'दिखावा नहीं, सिर्फ विकास!' : विक्रम राउत की आंधी में विपक्ष पस्त; जिला परिषद चुनाव में मतदाताओं का भारी समर्थन

छत्रपती संभाजीनगर : जिला परिषद चुनाव का प्रचार अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आ रही है, चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। इस बीच, विक्रम राउत का नाम एकतरफा लहर पैदा करता नजर आ रहा है। प्रचार के लिए अब केवल दो दिन बचे हैं और मतदाताओं का झुकाव स्पष्ट रूप से राउत की ओर दिखाई दे रहा है।
बाहरी उम्मीदवार बनाम स्थानीय अनुभव
इस चुनाव में 'ठाकरे गुट' द्वारा स्थानीय चेहरों को नजरअंदाज कर बाहरी उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने से युवाओं और स्थानीय मतदाताओं में भारी आक्रोश है। मतदाताओं का कहना है कि हमें अपने बीच का नेता चाहिए, कोई बाहरी व्यक्ति नहीं। इसी नाराजगी का सीधा लाभ विक्रम राउत को मिल रहा है, जिनकी पहचान एक अनुभवी और जमीन से जुड़े नेता के रूप में है।

विक्रम राउत के पक्ष में प्रमुख बिंदु:

1.काम करने की जबरदस्त क्षमता: मतदाताओं का मानना है कि विक्रम राउत में प्रशासन से काम खींचकर लाने की असली ताकत है।

2.दिखावे से दूरी: "सोशल मीडिया पर चमकने के लिए काम करना मेरी फितरत नहीं," यह राउत का मूल मंत्र रहा है। जनता उनके काम को सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि धरातल पर देखती है।
हर समाज के सारथी: समाज के हर वर्ग के लिए आधी रात को भी दौड़ने वाले नेता के रूप में उनकी एक विशेष पहचान बनी है।

विक्रम :
.बुनियादी सुविधाओं पर जोर: "शिक्षा और स्वास्थ्य हमारी प्राथमिकता"
क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए विक्रम राउत ने कहा, "आज ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की स्थिति दयनीय है, स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं और चलने लायक सड़कें तक नहीं हैं। असली विकास तब माना जाएगा जब हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और हर बीमार को सही इलाज मिलेगा। हमने किसानों की समस्याओं के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है, लेकिन हमने कभी इसका सोशल मीडिया पर स्टंट नहीं किया।"
मतदाताओं का मूड
स्थानीय लोगों का कहना है कि विक्रम राउत ने कभी भी केवल वोट बैंक के लिए राजनीति नहीं की। उनके पास राजनीति का लंबा अनुभव है और वे जानते हैं कि समस्याओं का समाधान कैसे करना है। इसी भरोसे के चलते आज उनका पलड़ा भारी नजर आ रहा है।

निष्कर्ष: चुनाव प्रचार के अंतिम दो दिनों में विक्रम राउत ने अपनी विकासवादी सोच और ठोस अनुभव के दम पर बढ़त बना ली है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस 'राउत लहर' का सामना कैसे करता है।

रिपोर्टर : शिवा 

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