पुणे सुरक्षा गार्ड को अपने ही अपहरण का नाटक कर परिवार से 2 लाख रुपये वसूलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया
हवेली : एक चौंकाने वाली घटना में बानेर पुलिस ने 21 वर्षीय एक सुरक्षा गार्ड को गिरफ्तार किया है, जिसने कथित तौर पर अपने ही अपहरण का नाटक रचकर अपने परिवार से 2 लाख रुपये की फिरौती वसूलने की कोशिश की।
आरोपी की पहचान 21 वर्षीय मनीषकुमार जमनाप्रसाद द्विवेदी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से प्रयागराज, उत्तर प्रदेश का निवासी है और पुणे के बानेर क्षेत्र में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत था।
पुलिस के अनुसार, यह मामला तब शुरू हुआ जब मनीषकुमार को 7 फरवरी को अपने गृह नगर लौटना था। उसने पहले फोन पर अपनी यात्रा की पुष्टि की, लेकिन बाद में उसका मोबाइल फोन बंद हो गया।
स्थिति 10 फरवरी को तब गंभीर हो गई जब उसके पिता और भाई को मनीषकुमार के नंबर से व्हाट्सऐप पर एक धमकी भरा संदेश मिला। संदेश में लिखा था:
“अगर अपने बेटे को जिंदा देखना चाहते हो तो 6 घंटे में 2 लाख रुपये की व्यवस्था करो। पुलिस को बताने की कोशिश की तो उसे मार दिया जाएगा। अगर 6 घंटे में पैसे नहीं मिले तो तुम्हारे भाई को मार देंगे।”
अपने भाई की सुरक्षा को लेकर चिंतित शिकायतकर्ता तुरंत पुणे पहुंचे और 11 फरवरी को बानेर पुलिस स्टेशन में औपचारिक प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक चंद्रशेखर सावंत और पुलिस निरीक्षक (अपराध) अलका सराग ने तुरंत एक विशेष जांच दल का गठन किया।
हालांकि, तकनीकी विश्लेषण और जमीनी खुफिया जांच में जल्द ही कथित अपहरण की कहानी में कई खामियां सामने आने लगीं। सीसीटीवी फुटेज और प्रारंभिक जांच से पता चला कि मनीषकुमार शहर में अकेले ऑटो-रिक्शा में घूमता हुआ देखा गया। इसके अलावा, 9, 10 और 12 फरवरी को उसे महालुंगे की एक आवासीय सोसायटी में स्वेच्छा से दोस्तों से मिलते हुए भी देखा गया। उसकी सामान्य शारीरिक भाषा और स्वतंत्र गतिविधियों से स्पष्ट हुआ कि उसका अपहरण नहीं हुआ था।
जांचकर्ताओं ने उसकी डिजिटल गतिविधियों का पता लगाया और पाया कि आरोपी पुणे से अहमदाबाद, गुजरात गया था और अंततः अपने गृह नगर प्रयागराज लौट गया।
एक विशेष पुलिस टीम, जिसमें सहायक पुलिस निरीक्षक (एपीआई) कैलास डाबरेव तथा पुलिस कर्मी बाबासाहेब आहेर और किसान शिंगे शामिल थे, को उत्तर प्रदेश भेजा गया। टीम ने मनीषकुमार को ढूंढ निकाला, उसके परिजनों को विश्वास में लिया और 23 फरवरी को उसे पुणे वापस ले आई।
पूछताछ के दौरान मनीषकुमार ने अपराध कबूल कर लिया। उसने स्वीकार किया कि उसने अपने पिता और भाई से पैसे ऐंठने के लिए पूरे नकली अपहरण की साजिश रची थी। पुलिस ने बताया कि परिवार ने यह मानकर कि वह तत्काल खतरे में है, ऑनलाइन 10,000 रुपये की अग्रिम फिरौती राशि भी भेज दी थी।
बानेर पुलिस ने आधिकारिक रूप से मनीषकुमार को गिरफ्तार कर लिया है और वसूली गई फिरौती राशि भी बरामद कर ली है।
इस अपराध का सफल खुलासा अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (पूर्व क्षेत्र) मनोज पाटिल, पुलिस उपायुक्त (जोन-4) रजनीकांत चिलुमुला, सहायक पुलिस आयुक्त (खड़की डिवीजन) विठ्ठल डाबड़े और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक पी.आई. चंद्रशेखर सावंत के मार्गदर्शन में किया गया। फील्ड टीम में गणेश रायकर, गणेश गायकवाड़, संदीप निखले, अतुल इंगले, प्रदीप खारत, शरद राउत, गजानन अवतारिक और स्वप्निल मराठे शामिल थे।
रिपोर्टर : यश सोलंकी

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