SPPU मेस में फिर मिला खाने में कीड़ा, छात्रों ने निगरानी समिति भंग करने की उठाई मांग

हवेली : सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय (SPPU) में छात्र संगठनों ने विश्वविद्यालय की मेस और कैंटीन सतर्कता समिति को भंग करने की मांग की है। छात्रों का आरोप है कि हाल ही में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा कार्रवाई किए जाने के बावजूद खाद्य सुरक्षा से जुड़े उल्लंघन लगातार जारी हैं।

यह मांग उस समय उठी है जब विश्वविद्यालय की मेस में परोसे गए भोजन में कीड़े मिलने की नई शिकायतें सामने आई हैं। इससे कुछ ही दिन पहले FDA ने निरीक्षण कर एक मेस संचालक का लाइसेंस रद्द कर दिया था, क्योंकि छात्रों को अस्वच्छ भोजन परोसे जाने की शिकायतें मिली थीं।

विश्वविद्यालय छात्र संघर्ष कृती समिति के अनुसार, छात्रों ने लंबे समय से हॉस्टल और कैंटीन में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई है। कई मामलों में भोजन में कीड़े, कीट और मच्छर मिलने के आरोप लगाए गए हैं।

विश्वविद्यालय ने मेस और कैंटीन की निगरानी के लिए “मेस एंड कैंटीन विजिलेंस एंड मॉनिटरिंग कमेटी” का गठन किया है, जिसे निरीक्षण करने, नोटिस जारी करने, ठेके रद्द करने की सिफारिश करने और दोषी ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के अधिकार प्राप्त हैं। हालांकि, छात्र संगठनों ने समिति की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसके अस्तित्व के बावजूद शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।

17 जून को छात्र प्रतिनिधियों ने समिति की अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर खाद्य गुणवत्ता संबंधी शिकायतों पर की गई कार्रवाई का विवरण मांगा था। छात्रों का आरोप है कि अब तक उन्हें कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है।

हालिया शिकायतों में 19 जून की घटना शामिल है, जब एक छात्रा को हॉस्टल मेस में रात के भोजन के दौरान परोसी गई पावभाजी में कीड़ा मिला। छात्रों का दावा है कि आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद भोजन तुरंत नहीं बदला गया। इसके अलावा, 23 जून को जी-9 मेस में नाश्ते के दौरान परोसी गई सब्जी में भी कीड़ा मिलने की शिकायत सामने आई।

छात्र संगठनों ने यह भी आरोप लगाया कि छात्राओं के हॉस्टल की मेस पहले निर्धारित मानकों के अनुसार दो सब्जियों के बजाय केवल एक सब्जी परोस रही थी। यह व्यवस्था बार-बार आपत्ति जताने के बाद ही सुधारी गई।

लगातार सामने आ रही शिकायतों का हवाला देते हुए छात्रों ने सवाल उठाया है कि क्या नियमित निरीक्षण, आकस्मिक जांच और खाद्य गुणवत्ता की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा रही है। उन्होंने कैंपस में खाद्य सेवाओं की निगरानी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।

छात्र संघर्ष कृती समिति ने कहा है कि वह 24 जून को कुलपति को ज्ञापन सौंपकर निगरानी समिति को भंग करने की मांग करेगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो छात्रों के स्वास्थ्य और हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किया जाएगा।

समिति के SPPU इकाई अध्यक्ष अभिषेक शेलकर ने कहा, “16 जून को FDA की कार्रवाई के बाद छात्रों को उम्मीद थी कि भोजन संबंधी अनियमितताएं रुक जाएंगी। लेकिन 19 और 23 जून की घटनाएं दर्शाती हैं कि निगरानी व्यवस्था प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही है। जहां छात्रों के स्वास्थ्य से समझौता हो रहा हो, वहां जवाबदेही तय होना आवश्यक है।”

रिपोर्टर : यश सोलंकी

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.