प्रशासनिक मेहरबानी या आंखों पर पट्टी? इंद्रावती नदी में अवैध रेत खनन पर कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित!
गढ़चिरौली : गढ़चिरौली जिले के अहेरी तहसील अंतर्गत महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर बहने वाली इंद्रावती नदी के दामरंचा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध रेत उत्खनन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पोकलेन मशीनों की मदद से नदीपात्र से लगातार रेत निकाले जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर स्थानीय नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है।
‘जनकल्याण समाजोन्नती अन्याय, भ्रष्टाचार निवारण समिति’ द्वारा उपविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर इस गंभीर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की गई थी। हालांकि, शिकायत के बाद भी प्रशासन द्वारा केवल औपचारिकता निभाने का आरोप लगाया जा रहा है।
कार्रवाई का दिखावा, अवैध खनन का खेल जारी
स्थानीय सूत्रों के अनुसार प्रशासन ने कार्रवाई का केवल दिखावा किया है। अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नदीपात्र से कितनी मात्रा में अवैध रेत निकाली गई, न ही इसकी कोई अधिकृत माप-जोख की गई है। जिस रेत भंडार पर कार्रवाई का दावा किया गया, उस पर कितना जुर्माना लगाया गया, इसकी भी कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
ग्रामस्थों का आरोप है कि जिस रेत भंडार को प्रशासन ने जब्त या सील करने का दावा किया था, उसी भंडार से संबंधित ठेकेदार आज भी बेखौफ होकर रेत का उपयोग कर रहा है। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या सबूत मिटाने के लिए मानसून का इंतजार कर रहा है प्रशासन?
क्षेत्र के नागरिकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि प्रशासन जानबूझकर समय निकाल रहा है। लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होते ही इंद्रावती नदी में बाढ़ आएगी और अवैध उत्खनन के सभी भौतिक प्रमाण स्वतः नष्ट हो जाएंगे। ऐसे में यह संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि कहीं ठेकेदार को बचाने के लिए ही कार्रवाई में देरी तो नहीं की जा रही है।
पुल निर्माण का ठेका मिला तो क्या कानून से भी मिली छूट?
बताया जा रहा है कि संबंधित ठेकेदार क्षेत्र में अंतरराज्यीय पुल निर्माण का कार्य कर रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुल निर्माण का ठेका मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सरकारी राजस्व की चोरी और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर अपराधों को नजरअंदाज कर दिया जाए।
नागरिकों का आरोप है कि इस अवैध खनन से शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है। साथ ही, इस पूरे प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
‘बड़े संरक्षण’ की चर्चा, जनता में बढ़ रहा आक्रोश
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोरों पर है कि संबंधित ठेकेदार को कुछ प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक लोगों का संरक्षण प्राप्त है। नागरिकों का कहना है कि यदि कानून सभी के लिए समान है, तो फिर प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
कुछ लोगों ने व्यंग्यात्मक रूप से कहा कि यदि प्रशासन बड़े लोगों पर कार्रवाई नहीं कर सकता, तो आम नागरिकों को भी अपने घरों के निर्माण के लिए नदी से रेत निकालने की खुली अनुमति दे देनी चाहिए।
जनआंदोलन की चेतावनी
जनकल्याण समाजोन्नती समिति के जिलाध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता संतोष ताटीकोंडावार ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अवैध रेत खनन में शामिल ठेकेदार तथा उसे संरक्षण देने वाले अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, अवैध रेत और वाहनों को जब्त नहीं किया गया, तो लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन छेड़ा जाएगा।
«"प्रशासन ने यदि इस गंभीर मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, तो जनता को सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।"
— संतोष ताटीकोंडावार, जिलाध्यक्ष, जनकल्याण समाजोन्नती समिति एवं सामाजिक कार्यकर्ता»
अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं निगाहें
इंद्रावती नदी में कथित अवैध रेत उत्खनन और प्रशासन की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब पूरे अहेरी क्षेत्र की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में ठोस कदम उठाता है या फिर अवैध रेत खनन का यह खेल यूं ही जारी रहता है।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार
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