बिजली विभाग की 'कयामत की रात': लखनऊ में हाईवे जाम, पुलिस की लाठियां और लाइनमैन की मौत!
यूपी की राजधानी लखनऊ इस वक्त सिर्फ आसमान से बरसती आग से ही नहीं सुलग रही, बल्कि बिजली विभाग की नाकामी और निकम्मेपन की भट्टी में भी झुलस रही है! पारा 45 डिग्री के पार है, रातें उबल रही हैं और नवाबों के शहर में पावर कट का ऐसा भयंकर खेल चल रहा है कि जनता के सब्र का बांध अब टूटता नजर आ रहा है! जी हां आधी रात को जब लोगों को अपने AC कमरों में चैन की नींद सो जाना चाहिए था, तब लखनऊ की सड़कों पर त्राहि-त्राहि मची थी। बच्चे बिलख रहे हैं, बीमार बुजुर्ग बिना हवा-पानी के तड़प रहे हैं, और गुस्साए लोग आधी रात को सड़कों पर उतरकर 'बिजली चोर-अधिकारी चोर' के नारे लगा रहे हैं। कहीं हाईवे जाम किया जा रहा है, कहीं मड़ियांव पुलिस की लाठियां गरज रही हैं, तो कहीं तंग आकर सत्ता और विपक्ष के नेता खुद धरने पर बैठ गए हैं! बिजली विभाग के बड़े-बड़े वीआईपी अफसर उपकेंद्रों को कर्मचारियों के भरोसे छोड़कर मैदान से भाग खड़े हुए हैं। यह सिर्फ बिजली कटौती नहीं है, यह भीषण गर्मी के बीच लखनऊ की जनता के साथ क्रूर मज़ाक है! आखिर लखनऊ के किन-किन इलाकों में बुधवार की रात 'कयामत की रात' बन गई, और कैसे एक लाइनमैन की मौत ने इस पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया? आइए, आपको दिखाते हैं राजधानी की यह जमीनी हकीकत!
दरअसल, बुधवार की रात लखनऊ के अलग-अलग कोनों से जो तस्वीरें आईं, वो किसी गृहयुद्ध जैसी लग रही थीं। शकुंतला मिश्रा पावर हाउस से जुड़े दर्जनों इलाकों में 20 मई की रात 10 बजे जो बत्ती गुल हुई, तो सीधे रात के 1 बजे तक पूरा इलाका 'ब्लैकआउट' के अंधेरे में डूब गया। 3 घंटे तक बिना पंखे और पानी के तड़पे लोगों का गुस्सा जब बेकाबू हुआ, तो दुबग्गा में सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए और सीतापुर हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया! वहीं हर्ष नगर, बुद्धेश्वर, नाजिम नगर, कुंदन विहार, मायापुरम, सोना विहार...ये वो इलाके हैं जहाँ लो-वोल्टेज और घंटों की बिजली कटौती ने नरक बना दिया है। लोगों ने बताया कि उन्होंने विभाग को सैकड़ों फोन घुमाए, लेकिन जब कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो जनता ने मुख्य मार्ग जाम कर दिया और बिजली घर का घेराव कर लिया। वहीं दूसरी तरफ फैजुल्लागंज की द्वारिका कॉलोनी में भारत लॉन के पास पिछले 10 दिनों से बेहिसाब कटौती चल रही थी। बुधवार देर रात जब सब्र टूटा, तो लोग सड़कों पर आ गए और चक्काजाम कर दिया। लेकिन राहत देने के बजाय मड़ियांव पुलिस मौके पर पहुंची और लाठियां फटकार कर उपभोक्ताओं को खदेड़ दिया! जनता का सवाल है कि क्या हक मांगना अब गुनाह हो गया है? आपको बता दें अमीरों के इलाके गोमती नगर के सेक्टर-5 उपकेंद्र का हाल भी बदतर रहा। यहाँ लगातार तीन दिन से रात 10 बजे के बाद मुख्य केबल जलने की घटनाएं हो रही थीं। बुधवार को जब देर रात तक बिजली नहीं आई, तो भड़के उपभोक्ताओं ने उपकेंद्र को चारों तरफ से घेर लिया और जमकर नारेबाजी की।
वहीं गुडंबा और जानकीपुरम में भी आग का तांडव देखने को मिला। ओवरलोडिंग के कारण देर रात मिश्रपुर फीडर पूरी तरह ठप हो गया, जिससे 300 से ज्यादा घरों का संपर्क कट गया। नहर रोड और स्कॉर्पियो क्लब क्षेत्र में बिजली के केबलों में पेटी फ्यूज उड़ने के साथ 'एबीसी लाइन' धू-धू कर जलने लगी, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। वहीं बिजली संकट के बीच लखनऊ में एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला हादसा भी हुआ। फैजुल्लागंज क्षेत्र के नीलकंठ फीडर पर आई खराबी को ठीक करने के लिए लाइनमैन उदयराज बाकायदा शटडाउन लेकर खंभे पर चढ़े थे। नीचे उनका संविदाकर्मी साथी बृजेश खड़ा था। उदयराज जैसे ही प्लास से केबल की जांच करने लगे, अचानक उसमें तगड़ा करंट दौड़ गया। करंट लगते ही उदयराज का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे पोल से नीचे पक्की सड़क पर आ गिरे। आनन-फानन में उन्हें ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मूलरूप से गोंडा के रहने वाले उदयराज जैन कॉलोनी में रहकर अपनी ड्यूटी निभा रहे थे, लेकिन विभाग की लापरवाही ने उनकी जान ले ली। वहीं दूसरी तरफ सड़क से शुरू हुआ यह बवाल अब सियासी गलियारों तक पहुंच चुका है। तालकटोरा उपकेंद्र पर जब बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ताओं ने घेराव किया, तो उनके समर्थन में पश्चिम क्षेत्र के सपा विधायक अरमान खान भी वहीं धरने पर बैठ गए। विधायक ने सीधे आरोप लगाया कि "पावर हाउस पर न कोई कर्मचारी मिलता है और न अधिकारी, जनता जाए तो कहाँ जाए?" उन्होंने एक हफ्ते में सुधार न होने पर अनशन की चेतावनी दी है।
तो कुल मिलाकर हकीकत यह है कि नवाबों का शहर इस भीषण गर्मी में पूरी रात जागकर काटने को मजबूर है। बच्चे सो नहीं पा रहे, बीमार लोग तड़प रही हैं, पानी की मोटरें ठप हैं और बूंद-बूंद पानी के लिए किल्लत मची है। जब लोग रात भर सोएंगे नहीं, तो अगले दिन काम पर कैसे जाएंगे? वहीं बिजली विभाग का रटा-रटाया बहाना है कि "ओवरलोडिंग है, कटियाबाज बिजली चोरी कर रहे हैं, इसलिए ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं।" लेकिन सवाल यह है कि जब हर साल गर्मी आती है, तो विभाग पहले से तैयारी क्यों नहीं करता? क्यों अफसरों के फोन बंद हो जाते हैं? लखनऊ की जनता का यह आक्रोश सिर्फ बिजली के लिए नहीं है, बल्कि उस खोखले सिस्टम के खिलाफ है जो टैक्स तो पूरा वसूलता है लेकिन बदले में सिर्फ अंधकार और लाठियां देता है। अब देखना यह है कि जनता के इस महा-आक्रोश के बाद सरकार के कानों पर जूं रेंगती है या फिर लखनऊ की जनता को ऐसे ही उबलती रातों में जलने के लिए छोड़ दिया जाएगा।


No Previous Comments found.