लखनऊ के जवाहर भवन में भीषण आग! सरकारी दफ्तरों में मची अफरा-तफरी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दिल कहे जाने वाले हजरतगंज इलाके के पास स्थित जवाहर भवन में आज सोमवार सुबह-सुबह एक ऐसा अग्निकांड हुआ, जिसने पूरे सूबे के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया। सोमवार का दिन था, दफ्तर खुलने का वक्त था और रिमझिम बारिश हो रही थी, लेकिन तभी जवाहर भवन के भीतर से आग की ऐसी लपटें उठीं कि देखते ही देखते चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। धुआं इतना घना और खौफनाक था कि दो किलोमीटर दूर से ही आसमान में काला गुबार साफ दिखाई दे रहा था। 

दरअसल, पूरा मामला आज सोमवार सुबह करीब 9:30 से 9:40 बजे के बीच का है। हफ़्ते का पहला दिन होने के कारण अधिकांश सरकारी कर्मचारी और अधिकारी अपनी-अपनी टेबल संभाल चुके थे। तभी अचानक जवाहर भवन की चौथी मंजिल से जलने की बदबू और धुएं का गुबार उठने लगा। पता चला कि चौथी मंजिल पर बने कैंटीन से आग की शुरुआत हुई थी। लेकिन देखते ही देखते इस आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते पूरी चौथी मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया। इसी फ्लोर पर खाद्य एवं रसद विभाग, मलेरिया विभाग समेत कई बेहद महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय संचालित होते हैं, जहां आग ने तांडव मचाना शुरू कर दिया। जैसे ही आग लगी, वहां मौजूद PWD के सजग कर्मचारियों ने सूझबूझ दिखाई। उन्होंने तुरंत बिल्डिंग में लगे फायर फाइटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके लपटों पर काबू पाने की पूरी कोशिश की। लेकिन आग इतनी तेजी से भड़की और इतनी बेकाबू हो गई कि उनके सारे इंतजाम छोटे पड़ गए। आनन-फानन में फायर ब्रिगेड को फोन घुमाया गया। सूचना मिलते ही दमकल की एक-दो नहीं, बल्कि करीब 15 गाड़ियां सायरन बजाती हुई मौके पर पहुंचीं और मोर्चा संभाला। 
आपको बता दें दमकल विभाग के जवान जब जान हथेली पर रखकर आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे, तभी इस जर्जर हो चुके भवन की चौथी मंजिल की छत का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि कोई इसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। वहीं इस भीषण आग की वजह से कई सरकारी विभागों के दफ्तर पूरी तरह जल गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि दफ्तरों में रखे बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज, सरकारी फाइलें, कंप्यूटर और कीमती फर्नीचर जलकर पूरी तरह खाक हो चुके हैं। भारी संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। 

वहीं हादसे की खबर जैसे ही बिजली की तरह फैली, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तुरंत एक्शन में आए और बिना वक्त गंवाए सीधे घटनास्थल पर पहुंच गए। उनके साथ लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल और जिले के कलेक्टर समेत तमाम आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। डिप्टी सीएम ने खुद राहत और बचाव कार्य का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सबसे पहले लोगों की जान बचाई जाए और आग पर जल्द से जल्द काबू पाया जाए। 

वहीं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि लखनऊ में सुबह से ही धीमी-धीमी बारिश हो रही थी, मौसम ठंडा था, तो फिर इतनी भीषण आग कैसे लग गई? शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि कैंटीन में शॉर्ट सर्किट की वजह से यह हादसा हुआ होगा। हालांकि, प्रशासन ने साफ कर दिया है किउत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के दिल कहे जाने वाले हजरतगंज इलाके के पास स्थित जवाहर भवन में आज सोमवार सुबह-सुबह एक ऐसा अग्निकांड हुआ, जिसने पूरे सूबे के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया। सोमवार का दिन था, दफ्तर खुलने का वक्त था और रिमझिम बारिश हो रही थी, लेकिन तभी जवाहर भवन के भीतर से आग की ऐसी लपटें उठीं कि देखते ही देखते चारों तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी मच गई। धुआं इतना घना और खौफनाक था कि दो किलोमीटर दूर से ही आसमान में काला गुबार साफ दिखाई दे रहा था। 

