लखनऊ पश्चिम का पूरा चुनावी गणित! 2012 से अब तक कौन जीता, कौन हारा?
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ...सियासत का ऐसा शहर, जहां हर विधानसभा सीट का अपना अलग मिजाज है। कहीं जातीय समीकरण चुनाव की दिशा तय करते हैं, तो कहीं विकास, स्थानीय समस्याएं और उम्मीदवार की पकड़ मतदाताओं के फैसले पर असर डालती है। और इन्हीं अहम सीटों में से एक है लखनऊ पश्चिम विधानसभा सीट, जहां पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजे बताते हैं कि मुकाबला कभी समाजवादी पार्टी के पक्ष में गया, तो कभी भारतीय जनता पार्टी ने बाजी मारी।
2012 में समाजवादी पार्टी के मोहम्मद रेहान ने जीत दर्ज की। 2017 में भाजपा के सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने सीट अपने नाम कर ली। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर वापसी की और अरमान खान विधायक बने। यानी लखनऊ पश्चिम की सियासत में तस्वीर एक जैसी नहीं रही, बल्कि हर चुनाव में मुकाबले का रंग बदला है। अब सवाल है कि आखिर इस सीट पर ऐसा क्या हुआ कि 2012 में सपा जीती, 2017 में भाजपा को जीत मिली और 2022 में फिर सपा ने अपना परचम लहरा दिया? किस चुनाव में जीत का अंतर कितना रहा? किस उम्मीदवार को कितने वोट मिले? और 2024 के लोकसभा चुनाव में लखनऊ पश्चिम के मतदाताओं ने किस उम्मीदवार को ज्यादा समर्थन दिया? इन सभी सवालों के जवाब मिलेंगे इस रिपोर्ट में। साथ ही बात करेंगे लखनऊ पश्चिम के मतदाताओं की संख्या, इलाके से जुड़े बुनियादी मुद्दों और उन सवालों की, जो आने वाले विधानसभा चुनाव में भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। तो चलिए, सबसे पहले समझते हैं लखनऊ पश्चिम सीट का पूरा चुनावी इतिहास।
लखनऊ पश्चिम विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित है। यह विधानसभा क्षेत्र संख्या 171 है और सामान्य श्रेणी की सीट है। यह लखनऊ लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां की राजनीति को समझने के लिए सिर्फ पार्टियों के नाम जानना काफी नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि अलग-अलग चुनावों में जनता ने किस उम्मीदवार पर भरोसा जताया और जीत-हार का अंतर कितना रहा। मौजूदा समय में इस सीट से समाजवादी पार्टी के अरमान खान विधायक हैं। लेकिन यहां तक पहुंचने का राजनीतिक सफर कई बदलावों से होकर गुजरा है। 2012 में सपा ने जीत दर्ज की, 2017 में भाजपा आगे निकल गई और 2022 में सपा ने फिर से सीट पर कब्जा कर लिया। इन तीनों चुनावों के नतीजे बताते हैं कि लखनऊ पश्चिम में मुकाबला लगातार बदलता रहा है।
सबसे पहले बात करते हैं 2012 के विधानसभा चुनाव की। उस समय लखनऊ पश्चिम में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद रेहान ने जीत दर्ज की थी। उन्हें कुल 49 हजार 912 वोट मिले थे। वहीं, भाजपा के सुरेश कुमार श्रीवास्तव 42 हजार 100 वोट हासिल करके दूसरे स्थान पर रहे। दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर 7 हजार 812 वोटों का था। यानी मुकाबला ऐसा था जिसमें मोहम्मद रेहान भाजपा उम्मीदवार से आगे निकलने में कामयाब रहे। इस चुनाव में कांग्रेस के श्याम किशोर शुक्ला को 36 हजार 185 वोट मिले थे, जबकि बहुजन समाज पार्टी के डॉ. सैयद शाहिद हुसैन को 27 हजार 8 वोट प्राप्त हुए थे। कुल मिलाकर, 2012 के नतीजों में समाजवादी पार्टी ने लखनऊ पश्चिम में अपनी जीत दर्ज की। लेकिन राजनीति में एक चुनाव का नतीजा अगले चुनाव की गारंटी नहीं होता। इसका उदाहरण पांच साल बाद इसी सीट पर देखने को मिला।
