अलीगंज अग्निकांड के बाद UP में महाअभियान! 485 से ज्यादा भवन सील
लखनऊ के अलीगंज में हुए उस खौफनाक और दिल दहला देने वाले अग्निकांड को कोई भूला नहीं है। मासूम जिंदगियों और बेगुनाह छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले मौत के सौदागरों के खिलाफ अब योगी सरकार का एक्शन अवतार शुरू हो चुका है! जी हां, इस वक्त की सबसे बड़ी खबर उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से आ रही है, जहां बिना सुरक्षा मानकों के धड़ल्ले से चल रहे कोचिंग संस्थानों, अवैध लाइब्रेरियों और कमर्शियल कॉम्प्लेक्सों को जमींदोज और सील करने का महा-अभियान छिड़ गया है!
यूपी सरकार के सख्त आदेश के बाद, विकास प्राधिकरणों और फायर ब्रिगेड की टीमों ने पूरे सूबे में हड़कंप मचा रखा है। पिछले तीन दिनों के भीतर प्रदेशभर में 485 से अधिक भवनों को सील किया जा चुका है और 2000 से ज्यादा प्रतिष्ठानों को अल्टीमेटम यानी नोटिस थमा दिया गया है। वहीं सबसे बड़ी कार्रवाई बाबा विश्वनाथ की नगरी और शिक्षा के बड़े हब वाराणसी में देखने को मिली! वाराणसी विकास प्राधिकरण ने ऐसा हंटर चलाया है कि मानक विहीन कोचिंग संचालकों के पसीने छूट गए हैं। आपको बता दें वाराणसी, जो आज के समय में मेडिकल, JEE और सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले लाखों छात्रों का गढ़ बन चुका है, वहां VDA ने 15 दिनों के विशेष अभियान के तहत ताबातोड़ एक्शन शुरू कर दिया है।
बीते दो से तीन दिनों में वाराणसी में 35 से अधिक कोचिंग संस्थानों, लाइब्रेरियों और भवनों को सील कर दिया गया है। VDA के इस खौफ का असर ऐसा है कि जो संस्थान नियमों की धज्जियां उड़ाकर बेसमेंट में चल रहे थे, वे अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही खुद अपने सेंटर्स पर ताला लटकाकर फरार हो गए हैं! दरअसल, बात सिर्फ वाराणसी की नहीं है, राजधानी लखनऊ में भी LDA ने तीसरे दिन 55 से ज्यादा इमारतों को सील किया। हजरतगंज से लेकर ज़ोन-5 तक, जहां भी नियमों का उल्लंघन मिला, वहां सीधे ताले जड़ दिए गए। गुरुवार को ही पूरे प्रदेश में 135 से अधिक इमारतों को फायर NOC न होने और आपातकालीन निकास गायब होने की वजह से सील किया गया।
आपको बता दें इस महा-कार्रवाई की ज़द में सिर्फ लखनऊ-बनारस ही नहीं, बल्कि मेरठ मंडल में 46 प्रतिष्ठान सील हुए, तो सहारनपुर में 23 लाइब्रेरियों और अस्पतालों को नोटिस थमाया गया। कानपुर में 19 कोचिंग सेंटर, होटल और रेस्टोरेंट सील किए गए हैं, जबकि बरेली और मुरादाबाद में भी अवैध निर्माणों पर कड़ा प्रहार हुआ है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि या तो नियमों का पालन करो, फायर फाइटिंग उपकरण लगाओ, पार्किंग और आपातकालीन गेट दुरुस्त करो...नहीं तो दुकानें बंद करने के लिए तैयार रहो!
ऐसे में साफ तौर पर समझा जा सकता है कि अब लापरवाही और घूसखोरी के दम पर छात्रों की जिंदगी को दांव पर लगाने का खेल उत्तर प्रदेश में नहीं चलेगा। चाहे वह कोई नामी कोचिंग संस्थान हो, बड़ा अस्पताल हो या आलीशान होटल...अगर फायर सेफ्टी की NOC नहीं है, अगर सीढ़ियां संकरी हैं, और अगर बच्चों के निकलने का रास्ता बंद है, तो वहां प्रशासन का ताला लगना तय है। अधिकारियों ने साफ चेतावनी दे दी है कि यह 15 दिनों का अभियान तो बस शुरुआत है, यह बुलडोज़र और सीलिंग की कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक एक-एक कमर्शियल बिल्डिंग पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती।
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