अहेरी नगर पंचायत में सत्ताधारियों की मनमानी; भाजपा पदाधिकारियों और नगरसेवकों का पत्रकार परिषद में सीधा हमला
गडचिरोली : अहेरी नगर पंचायत में इन दिनों सत्ताधारियों की मनमानी और हठधर्मिता चरम पर पहुंच गई है, जिसके कारण शहर में करोड़ों रुपये के विकास कार्य ठप पड़े हैं। इतना ही नहीं, तत्कालीन मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis तथा तत्कालीन राजस्व मंत्री Chandrashekhar Bawankule द्वारा मंजूर निधि से होने वाले विकास कार्यों में भी जानबूझकर अड़चनें पैदा की जा रही हैं। यह गंभीर आरोप भाजपा जिला उपाध्यक्ष संतोष मद्दीवार ने पत्रकार परिषद में लगाया।
पत्रकार परिषद में भाजपा पदाधिकारियों ने नगराध्यक्ष रोजा करपेत के कथित अवैध कार्यों पर तीखा हमला बोला। उनका आरोप है कि नगराध्यक्ष ने नगर पंचायत की पूर्व अनुमति लिए बिना अपने नए मकान का निर्माण नियमों को ताक पर रखकर कराया है। इस गंभीर नियम उल्लंघन को लेकर उन्हें पद से हटाने और अयोग्य घोषित करने की मांग करते हुए जिलाधिकारी को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी गई है। भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही जिलाधिकारी से मुलाकात कर दस्तावेजों सहित औपचारिक शिकायत दर्ज कराएगा।
भाजपा नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि पड़ोसी के नाम स्वीकृत बोरवेल को अपने घर के आंगन में स्थापित कर उसके चारों ओर अवैध रूप से कंपाउंड वॉल का निर्माण कराया गया है। इस मामले को लेकर भी भाजपा नगरसेवकों और पदाधिकारियों ने गंभीर सवाल उठाए।
पत्रकार परिषद में भाजपा नेताओं ने नगराध्यक्ष के शिवसेना में शामिल होने पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि नगराध्यक्ष ने कभी भी पार्टी के कार्यक्रमों या विचारधारा को महत्व नहीं दिया। शिवसेना में उनका प्रवेश केवल अपने ऊपर संभावित अपात्रता की कार्रवाई से बचने और पद बचाने के उद्देश्य से किया गया “सुविधाजनक राजनीति” का हिस्सा है।
भाजपा पदाधिकारियों ने नगराध्यक्ष के गांव में पिछले चार वर्षों से टैंकरों के माध्यम से पानी सप्लाई होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि यदि नगराध्यक्ष इतनी प्रभावशाली नेता हैं, तो अपने गांव के लिए स्थायी जलापूर्ति योजना क्यों नहीं ला सकीं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि स्वयं कोई नया विकास कार्य मंजूर नहीं करा पाने के बावजूद, भाजपा सरकार द्वारा स्वीकृत विकास कार्यों के खिलाफ झूठी शिकायतें कर उन्हें रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि स्थायी समिति के सदस्य एवं सभापति विलास सिडाम ने संबंधित विकास कार्यों को समिति द्वारा विधिवत मंजूरी दिए जाने का लिखित पत्र भी दिया है। ऐसे में सवाल उठता है कि सच कौन बोल रहा है — सभापति या नगराध्यक्ष? यदि स्थायी समिति ने मंजूरी दी और राजस्व मंत्री ने निधि उपलब्ध कराई, तो फिर इन विकास कार्यों के खिलाफ शिकायतें क्यों की जा रही हैं?
भाजपा पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि झूठी शिकायतों की राजनीति करना नगराध्यक्ष का पुराना तरीका रहा है। उन्होंने दावा किया कि पूर्व प्रभारी मुख्याधिकारी दिनकर खोत के खिलाफ भी पहले अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत झूठी शिकायत दर्ज कराई गई थी। बाद में उस मामले का क्या हुआ, इसकी जानकारी जनता को कभी नहीं दी गई। कुछ संगठनों को गुमराह कर उनका इस्तेमाल किए जाने का भी आरोप लगाया गया।
भाजपा नेताओं ने कहा कि नगर पंचायत में चल रहे इस कथित अव्यवस्था, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के अपमान और विकास कार्यों में बाधा डालने के विरोध में जल्द ही भाजपा का प्रतिनिधिमंडल जिले के पालकमंत्री से मुलाकात कर आधिकारिक शिकायत करेगा और अहेरी की जनता को न्याय दिलाने का प्रयास करेगा।
इस पत्रकार परिषद में भाजपा जिला उपाध्यक्ष संतोष मद्दीवार, भाजपा गटनेता शालिनीताई पोहणेकर, नगरसेवक अमोल गुडेलीवार तथा नगरसेवक विकास उइके प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इस पत्रकार परिषद के बाद अहेरी के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
रिपोर्टर : चंद्रशेखर पुलगम

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