2017 के विधानसभा चुनाव में लखनऊ पश्चिम की तस्वीर बदल गई। इस बार भारतीय जनता पार्टी के सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने जीत दर्ज की। उन्हें 93 हजार 22 वोट मिले। दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के मोहम्मद रेहान को 79 हजार 950 वोट प्राप्त हुए।
इस तरह भाजपा के सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने सपा उम्मीदवार को 13 हजार 72 वोटों से हराया। 2012 में जो सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई थी, 2017 में उसी सीट पर भाजपा ने जीत हासिल कर ली। इस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के अरमान खान को 36 हजार 247 वोट मिले थे। ध्यान देने वाली बात यह है कि 2017 में अरमान खान बसपा के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में थे, जबकि 2022 में उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। यानी लखनऊ पश्चिम का चुनावी इतिहास सिर्फ पार्टियों की जीत-हार की कहानी नहीं है। यहां उम्मीदवारों और उनके राजनीतिक दलों की भूमिका भी चुनावी नतीजों को समझने के लिए अहम है।
अब आते हैं 2022 के विधानसभा चुनाव पर। इस चुनाव में लखनऊ पश्चिम की सीट पर मुकाबला एक बार फिर भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच रहा। भाजपा ने अंजनी कुमार श्रीवास्तव को मैदान में उतारा, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से अरमान खान चुनाव लड़े। नतीजे आए तो अरमान खान ने जीत दर्ज की। उन्हें कुल 1 लाख 24 हजार 497 वोट मिले। वहीं भाजपा के अंजनी कुमार श्रीवास्तव को 1 लाख 16 हजार 313 वोट प्राप्त हुए। दोनों उम्मीदवारों के बीच जीत का अंतर 8 हजार 184 वोटों का रहा। इस तरह 2017 में भाजपा के खाते में गई सीट 2022 में फिर समाजवादी पार्टी के पास लौट आई।
इस चुनाव में बसपा के कायम रजा खान को 10 हजार 61 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की शहाना सिद्दीकी को 2 हजार 796 वोट प्राप्त हुए। 2022 के नतीजों की खास बात यह रही कि भाजपा और सपा के दोनों प्रमुख उम्मीदवारों को एक लाख से ज्यादा वोट मिले। इससे मुकाबले की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अब अगर 2012, 2017 और 2022 के नतीजों को एक साथ देखें, तो लखनऊ पश्चिम की राजनीतिक तस्वीर कुछ इस तरह सामने आती है।
2012 में समाजवादी पार्टी के मोहम्मद रेहान ने 7 हजार 812 वोटों से जीत दर्ज की। 2017 में भाजपा के सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने 13 हजार 72 वोटों के अंतर से मुकाबला अपने नाम किया। इसके बाद 2022 में सपा के अरमान खान ने भाजपा के अंजनी कुमार श्रीवास्तव को 8 हजार 184 वोटों से हराया। यानी इन तीन विधानसभा चुनावों में दो बार समाजवादी पार्टी को जीत मिली और एक बार भाजपा ने सीट अपने नाम की। लेकिन इन आंकड़ों को केवल जीतने और हारने वाली पार्टी तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए। हर चुनाव में उम्मीदवार अलग रहे, वोटों की संख्या बदली और जीत का अंतर भी अलग रहा। यही वजह है कि लखनऊ पश्चिम के चुनावी इतिहास को समझने के लिए हर चुनाव के नतीजों को अलग-अलग देखना जरूरी है। पिछले चुनावों के आंकड़े हमें राजनीतिक बदलाव का रिकॉर्ड जरूर देते हैं, लेकिन वे अपने आप यह नहीं बताते कि अगली बार मतदाता किसे चुनेंगे।
