मोस्ट वांटेड एक करोड़ इनामी नक्सल कमांडर हिडमा मुठभेड़ में ढेर
गडचिरोली : नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों को एक बड़ी सफलता मिली है। देश का सबसे कुख्यात और मोस्ट वांटेड नक्सली माडवी हिडमा उर्फ संतोष , जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, सोमवार की सुबह आंध्र प्रदेश के मारेडुमिल्ली जंगल क्षेत्र में हुई जबरदस्त मुठभेड़ में ढेर हो गया। मुठभेड़ में उसकी पत्नी हेमा उर्फ राजक्का भी मारी गई। दोनों के साथ कुल छह हार्डकोर माओवादी मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि हुई है।
यह मुठभेड़ त्रि-राज्य सीमा (छत्तीसगढ़–ओडिशा–आंध्र) के गहरे जंगलों में हुई, जहाँ पुलिस व ग्रेहाउंड कमांडो की संयुक्त टीम ने लंबे समय से चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान माओवादियों को घेरा।
कैसे हुआ एनकाउंटर?
सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा बलों को मारेदुमिल्ली जंगल में केंद्रीय कमिटी सदस्य हिडमा की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी।
तड़के करीब 4 बजे घेराबंदी की शुरुआत हुई। माओवादी बैकअप फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ग्रेहाउंड कमांडो की तेज कार्रवाई से उनका रास्ता बंद हो गया।
करीब 45–50 मिनट चली मुठभेड़ में छह नक्सली मारे गए। घटनास्थल से अत्याधुनिक हथियार, विस्फोटक, वायरलेस सेट और दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
हिडमा कौन था? – 25 साल से जंगल का सबसे रहस्यमय चेहरा
गांव से केंद्रीय कमिटी तक — डर और दहशत का सफर
माडवी हिडमा का जन्म छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में हुआ था।
आदिवासी (गोंड समुदाय) परिवार से आने वाले हिडमा ने मिडिल स्कूल तक पढ़ाई की।
16–17 वर्ष की उम्र में वह माओवादियों से जुड़ गया और जल्द ही संगठन का सबसे क्रूर कमांडर माना जाने लगा।
हिडमा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) बटालियन नंबर-1 का कमांडर था— जिसे नक्सलियों की “स्ट्राइक फोर्स” कहा जाता है।
वह CPI (माओवादी) की केंद्रीय कमिटी का सबसे कम उम्र का सदस्य भी था।
बड़े हमलों का मास्टरमाइंड
हिडमा पर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार 26 से अधिक बड़े हमलों का नेतृत्व करने के आरोप थे। इनमें प्रमुख—
दंतेवाड़ा हमला 2010 – जिसमें 70+ CRPF जवान शहीद हुए
झीरम घाटी नरसंहार 2013 – बड़े राजनीतिक नेताओं की हत्या
बस्तर, गढ़चिरोली, बीजापुर, सुकमा में कई IED धमाके
जवानों पर घात लगाकर किए गए हमले, बड़े पैमाने पर हथियार लूट
हिडमा अपनी क्रूर रणनीतियों के लिए कुख्यात था। बताया जाता है कि वह हर हमले की वीडियो रिकॉर्डिंग करवाता था ताकि बाद में उसका विश्लेषण कर सके।
चार-पहिया सुरक्षा कवच और जंगल की तकनीक का माहिर
हिडमा तक पहुँचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे मुश्किल माना जाता था। उसके पास—
चार-स्तरीय सुरक्षा घेरा
महिला कमांडो की विशेष टीम
बस्तर–डंडकारन्या के 200+ गांवों का गहरा नेटवर्क
आधुनिक वायरलेस और स्वदेशी IED तकनीक का तेज ज्ञान
इसी कारण वह वर्षों तक गिरफ्त से बाहर रहा।
पत्नी हेमा भी हार्डकोर कमांडर
मुठभेड़ में मारी गई हिडमा की पत्नी हेमा उर्फ राजक्का DKZ (Dandakaranya Zonal) में सक्रिय महिला यूनिट की प्रमुख सदस्य थी। वह कई हमलों और भर्ती गतिविधियों में शामिल रही थी।
सुरक्षा बलों की बड़ी सफलताः नक्सल संगठन को बड़ा झटका
हिडमा की मौत को बीते एक दशक में नक्सल विरोधी मोर्चे की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार—
PLGA बटालियन-1 की कमान टूट गई
केंद्रीय कमिटी का एक बड़ा रणनीतिक चेहरा खत्म
बस्तर–सुकमा में माओवादियों की मनोबल गिरावट संभावित
दक्षिण बस्तर की गतिविधियों में भारी कमी आ सकती है
आंध्र, छत्तीसगढ़ और ओडिशा की पुलिस ने संयुक्त रूप से इलाके में सर्च ऑपरेशन और तेज कर दिया है।
स्थानीय स्तर पर प्रतिक्रिया
गडचिरोली, बीजापुर, सुकमा और आस-पास के नक्सल प्रभावित इलाकों में इस खबर से राहत की भावना दिखी है। स्थानीय सुरक्षाबलों ने इसे वर्षों की मेहनत का परिणाम बताया है।
रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम

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