बारावफात क्यूं मनाया जाता है और किसके याद में मनाया जाता है
महराजगंज - बारावफात(जश्ने-ईद-ए-मिलाद-उन-नबी) इस्लाम धर्म के अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के जन्म और उनके निधन(वफात) दोनों की याद में बडे ही धूम धाम से मनाया जाता हैं हजरत मोहम्मद साहब का जन्म इस्लामिक कैंलेंडर के तीसरे महीने यानी रवि-उल-अव्वल की 12 तारीख को पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्म हुआ था।निधन(वफात) मान्यता के अनुसार हजरत मोहम्मद साहब का इंतकाल भी इसी तारीख को हुआ था बारावफात शब्द बारह और वफात(मृत्यु) से मिलकर बना है इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिदों और घरों में इबादत करते हैं और कुरान की तिलावत करते हैं और पैगंबर साहब की अच्छी शिक्षाओं व उनके जीवन को याद करते हैं। उस समय अरब समाज छोटे-छोटे कबीलों में बटा हुआ था खून का बदला खून लेना कबीलों का मुख्य नियम था जिसके कारण कबीलों के बीच सदियों पुरानी खूनी लड़ाइयां चलती रहती थी उस समय समाज में शराब खोरी जुआ खेलना लूटपाट और हिंसा आम बात थी महिलाओं की स्थिति बेहद ही दैनिय थी उन्हें संपत्ति का अधिकार नहीं था और कई समाजों में जीवित पुत्री को दफनाने(कन्या वध) जैसी क्रूर प्रथा प्रचलित थी अरब का एक बड़ा हिस्सा रेगिस्तान था जहां बद्दू लोग घुमंतू जीवन जीते थे और ऊंट भेड़ और बकरीया पालते थे मक्का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र बन चुका था जहां कुरैश कबीले का नियंत्रण था यहां के व्यापारी सीरिया और यमन के बीच व्यापार करते थे।
रिपोर्टर : महमूद आलम
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