70 एकड़ में इजरायली तकनीक से आम की बागवानी, विदेशों तक पहुंचा स्वाद...

कहते हैं खेती में सफलता सिर्फ जमीन से नहीं, बल्कि सोच से मिलती है. मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के छेना कछार गांव में किसान विजय पाल सिंह पटेल ने इस बात को सच साबित किया है. जिस जमीन को पहले कम उपजाऊ माना जाता था, वहां आज आम की बागवानी लाखों का कारोबार कर रही है और यहां उगाए गए आम विदेशों तक पहुंच रहे हैं.
 
70 एकड़ में आधुनिक आम बाग की स्थापना
 
करीब 70 एकड़ क्षेत्र में फैला यह आम का बगीचा किसी कृषि प्रयोगशाला जैसा दिखाई देता है. नदी किनारे की अनुपयोगी मानी जाने वाली जमीन पर हजारों आम के पेड़ लगाए गए हैं, जिससे यह क्षेत्र किसानों के लिए एक मिसाल बन चुका है.
 
इजरायली तकनीक से बदली खेती की तस्वीर
 
विजय पाल सिंह पटेल ने पारंपरिक खेती से अलग हटकर इजरायली अल्ट्रा हाई डेंसिटी तकनीक अपनाई, जिसमें कम जगह में अधिक पौधे लगाए जाते हैं. इस तकनीक से उत्पादन बढ़ता है और मुनाफा भी बेहतर होता है.
 
केसर आम की खास खेती और निर्यात
 
इस बगीचे में जम्बो केसर आम की खेती पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसके करीब छह हजार पौधे लगाए गए हैं. दो वर्ष पहले यहां से तैयार आमों का निर्यात दुबई और लंदन तक किया जा चुका है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनी है.
 
बैगिंग तकनीक से बेहतर गुणवत्ता
 
फलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए बैगिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे आम का रंग, चमक और सुरक्षा बनी रहती है. यह तकनीक फलों को कीटों से बचाती है और उन्हें बाजार के लिए अधिक उपयुक्त बनाती है.
 
किसानों के लिए प्रेरणा बना मॉडल
 
विजय पाल सिंह पटेल की यह पहल अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है. तकनीक आधारित बागवानी ने न केवल उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि यह साबित किया है कि सही सोच और आधुनिक तकनीक से खेती को वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।

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