दरअसल, पूरा मामला आज सोमवार सुबह करीब 9:30 से 9:40 बजे के बीच का है। हफ़्ते का पहला दिन होने के कारण अधिकांश सरकारी कर्मचारी और अधिकारी अपनी-अपनी टेबल संभाल चुके थे। तभी अचानक जवाहर भवन की चौथी मंजिल से जलने की बदबू और धुएं का गुबार उठने लगा। पता चला कि चौथी मंजिल पर बने कैंटीन से आग की शुरुआत हुई थी। लेकिन देखते ही देखते इस आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और देखते ही देखते पूरी चौथी मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया। इसी फ्लोर पर खाद्य एवं रसद विभाग, मलेरिया विभाग समेत कई बेहद महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय संचालित होते हैं, जहां आग ने तांडव मचाना शुरू कर दिया। जैसे ही आग लगी, वहां मौजूद PWD के सजग कर्मचारियों ने सूझबूझ दिखाई। उन्होंने तुरंत बिल्डिंग में लगे फायर फाइटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करके लपटों पर काबू पाने की पूरी कोशिश की। लेकिन आग इतनी तेजी से भड़की और इतनी बेकाबू हो गई कि उनके सारे इंतजाम छोटे पड़ गए। आनन-फानन में फायर ब्रिगेड को फोन घुमाया गया। सूचना मिलते ही दमकल की एक-दो नहीं, बल्कि करीब 15 गाड़ियां सायरन बजाती हुई मौके पर पहुंचीं और मोर्चा संभाला। 
आपको बता दें दमकल विभाग के जवान जब जान हथेली पर रखकर आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे, तभी इस जर्जर हो चुके भवन की चौथी मंजिल की छत का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर नीचे गिर गया। गनीमत रही कि कोई इसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। वहीं इस भीषण आग की वजह से कई सरकारी विभागों के दफ्तर पूरी तरह जल गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि दफ्तरों में रखे बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज, सरकारी फाइलें, कंप्यूटर और कीमती फर्नीचर जलकर पूरी तरह खाक हो चुके हैं। भारी संपत्ति के नुकसान का अनुमान है। 

वहीं हादसे की खबर जैसे ही बिजली की तरह फैली, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तुरंत एक्शन में आए और बिना वक्त गंवाए सीधे घटनास्थल पर पहुंच गए। उनके साथ लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल और जिले के कलेक्टर समेत तमाम आला अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। डिप्टी सीएम ने खुद राहत और बचाव कार्य का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सबसे पहले लोगों की जान बचाई जाए और आग पर जल्द से जल्द काबू पाया जाए। 

वहीं अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि लखनऊ में सुबह से ही धीमी-धीमी बारिश हो रही थी, मौसम ठंडा था, तो फिर इतनी भीषण आग कैसे लग गई? शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि कैंटीन में शॉर्ट सर्किट की वजह से यह हादसा हुआ होगा। हालांकि, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि आग बुझाने के बाद पूरे मामले की हाई-लेवल जांच कराई जाएगी, जिसके बाद ही आधिकारिक तौर पर आग की असली वजह सामने आ पाएगी। फिलहाल, राजधानी के बीचो-बीच हुए इस अग्निकांड ने सरकारी इमारतों की सुरक्षा पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है! आग बुझाने के बाद पूरे मामले की हाई-लेवल जांच कराई जाएगी, जिसके बाद ही आधिकारिक तौर पर आग की असली वजह सामने आ पाएगी। फिलहाल, राजधानी के बीचो-बीच हुए इस अग्निकांड ने सरकारी इमारतों की सुरक्षा पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है!

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