंभीर बनी हुई है, काफी ब्लीडिंग हुई है और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से टूटी हुई चूड़ियां और अन्य साक्ष्य जुटाए हैं।

आपको बता दें यह घटना उस शहर में हुई है जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद बैठते हैं। यूपी सरकार दावा करती है कि अपराधी अब गले में तख्ती डालकर घूमते हैं, लेकिन यहाँ तो अपराधी मासूमों के मुंह में कपड़ा ठूंसकर उन्हें अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं। कहाँ है मिशन शक्ति? क्या मिशन शक्ति सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित है? अगर राजधानी की पुलिस को इस बात की भनक नहीं लग पाती कि एक निर्माणाधीन इमारत में घंटों तक गैंगरेप हो रहा है, तो फिर सुरक्षा के दावों का क्या मतलब? अपराधियों में खौफ या पुलिस का ढीलापन? लखनऊ के बीचों-बीच ऐसी जघन्य वारदात होना यह बताता है कि अपराधियों के मन में पुलिस का कोई डर नहीं रह गया है। आंधी और बारिश अपराधियों के लिए सुरक्षा का कवच बन गई, जबकि आम नागरिक के लिए यह मौत का जाल। वहीं इस घटना के बाद लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि बुलडोजर की दिशा कब मुड़ेगी? क्या उन दरिंदों के खिलाफ भी वैसी ही सख्त कार्रवाई होगी जैसी बड़े-बड़े भाषणों में कही जाती है, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

जाहिर है एक 13 साल की बच्ची जो अभी ठीक से दुनिया को समझ भी नहीं पाई थी, उसकी जिंदगी में ऐसा अंधेरा भर दिया गया जिसकी भरपाई कोई सरकार नहीं कर सकती। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट लगा दिया है, गिरफ्तारियां भी हो गई हैं, लेकिन सवाल वही खड़ा है कि क्या अगली बार जब कोई बेटी बारिश से बचने के लिए कहीं रुकेगी, तो वह सुरक्षित घर पहुँच पाएगी? लखनऊ की यह घटना उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था के चेहरे पर एक गहरा दाग है। अब देखना यह है कि प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति करता है या फिर ऐसी नजीर पेश करता है कि दोबारा ऐसे अपराध को सोचकर भी किसी की रूह कांप जाए।

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