अब बात करते हैं 2024 के लोकसभा चुनाव की। लखनऊ लोकसभा सीट पर भाजपा के राजनाथ सिंह और समाजवादी पार्टी के रविदास मेहरोत्रा के बीच मुकाबला हुआ था। जब लखनऊ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों को अलग से देखा गया, तो यहां समाजवादी पार्टी के रविदास मेहरोत्रा को भाजपा के राजनाथ सिंह से ज्यादा वोट मिले। लखनऊ पश्चिम विधानसभा खंड में रविदास मेहरोत्रा को 1 लाख 26 हजार 295 वोट मिले, जबकि राजनाथ सिंह को 1 लाख 20 हजार 625 वोट प्राप्त हुए। इस तरह इस विधानसभा क्षेत्र में रविदास मेहरोत्रा को 5 हजार 670 वोटों की बढ़त मिली। बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद सरवर मलिक को 6 हजार 337 वोट मिले। लेकिन यहां एक जरूरी बात समझनी होगी। यह विधानसभा चुनाव नहीं, बल्कि लोकसभा चुनाव के दौरान लखनऊ पश्चिम क्षेत्र में दर्ज मतदान का आंकड़ा है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार, मुद्दे और चुनाव का संदर्भ अलग हो सकता है। इसलिए 2024 के इन आंकड़ों को 2027 के विधानसभा चुनाव का पक्का संकेत मानना सही नहीं होगा। हां, इतना जरूर कहा जा सकता है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में लखनऊ पश्चिम विधानसभा खंड के भीतर सपा उम्मीदवार को भाजपा उम्मीदवार से ज्यादा वोट मिले थे। इस तथ्य को 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों के रिकॉर्ड के साथ रखकर देखा जा सकता है।
अब बात करते हैं मतदाताओं की। लखनऊ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के लिए 2026 की अंतिम मतदाता सूची से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक यहां कुल 3 लाख 82 हजार 895 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 1 लाख 99 हजार 68 पुरुष मतदाता, 1 लाख 83 हजार 810 महिला मतदाता और 17 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। यानी इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या काफी बड़ी है और हर मतदाता का वोट चुनावी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। अब सवाल उठता है कि लखनऊ पश्चिम के लोगों के लिए रोजमर्रा के कौन से मुद्दे अहम हो सकते हैं? किसी भी शहरी विधानसभा क्षेत्र की तरह यहां भी सड़क, गलियों की हालत, नाली और सीवर व्यवस्था, जलभराव, पेयजल, सफाई, ट्रैफिक, पार्किंग और सार्वजनिक परिवहन जैसे विषयों की पड़ताल जरूरी है। इसके अलावा स्थानीय कारोबार, रोजगार, सरकारी योजनाओं का लाभ और नागरिक सुविधाओं से जुड़े सवाल भी जनता की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं। इसलिए लखनऊ पश्चिम की चुनावी कहानी में सिर्फ पार्टियों की जीत-हार ही नहीं, बल्कि जनता की बुनियादी जरूरतों और स्थानीय समस्याओं को भी जगह मिलनी चाहिए।
तो यह है लखनऊ पश्चिम विधानसभा सीट का चुनावी सफर। 2012 में समाजवादी पार्टी के मोहम्मद रेहान जीते, 2017 में भाजपा के सुरेश कुमार श्रीवास्तव ने सीट पर कब्जा किया और 2022 में समाजवादी पार्टी के अरमान खान विधायक बने। वहीं, 2024 के लोकसभा चुनाव में लखनऊ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के भीतर सपा उम्मीदवार रविदास मेहरोत्रा को भाजपा के राजनाथ सिंह से ज्यादा वोट मिले। इन आंकड़ों से पिछले चुनावों की तस्वीर समझ में आती है, लेकिन आने वाले चुनाव की तस्वीर तय करने के लिए अभी कई सवालों के जवाब जरूरी हैं। स्थानीय समस्याओं पर कितना काम हुआ, जनता अपने प्रतिनिधि के कामकाज को किस नजर से देखती है, अलग-अलग उम्मीदवारों के सामने क्या मुद्दे होंगे और मतदाता किन बातों को प्राथमिकता देंगे-इन सभी पहलुओं पर नजर रखनी होगी। लखनऊ पश्चिम में पिछले तीन विधानसभा चुनावों ने अलग-अलग नतीजे दिए हैं। अब आगे की राजनीति किस दिशा में जाती है, यह आने वाले समय में सामने आएगा। फिलहाल इतना साफ है कि इस सीट का चुनावी इतिहास समझने के लिए आंकड़ों के साथ-साथ जनता के मुद्दों और स्थानीय हालात को समझना भी उतना ही जरूरी है।

No Previous Comments found.