व्यवस्थाओं और अव्यवस्थाओं के बीच उत्तर प्रदेश !!
महाकुंभ में संगम स्नान करने के लिए आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। हाईवे पर लोग दो घंटें की दूरी दस घंटें में तय कर पा रहे है। लाखों वाहन हर रोज जाम में फंस रहे हैं। प्रशासन जाम से लोगों को निजात दिलाने में पुरी तरह से फेल हो गया है। सूत्रों की मानें तो प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जाम को लेकर अफसरों की पेंच कसी हैं।
महाकुंभ में देश के कोने - कोने से लोग अपनी प्राइवेट गाड़ियों, रोडवेज की बसों, प्राइवेट बसों से परिवार और गांव के अन्य लोगों के साथ आ रहे है। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिदिन एक करोड़ से अधिक लोग संगम में स्नान कर रहे है। तकरीबन साठ फीसदी लोग प्राइवेट साधनों से ही मेले में आ रहे हैं। हाईवे पर जाम में फंसने की वजह से लोग कई दिनों से परेशान हैं। जाम लगने की मुख्य वजह बैरिकेंडिंंग लगाकर जगह- जगह वाहनों को रोक देना हैं।
हालात बद से बदत्तर हो गए है। रास्ते में न तो कहीं शौचालय, पानी एवं खाने- पीने का इंतजाम तक नहीं हैं। वाहनों के लिए जगह- जगह पार्किंग का इंतजाम प्रशासन ने किया जरूर हैं। लेकिन हर कोई अपने साधन से ही मेले में आने को आतुर हैं। श्रद्धालुओं के वाहनों की कतार दस किमी तक लगने लगी है। वैसे सोमवार को इसमें कमी महसूस की गई है। हर कोई जाम की वजह से परेशान हैं।
महाकुंभ की भारी भीड़ के चलते मुख्य सड़कें चोक ही गई हैं। सड़क पर कई-कई किलोमीटर जाम लगा है। बाहर से माल भरकर लाने वाले वाहन प्रयागराज बॉर्डर के बाहर रोक दिए गए हैं। ट्रक तो अंदर आ ही नहीं सकते। हर तरफ बैरिकेडिंग और रास्ते बंद होने से डाला में भरकर भी माल नहीं पहुंच पा रहा। शहर में दवा, दूध और राशन जैसी जरूरी चीजों की सप्लाई चेन टूट गई है, जिसके कारण जरूरी चीजों के दाम भी आसमान छूने लगे हैं। हर सामान महंगा हो गया है। लोग इंसुलिन तक के लिए मेडिकल स्टोर्स के चक्कर लगा रहे हैं। इस महंगाई से यहां आने वाले श्रद्धालुओं के साथ ही प्रयागराज के दुकानदार और आम लोग भी परेशान हैं।
प्रयागराज में यूं तो महाकुंभ की शुरुआत से ही काफी भीड़ है। तभी से यहां सप्लाई प्रभावित है। मौनी अमावस्या से वसंत पंचमी तक भीड़ से कुछ राहत मिली थी। इस दौरान ट्रैफिक डायवर्जन में भी कुछ ढील मिली थी। उसके बाद 6 फरवरी से फिर अचानक भीड़ बढ़नी शुरू हो गई। यह भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। इस वजह से शहर में जगह-जगह डायवर्जन है और चारपहिया वाहनों को बॉर्डर पर ही रोक दिया जा रहा है। थोक या फुटकर दुकानदारों को इन बॉर्डर से ही सामान खुद मंगाना पड़ रहा है। डाला भरकर सामान भी नहीं आ पा रहा। ऐसे में अपने साधनों से थोड़ा-थोड़ा सामान ही मंगा पा रहे हैं।
सोहबतिया बाग में जीटी रोड पर चाय बेच रहे प्रकाश चंद्र साहू ने बताया कि हमें दूध ही महंगा मिल रहा है। जो आधा किलो का पैकेट 34 रुपये का मिलता था, वह अब 50 रुपये का मिल रहा है। गैस सिलिंडर भी वह ब्लैक में ही ले रहे हैं। एजेंसी से जो सिलिंडर आ रहे हैं, वे भी यहां से 12 किमी दूर शहर की सीमा के बाहर रुके हैं। वहां से लोग लाकर यहां बेच रहे हैं। जो सिलिंडर 855 का है, वह यहां 1000 रुपये में मिला। उसके बाद भी वह 10 रुपये में ही चाय बेच रहे हैं। कप थोड़ा छोटा कर दिया है। वजह यह कि रेट बढ़ा देते हैं तो ग्राहक बिदक जाते हैं। परेड ग्राउंड के पास चाय बेच रही सविता ने भी बताया कि 68 रुपये वाला दूध का पैकेट 100 रुपये का उनको मिल रहा है।
सोहबतिया बाग में ही आद्या मेडिकल स्टोर के मालिक ने बताया कि उनके पास कई दवाइयां खत्म हो गई हैं। माल ही नहीं आ पा रहा। इस समय उनके पास इंसुलिन चार दिन से नहीं है। इसी तरह ओआरएस का घोल, विक्स की गोली और बेबी पाउडर भी खत्म हो गया है। ग्राहक आते हैं, परेशान होते हैं लेकिन हम क्या करें? उनको लौटाना पड़ता है। दारागंज में तो कुछ दुकानदारों ने झल्लाहट में एक-दो दिन अपनी दुकानें ही बंद रखीं।
दारागंज में राजेंद्र जनरल स्टोर के मालिक ने बताया कि आम जरूरत की हर चीज महंगी है। लोगों को घर के लिए दूध नहीं मिल पा रहा। जो सप्लाई है, वह महंगे दाम पर चाय, मिठाई के दुकानदार और रेस्टोरेंट वाले खरीद ले रहे हैं। उन्हें तो कुंभ के दौरान अपना बिजनेस चलाना है। जैसे ही माल आता है, खत्म हो जाता है। वह बताते हैं कि नमकीन का जो पैकेट वह 50 रुपये में लेते थे, वह 55 रुपये का उनको मिल रहा है। जिस पर एमआरपी लिखा है, उससे ज्यादा तो हम बेच नहीं सकते। इसी तरह एमआरपी वाले कई सामान हमको बिना मुनाफे के बेचने पड़ रहे हैं।
वैल्यू जनरल स्टोर के मालिक ने बताया कि नमकीन, पानी की बोतल और चिप्स के पैकेट की काफी शॉर्टेज हो रही है। जो मेले में माल बेच रहे हैं, वे तो दाम बढ़ने पर अपना मुनाफा बढ़ा देंगे। हमारी दुकानें तो यहां बाजार में स्थायी हैं। स्थायी ग्राहक हैं। दाम बढ़ाते हैं तो हमारे पूरे बिजनेस पर फर्क पड़ता है।
बेकरी चलाने वाले एसएन यादव ने बताया कि थोक में रिफाइंड ऑइल की जो एक टिन उनको 2,130 रुपये में मिल रही थी, वह अब 2,200 रुपये में मिल रही है। इसी तरह मैदा का थोक भाव पहले 1,700 रुपये बोरी था। आज का रेट 1,780 रुपये है। हम चौक से थोक में माल लाते थे। वहां भी माल की शॉर्टेज है।

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