नक्सलमुक्त गढ़चिरौली में तेंदुपत्ता मजदूरों की उम्मीदें बढ़ीं — इस बार मिलेगा सही मेहनताना ?

गडचिरोली : महाराष्ट्र के गडचिरोली जिला में इस वर्ष एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय से माओवादी संगठन के प्रभाव में रहने वाला यह इलाका अब काफी हद तक नक्सलमुक्त हो चुका है। इसका सीधा असर यहां के हजारों तेंदुपत्ता मजदूरों पर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

पिछले करीब 40 वर्षों से नक्सल गतिविधियों के कारण तेंदुपत्ता व्यापार पर उनका दबदबा रहा। तेंदुपत्ता ठेकेदारों से बड़े पैमाने पर वसूली की जाती थी, जिसका असर सीधे मजदूरों को मिलने वाले प्रति शेकड़ा (100 पत्तों का बंडल) भाव पर पड़ता था। इतना ही नहीं, ‘कच्ची गुंटी’ के नाम पर भी अवैध वसूली की जाती थी, जिससे आदिवासी और अन्य श्रमिक वर्ग को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता था।
सूत्रों के अनुसार, हर साल करोड़ों रुपये तेंदुपत्ता ठेकेदारों के माध्यम से नक्सली संगठनों तक पहुंचते थे। इसी फंड के सहारे संगठन अपनी गतिविधियां संचालित करता था। कई मामलों में यह भी सामने आया कि नक्सली कमांडर इस रकम के साथ भागकर पड़ोसी राज्य तेलंगाना में आत्मसमर्पण करते थे।
 मजदूरों में खुशी की लहर
इस साल जिले के नक्सलमुक्त होने के कारण तेंदुपत्ता मजदूरों में उत्साह का माहौल है। उनका मानना है कि जो पैसा अब तक वसूली में चला जाता था, वह अब सीधे मजदूरों को मिलना चाहिए। मजदूरों ने मांग की है कि इस बार प्रति शेकड़ा तेंदुपत्ता का भाव अधिक से अधिक निर्धारित किया जाए।
नई चिंता भी उभरकर सामने आई
हालांकि, कुछ गांवों से यह आशंका भी जताई जा रही है कि स्थानीय ग्राम पंचायत पदाधिकारी और कुछ गांव प्रमुख ठेकेदारों के साथ मिलकर मजदूरों के हितों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में पारदर्शिता बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
जंगल में आग पर नियंत्रण, लेकिन उत्पादन प्रभावित
इस बार वन विभाग द्वारा जंगलों में आग लगने की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण रखा गया। हालांकि, इसका एक दूसरा पहलू भी सामने आया है—तेंदुपत्ता की गुणवत्ता और मात्रा पर इसका असर पड़ा है, जिससे उत्पादन अपेक्षा के अनुसार नहीं हो पाया।
मजदूरों की मुख्य मांग
तेंदुपत्ता मजदूरों का स्पष्ट कहना है कि वर्षों से ठेकेदार नक्सलियों के नाम पर कम भाव देते रहे हैं। अब जब क्षेत्र में शांति स्थापित हो रही है, तो मजदूरों को उनके श्रम का उचित मूल्य मिलना चाहिए।
 निष्कर्ष:
गढ़चिरौली के तेंदुपत्ता मजदूर इस वर्ष नई उम्मीदों के साथ सीजन की शुरुआत कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन, ठेकेदार और स्थानीय तंत्र मिलकर मजदूरों को उनका हक दिलाने में कितना सफल होते हैं।

रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम 

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