142.40 एकड़ सरकारी भूमि पर कथित कब्जे की जांच ने पकड़ी रफ्तार
महराजगंज : नगर पालिका परिषद सिसवा क्षेत्र की सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित मामले में जिला प्रशासन ने जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। समिति को अभिलेखों की जांच, स्थलीय निरीक्षण तथा संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर पालिका परिषद की ओर से जिला प्रशासन को भेजे गए पत्र में दावा किया गया है कि नगर क्षेत्र में कुल 142.40 एकड़ सरकारी भूमि पर कथित रूप से अवैध कब्जा किया गया है। परिषद के अनुसार, इसमें लगभग 82.40 एकड़ भूमि एक पूर्व जमींदार परिवार के नाम दर्ज है, जबकि करीब 60 एकड़ भूमि बेनामी व्यक्तियों के माध्यम से कब्जे में रखे जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, इस मुद्दे को सबसे पहले 8 अक्टूबर 2025 को नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में सभासद प्रमोद जायसवाल द्वारा उठाया गया था। मामले पर विस्तृत चर्चा के बाद बोर्ड ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए सरकारी भूमि से कथित अवैध कब्जे हटाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई कराने का निर्णय लिया था। साथ ही नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया था।
जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच समिति की अध्यक्षता अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) करेंगे। समिति में उपजिलाधिकारी निचलौल, तहसीलदार, चकबंदी अधिकारी तथा नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को सदस्य बनाया गया है। समिति राजस्व अभिलेखों का परीक्षण करने के साथ-साथ मौके का निरीक्षण करेगी और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद अपनी संस्तुति सहित रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी।
जांच का दायरा केवल 142.40 एकड़ भूमि तक सीमित नहीं रहेगा। समिति नगर सीमा में शामिल कुछ ग्राम सभा की भूमि का नाम खारिज कर महात्मा गांधी इंटर कॉलेज के नाम दर्ज किए जाने के मामले की भी पड़ताल करेगी। इसके अलावा विभिन्न सरकारी गाटा संख्याओं की भूमि पर कथित अतिक्रमण और अभिलेखीय अनियमितताओं की भी जांच की जाएगी।
जिला प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जाएगी। यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या अवैध कब्जे की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले में स्थानीय लोगों की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय होगी।
रिपोर्टर : मनीष कुमार कन्नौजिया
No Previous Comments found.