नीरज बोरा की सीट पर 2027 का मुकाबला! क्या फिर दोहराएगा इतिहास?
लखनऊ उत्तर...राजधानी की वो विधानसभा सीट, जहां चुनावी मुकाबला सिर्फ नेताओं के भाषणों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि हर चुनाव में वोटों का गणित भी सियासी तस्वीर बदलने के संकेत देता है! कभी समाजवादी पार्टी ने यहां जीत का परचम लहराया, तो कभी बहुजन समाज पार्टी ने बाजी मारी...लेकिन पिछले दो विधानसभा चुनावों से इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। साल 2012 में समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्रा ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की। 2017 में तस्वीर बदली और भाजपा के डॉ. नीरज बोरा ने सपा को पीछे छोड़ते हुए विधानसभा में एंट्री की। फिर आया 2022 का चुनाव...भाजपा ने दोबारा जीत दर्ज की और इस बार जीत का अंतर भी बढ़ गया। लेकिन अब सवाल सिर्फ पुराने चुनावी नतीजों का नहीं है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची में बदलाव, नए मतदाताओं की संख्या, पुराने मतदाताओं के नामों की स्थिति और शहर के स्थानीय मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा हैं। आखिर लखनऊ उत्तर की सियासत का पूरा इतिहास क्या कहता है? भाजपा की लगातार दो जीत के पीछे चुनावी आंकड़े क्या बताते हैं? समाजवादी पार्टी के सामने चुनौती क्या है? और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर कौन-से तथ्य सामने आए हैं? समझिए इस खास रिपोर्ट में।
लखनऊ उत्तर विधानसभा सीट, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की नौ विधानसभा सीटों में से एक है। यह लखनऊ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है और इसका विधानसभा क्षेत्र संख्या 172 है। शहरी आबादी, पुराने मोहल्ले, बाजार, आवासीय कॉलोनियां और तेजी से बदलती शहरी जरूरतें इस सीट की पहचान का हिस्सा हैं। इस सीट का राजनीतिक इतिहास भी कई बदलावों से गुजरा है। पुराने चुनावी रिकॉर्ड में कांग्रेस का प्रभाव दिखाई देता है। बाद के दौर में भाजपा ने अपनी जगह बनाई, जबकि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी भी यहां जीत दर्ज कर चुकी हैं। साल 2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के फतेह बहादुर ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2012 में समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्रा ने जीत हासिल की। यानी इस सीट पर एक दौर में बसपा और फिर सपा को जनता का समर्थन मिला। लेकिन 2017 के चुनाव में सियासी तस्वीर बदल गई। भाजपा ने डॉ. नीरज बोरा को मैदान में उतारा और उन्होंने जीत दर्ज की। इसके बाद 2022 में भी भाजपा ने अपना प्रदर्शन दोहराया। इस तरह लगातार दो विधानसभा चुनाव जीतकर डॉ. नीरज बोरा ने लखनऊ उत्तर में भाजपा की स्थिति मजबूत की।
सबसे पहले बात करते हैं 2012 के विधानसभा चुनाव की। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी के अभिषेक मिश्रा और कांग्रेस के डॉ. नीरज बोरा के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। अभिषेक मिश्रा को 47 हजार 580 वोट मिले, जबकि डॉ. नीरज बोरा को 45 हजार 361 वोट हासिल हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर सिर्फ 2 हजार 219 वोट रहा। यानी उस चुनाव में मुकाबला बेहद करीबी था। सपा ने जीत हासिल की और अभिषेक मिश्रा विधायक बने। तीसरे स्थान पर रही बहुजन समाज पार्टी को 22 हजार 902 वोट मिले। यह नतीजा बताता है कि उस समय लखनऊ उत्तर में मुकाबला कई दलों के बीच था और जीत-हार का फैसला सीमित अंतर से हुआ।
इसके बाद आया 2017 का विधानसभा चुनाव। इस बार डॉ. नीरज बोरा भाजपा के टिकट पर मैदान में थे। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने अपने मौजूदा विधायक अभिषेक मिश्रा को उम्मीदवार बनाया। नतीजे आए तो भाजपा के डॉ. नीरज बोरा को एक लाख 9 हजार 315 वोट मिले। वहीं सपा के अभिषेक मिश्रा को 82 हजार 39 वोट हासिल हुए। भाजपा ने यह मुकाबला 27 हजार 276 वोटों से जीत लिया। 2012 के मुकाबले यह बड़ा बदलाव था। जहां पिछला चुनाव महज 2 हजार 219 वोटों के अंतर से तय हुआ था, वहीं 2017 में जीत का अंतर बढ़कर 27 हजार से ज्यादा हो गया। इस चुनाव ने लखनऊ उत्तर की राजनीति में एक नई स्थिति पैदा की। भाजपा ने सीट पर जीत हासिल की और डॉ. नीरज बोरा पहली बार इस सीट से विधायक बने।
