कामबंद आंदोलन पर कार्रवाई की चेतावनी लेकिन अधिकारियों को छूट?आलापल्ली वन परिक्षेत्र में दोहरे मापदंडों पर सवाल
गडचिरोली : आलापल्ली वन परिक्षेत्र में चल रहे कामबंद आंदोलन के बीच वन विभाग की कार्रवाई और प्रशासनिक रुख को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर आंदोलनरत वनकर्मियों को सख्त चेतावनी दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर विवाद के केंद्र में रहे वन परिक्षेत्र अधिकारी को राहत मिलने से “दोहरे मापदंड” के आरोप तेज हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वनरक्षक एस.सी. रंगुवार, पी.एच. बुद्धावार सहित 15 वनकर्मियों ने 20 अप्रैल को दिए गए ज्ञापन में वन परिक्षेत्र अधिकारी गौरव गणवीर के खिलाफ जांच के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने का आरोप लगाया था। इसके विरोध में 27 अप्रैल से अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन शुरू किया गया।
इस बीच उप वनसंरक्षक दिपाली तलमले द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ महाराष्ट्र सिविल सेवा (शिस्त एवं अपील) नियम, 1979 के तहत आरोप तय कर जांच प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, पत्र में उन्हें सस्पेंड या सक्ती की छुट्टी पर भेजने की सिफारिश का उल्लेख होने के बावजूद, वास्तविकता में उन्हें अर्जित अवकाश (Earned Leave) मंजूर किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे वन विभाग के भीतर उच्च स्तर पर संरक्षण मिलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वनाग्नि सीजन में अधिकारी छुट्टी पर — उठे गंभीर सवाल
वर्तमान में वनाग्नि (जंगल में आग) का अत्यंत संवेदनशील समय चल रहा है। ऐसे में वन परिक्षेत्र अधिकारी का अवकाश पर जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। बताया जा रहा है कि हाल ही में हुए वनाग्नि और शिकार मामलों के नमूने अभी तक प्रयोगशाला नहीं भेजे गए हैं, जबकि संबंधित अधिकारी 25 अप्रैल से अवकाश पर हैं।
इस स्थिति से वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि “क्या यह वनाग्नि का समय नहीं है?”
⚖️ नियमों के पालन पर उठे प्रश्न
विशेषज्ञों के अनुसार, महाराष्ट्र सिविल सेवा (वर्तणूक) नियम, 1979 के तहत कर्मचारियों का हड़ताल या आंदोलन में शामिल होना नियमों का उल्लंघन है।
लेकिन साथ ही प्रशासनिक निष्पक्षता, जवाबदेही और समान कार्रवाई भी उतनी ही आवश्यक मानी जाती है।
इसके अलावा, भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत वन क्षेत्र में घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई और जांच संबंधित अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी है। ऐसे संवेदनशील समय में अधिकारी का अवकाश पर जाना इन जिम्मेदारियों के विपरीत माना जा रहा है।
“कर्मचारियों पर सख्ती, अधिकारियों को राहत?”
वन विभाग ने आंदोलनरत कर्मचारियों को तत्काल काम पर लौटने के निर्देश देते हुए अनुपालन न करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है।
हालांकि, दूसरी ओर संबंधित अधिकारी को अवकाश दिए जाने के कारणों पर कोई स्पष्टता सामने नहीं आई है।
इसी वजह से कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच नाराजगी बढ़ रही है और यह सवाल उठ रहा है कि “क्या नियम केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही लागू होते हैं?”
संघर्ष बढ़ने के आसार
पूरे घटनाक्रम के चलते आलापल्ली वन परिक्षेत्र में प्रशासन और कर्मचारियों के बीच टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस विवाद का जल्द पारदर्शी और निष्पक्ष समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका सीधा असर वन संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा पर पड़ सकता है।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार

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