“होनहार बिरवान के होत चिकने पात” — यह कहावत देवेश कुमार की जीवन यात्रा पर पूरी तरह सटीक बैठती है
महाराजगंज : उत्तर प्रदेश के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे देवेश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सरदार पटेल नगर नगर पालिका परिषद सिसवा बाजार महाराजगंज उत्तर प्रदेश के पास के विद्यालयों से प्राप्त की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई को कभी रुकने नहीं दिया और निरंतर आगे बढ़ते रहे। नवल्स अकैडमी गोरखपुर से स्नातक
इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने स्नातक (B.A.) हंसराज कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय सेऔर फिर अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वे मुंबई स्थित प्रतिष्ठित आरबीआई के द्वारा वित्त पोषित IGIDR पहुँचे, जहाँ उन्होंने अपने एमएससी अर्थशास्त्र के द्वारा अकादमिक आधार को और मजबूत किया।
नौकरी की शुरुआत उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में की और अमेरिकन एक्सप्रेस में डाटा एनालिस्ट असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्य किया। अच्छी सैलरी और स्थिर नौकरी होने के बावजूद, उन्होंने अपने वास्तविक लक्ष्य—उच्च शिक्षा और शोध—को प्राथमिकता देते हुए नौकरी छोड़ने का साहसिक निर्णय लिया।
इसके बाद उन्होंने ISB, मोहाली में रिसर्च असिस्टेंट के रूप में कार्य करते हुए अपने शोध कौशल को निखारा। उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम तब सामने आया जब उनका चयन अमेरिका के विश्वप्रसिद्ध ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए हुआ।
देवेश की इस सफलता के पीछे उनके पिता श्री राम अवध चौरसिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों की शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके बड़े पुत्र शिव कुमार प्रवक्ता अर्थशास्त्र दिल्ली सरकार और मजले पुत्र रमेश चंद एमबीए के उपरांत कृषि कार्य में अपना परचम लहरा रहे हैं
आज देवेश कुमार न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का कारण हैं। उनकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और सही दिशा के साथ कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है। कहीं ना कहीं देवेश कुमार अपने क्षेत्र के अन्य विद्यार्थियों के लिए आने वाले समय में प्रेरणा के स्रोत के रूप में कार्य करते रहेंगे उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता अपने गुरुजनों एवं प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से संबंधित अपने करीबियों को दिया
रिपोर्टर : मनीष कुमार कन्नौजिया

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