अब बात 2022 के विधानसभा चुनाव की। भाजपा ने एक बार फिर डॉ. नीरज बोरा पर भरोसा जताया। समाजवादी पार्टी ने पूजा शुक्ला को मैदान में उतारा। बहुजन समाज पार्टी से मोहम्मद सरवर मलिक और कांग्रेस से अजय कुमार श्रीवास्तव भी चुनाव लड़े। मतगणना हुई तो भाजपा के डॉ. नीरज बोरा को एक लाख 39 हजार 159 वोट मिले। समाजवादी पार्टी की पूजा शुक्ला को एक लाख 5 हजार 206 वोट हासिल हुए। इस तरह भाजपा ने 33 हजार 953 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। बसपा को 8 हजार 945 और कांग्रेस को 3 हजार 236 वोट मिले। खास बात यह रही कि 2017 में भाजपा की जीत का अंतर 27 हजार 276 वोट था, जो 2022 में बढ़कर 33 हजार 953 वोट हो गया। यानी पिछले दोनों विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जीत दर्ज की और 2022 में उसका जीत का अंतर भी बढ़ा।
लखनऊ उत्तर की राजनीतिक तस्वीर समझने के लिए लोकसभा चुनाव के आंकड़े भी अहम हैं। यह विधानसभा क्षेत्र लखनऊ लोकसभा सीट का हिस्सा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के राजनाथ सिंह को लखनऊ उत्तर विधानसभा खंड में एक लाख 41 हजार 683 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के रविदास मेहरोत्रा को एक लाख 2 हजार 493 वोट हासिल हुए। इस तरह भाजपा को इस विधानसभा खंड में 39 हजार 190 वोटों की बढ़त मिली। लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव एक जैसे नहीं होते। लोकसभा में उम्मीदवार और मुद्दे अलग होते हैं, जबकि विधानसभा चुनाव में स्थानीय विधायक, क्षेत्रीय समस्याएं और राज्य सरकार के कामकाज पर भी मतदाताओं का ध्यान रहता है। इसलिए लोकसभा चुनाव की बढ़त को विधानसभा चुनाव के नतीजे की गारंटी नहीं माना जा सकता।
अब बात उस मुद्दे की, जो आगामी चुनाव से पहले खास ध्यान खींच रहा है...मतदाता सूची। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की अंतिम मतदाता सूची में लखनऊ उत्तर विधानसभा क्षेत्र में 3 लाख 44 हजार 309 मतदाता दर्ज हैं। इनमें एक लाख 78 हजार 61 पुरुष, एक लाख 66 हजार 232 महिलाएं और 16 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल बताए गए हैं। इन आंकड़ों के हिसाब से पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या में करीब 11 हजार 829 का अंतर है। वहीं हर एक हजार पुरुष मतदाताओं पर लगभग 934 महिला मतदाता हैं। यहां एक और महत्वपूर्ण तुलना सामने आती है। 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों में लखनऊ उत्तर में कुल 4 लाख 64 हजार 258 मतदाता दर्ज थे। यदि 2026 की अंतिम सूची का आंकड़ा 3 लाख 44 हजार 309 सही और तुलनीय है, तो दोनों सूचियों के बीच करीब एक लाख 19 हजार 949 मतदाताओं का अंतर बनता है। लेकिन इस अंतर को सीधे इतने नाम कटने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
आपको बता दें लखनऊ उत्तर एक शहरी सीट है, इसलिए यहां मतदाताओं के सामने रोजमर्रा की समस्याएं भी अहम रहती हैं। सड़कें, जलनिकासी, सीवर, साफ-सफाई, पेयजल, ट्रैफिक, पार्किंग, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं जैसे मुद्दे स्थानीय राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं। डालीगंज और खदरा जैसे इलाकों की समस्याएं, पुरानी बस्तियों की जरूरतें और नई कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी मतदाताओं की चर्चा का हिस्सा बन सकती हैं।
तो देखा आपने लखनऊ उत्तर की सियासत का इतिहास साफ तौर पर बताता है कि इस सीट पर समय-समय पर अलग-अलग दलों को जीत मिली है। 2007 में बसपा, 2012 में समाजवादी पार्टी और 2017 तथा 2022 में भाजपा ने जीत दर्ज की। पिछले दो विधानसभा चुनावों में डॉ. नीरज बोरा लगातार विधायक चुने गए। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मतदाता सूची में बदलाव की स्थिति क्या रहती है, स्थानीय समस्याओं पर जनता की क्या प्रतिक्रिया होती है और राजनीतिक दल किन मुद्दों तथा उम्मीदवारों के साथ मैदान में उतरते हैं। लखनऊ उत्तर में पिछला चुनावी रिकॉर्ड भाजपा की लगातार दो जीत दिखाता है, लेकिन अगला चुनाव किस दिशा में जाएगा, इसका जवाब आने वाले महीनों की राजनीतिक गतिविधियों, उम्मीदवारों और मतदाताओं के फैसले में छिपा होगा।

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