"विकास की बातें नहीं, पहले सुरक्षित सड़कें दीजिए" : सामाजिक कार्यकर्ता संतोष ताटीकोंडावार का तीखा हमला
गडचिरोली : गडचिरोली जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-353C (आलापल्ली–सिरोंचा मार्ग) का निर्माण कार्य शुरू हुए छह वर्ष बीत जाने के बावजूद आज तक पूरा नहीं हो पाया है। जिले के प्रमुख संपर्क मार्गों में शामिल इस राष्ट्रीय राजमार्ग की बदहाल स्थिति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता संतोष ताटीकोंडावार ने सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोलते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जारी प्रेस विज्ञप्ति में ताटीकोंडावार ने कहा कि एक ओर सरकार गडचिरोली जिले में उद्योग, स्टील हब और विकास परियोजनाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले के नागरिक आज भी सुरक्षित और सुगम सड़क सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि विधानसभा के चल रहे अधिवेशन में जिले के विकास को लेकर अनेक घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि "जनता को विकास के सपने नहीं, बल्कि सुरक्षित और जीवनरक्षक सड़कें चाहिए।"
100 किलोमीटर का मार्ग अब भी अधूरा
संतोष ताटीकोंडावार ने बताया कि लगभग 100 किलोमीटर लंबे आलापल्ली–सिरोंचा राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य पिछले छह वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। इस मार्ग से जुड़े सैकड़ों गांवों के हजारों नागरिक प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाती है। जगह-जगह बने बड़े गड्ढे, क्षतिग्रस्त पुल और कीचड़युक्त मार्ग के कारण दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है, जिससे आम नागरिकों, विद्यार्थियों, मरीजों और व्यापारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
"क्या किसी बड़ी दुर्घटना के बाद जागेगी सरकार?"
ताटीकोंडावार ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या सरकार और जनप्रतिनिधि किसी बड़ी दुर्घटना या निर्दोष नागरिक की जान जाने के बाद ही इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान देंगे? उन्होंने कहा कि गडचिरोली जिले के पालकमंत्री स्वयं मुख्यमंत्री होने के बावजूद जिले की यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता और उदासीनता का भी स्पष्ट उदाहरण है।
ज्ञापन और आंदोलनों के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
सामाजिक कार्यकर्ता संतोष ताटीकोंडावार ने कहा कि स्थानीय नागरिकों द्वारा कई बार ज्ञापन सौंपे गए, आंदोलन किए गए और लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाई गईं, लेकिन प्रशासन और सरकार ने लगातार उपेक्षापूर्ण रवैया अपनाया है।
उन्होंने बताया कि वे स्वयं भी वर्षों से उपोषण, आंदोलन और जनजागरण अभियानों के माध्यम से जनता की आवाज शासन तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद यदि सरकार इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं देती है, तो इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की विफलता माना जाएगा।
सरकार के समक्ष रखी गई प्रमुख मांगें
संतोष ताटीकोंडावार ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं—
1. राष्ट्रीय राजमार्ग-353C के आलापल्ली–सिरोंचा मार्ग का निर्माण कार्य तत्काल युद्धस्तर पर पूर्ण किया जाए।
2. आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी एवं त्वरित उपाय किए जाएं।
3. निर्माण कार्य में देरी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
जनआंदोलन की चेतावनी
अंत में संतोष ताटीकोंडावार ने चेतावनी देते हुए कहा कि गडचिरोली की जनता का धैर्य अब समाप्त होता जा रहा है। केवल विकास की घोषणाएं पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विकास कार्य धरातल पर दिखाई देने चाहिए। यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में व्यापक जनआंदोलन और तीव्र लोकतांत्रिक संघर्ष छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित जनप्रतिनिधियों की होगी।
रिपोर्टर : संजय यमसलवार
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