कोई वीडियो बनाता रहा, कोई जलता रहा, लखनऊ आगजनी ने खोले जख्म

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकासनगर से कल शाम जो तस्वीरें आईं, उसने पूरे प्रदेश को दहला कर रख दिया है। यह सिर्फ आग नहीं थी, यह बर्बादी का वो मंजर था जिसने देखते ही देखते सैकड़ों परिवारों के सिर से छत छीन ली और मासूमों को मौत की नींद सुला दिया। कल्पना कीजिए उस खौफ की, जब एक के बाद एक 100 सिलेंडर बम की तरह फटने लगे, जब आसमान धुएं के गुबार से काला पड़ गया और 10 किलोमीटर दूर तक सिर्फ आग की लपटें दिखाई दे रही थीं। चीख-पुकार, भगदड़ और जलते हुए आशियाने...आज की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सीधे नवाबों के शहर लखनऊ से है!

दरअसल, बुधवार की शाम करीब 5:30 बजे, जब लोग अपने दिनभर के काम समेट कर घरों की ओर लौट रहे थे, तभी विकासनगर सेक्टर-12 रिंग रोड के किनारे स्थित अवैध बस्ती में अचानक आग की एक चिंगारी उठी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग एक मस्जिद नुमा झोपड़ी से शुरू हुई और तेज हवाओं ने इसे वो विकराल रूप दिया कि महज कुछ ही मिनटों में 1200 झोपड़ियां धूं-धूं कर जलने लगीं। यह आग मामूली नहीं थी। बस्ती की झोपड़ियों में रखे लगभग 100 गैस सिलेंडर एक के बाद एक फटने लगे। धमाके इतने जोरदार थे कि आसपास की धरती कांप उठी। हर धमाके के साथ आग की लपटें और ऊंची होती गईं। लोग अपनी जान बचाने के लिए नंगे पैर भाग रहे थे, लेकिन आग की रफ्तार उनकी दौड़ से कहीं ज्यादा तेज थी। इस त्रासदी में सबसे दुखद खबर बच्चों को लेकर आई। भगदड़ में 6 बच्चे लापता हो गए थे, जिनमें से देर रात आयुषी और स्वाती नाम की दो बच्चियों की मौत की पुष्टि हो गई है। जब उनके शव बरामद हुए, तो परिजनों के करुण क्रंदन से पूरा इलाका गमगीन हो गया। प्रशासन अभी भी अन्य लापता बच्चों के लिए सर्च ऑपरेशन चला रहा है। 

इतना ही नहीं इस आगजनी में इंसानों के साथ-साथ बेजुबान जानवरों पर भी कुदरत और लापरवाही का यह कहर टूटा। बताया जा रहा है कि लगभग 50 मवेशी खूंटे से बंधे-बंधे जिंदा जल गए। हालांकि प्रशासन अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि करने से कतरा रहा है, लेकिन मौके का मंजर कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ मदद पहुंचने में हुई देरी ने लोगों के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया। आरोप है कि पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया गया पर कॉल नहीं लगा, और जब गाड़ियां आईं तो तब तक सब कुछ राख हो चुका था। वहीं गुस्से में आए लोगों ने प्लॉट मालिक के घर पर पथराव कर दिया, क्योंकि उनका मानना है कि कब्जा हटवाने के लिए यह आग जानबूझकर लगवाई गई थी। वहीं देर रात लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी अय्यर घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। 

आपको बता दें हद तो तब हो गई जब लोग आग बुझाने में मदद करने के बजाय वीडियो बनाने में जुटे रहे, जिससे दमकल की गाड़ियां जाम में फंस गईं। पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ीं, जिसमें सिविल डिफेंस के वार्डन ऋषि श्रीवास्तव समेत 5 लोगों के सिर फट गए। वहीं घटना की गंभीरता देखते हुए डीजी फायर सुजीत पांडेय, पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर और जिलाधिकारी वी. विशाख मौके पर डटे रहे। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक खुद हालात का जायजा लेने पहुंचे और पीड़ितों के खाने-पीने और रहने के इंतजाम के कड़े निर्देश दिए। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

देखा जाए तो विकासनगर की ये आग कम तो गई है, लेकिन पीछे छोड़ गई है राख का ढेर, अपनों को खोने का गम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े सैकड़ों सवाल। क्या उन दो मासूमों की जान वापस आ पाएगी? क्या उन 1200 परिवारों को फिर से छत मिल पाएगी जिनका सब कुछ इस आग की भेंट चढ़ गया? लखनऊ की इस तबाही ने यह साफ कर दिया है कि लापरवाही और भीड़ की संवेदनहीनता किसी बड़े हादसे को और भी भयावह बना सकती है। आज पूरा लखनऊ उन पीड़ितों के साथ खड़ा है, लेकिन इंसाफ की राह अभी भी धुएं में धुंधली नजर आ रही है।

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