गुरु धनोरा सजा में 'छोटे तलाठी' का आतंक; सरकारी कुर्सी तलाठी की, लेकिन रिमोट कंट्रोल सेतु संचालक के हाथ में

छत्रपती संभाजीनगर : गंगापुर तहसील के गुरु धनोरा में इन दिनों राजस्व विभाग का एक अजीबोगरीब कामकाज देखने को मिल रहा है। यहाँ नियुक्त तलाठी केवल नाम के लिए रह गए हैं, जबकि असल में गाँव का सारा कामकाज एक 'छोटा तलाठी' (सेतु केंद्र संचालक) चला रहा है। इस चर्चा ने पूरी तहसील में जोर पकड़ लिया है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर, इस सेतु संचालक ने तलाठी के अधिकारों पर जैसे कब्जा ही कर लिया है।

सरकारी डेटा 'छोटे तलाठी' की जेब में?
सरकारी नियमानुसार, तलाठी का लॉगिन आईडी और पासवर्ड अत्यंत गोपनीय होता है। लेकिन गुरु धनोरा में तस्वीर इसके उलट है। महत्वपूर्ण डेटा, फेरफार (म्युटेशन) प्रविष्टियाँ और ऑनलाइन प्रणाली का पूरा नियंत्रण इस निजी सेतु संचालक को सौंप दिया गया है। इससे यह गंभीर प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या किसानों की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित है? किसानों का आरोप है कि जो काम सामान्य तौर पर तलाठी कार्यालय के चक्कर काट कर भी नहीं होता, वह काम इस 'छोटे तलाठी' के साथ 'लेन-देन' की सेटिंग करने पर कुछ ही मिनटों में हो जाता है।

सेतु केंद्र से ही चल रही है 'सजा' (सर्कल)!
किसानों को अक्सर तलाठी कार्यालय से खाली हाथ लौटना पड़ता है क्योंकि 'साहब' नदारद रहते हैं। लेकिन यदि आप संबंधित सेतु केंद्र पर जाएं, तो वहीं सारी सरकारी फाइलें और दस्तावेज देखने को मिल जाते हैं। सेतु संचालक का सीधा जवाब होता है, "साहब ने ये सब मेरे पास देने को कहा है।" इस 'प्राइवेट' कामकाज की वजह से आम किसान आर्थिक शोषण का शिकार हो रहा है।

बार-बार खबरें छपने के बाद भी दबंगई कायम
इससे पहले भी मीडिया ने इस तलाठी और उनके निजी सहायक के कारनामों पर प्रकाश डाला था। खबरें प्रकाशित होने के बावजूद तलाठी की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं आया है। इसके विपरीत, 'छोटे तलाठी' का प्रभाव और अधिक बढ़ता जा रहा है।

अब तहसीलदार क्या कार्रवाई करेंगे?
तलाठी का यह निजी अवतार और सेतु संचालक का हस्तक्षेप अब सबके सामने आ चुका है। इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर माननीय तहसीलदार अब क्या कठोर कदम उठाएंगे? इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

क्या इस निजी व्यक्ति को हटाया जाएगा?

क्या संबंधित तलाठी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?

या फिर 'तारीख पे तारीख' देकर मामले को दबा दिया जाएगा?

ऐसे कई सवाल अब गुरु धनोरा के किसान पूछ रहे हैं।

रिपोर्टर : शिवाजी 

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