श्रेय के लिए विपक्ष की अनदेखी?"

देऊळगाव राजा  : देऊळगाव राजा नगर परिषद द्वारा नव-निर्मित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के नामकरण समारोह को लेकर स्थानीय राजनीति गरमा गई है। नगर विकास आघाड़ी के नगरसेवकों एवं महिला नगरसेविकाओं ने पूर्व में नगराध्यक्ष और मुख्याधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि इस शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का नाम महाराष्ट्र के दिवंगत नेता एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री स्व. अजित दादा पवार के नाम पर रखा जाए। इस मांग को लेकर लगातार पत्राचार और अनुवर्ती कार्रवाई किए जाने के बावजूद प्रशासन और सत्ताधारी पक्ष द्वारा लंबे समय तक टालमटोल किए जाने का आरोप लगाया गया था।आखिरकार 23 जुलाई 2026 को आयोजित नगर परिषद की मासिक बैठक में संबंधित नामकरण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। हालांकि, उसी बैठक के दौरान शहर में लंबित विकास कार्यों के विरोध में नगर विकास आघाड़ी के नगरसेवकों और महिला नगरसेविकाओं ने बैठक का बहिष्कार कर नगर परिषद के मुख्य प्रवेश द्वार पर आंदोलन किया था। उस समय पत्रकारों के सवालों के जवाब में नगराध्यक्ष ने कहा था कि, "सत्तापक्ष और विपक्ष में कोई भेदभाव किए बिना सभी को साथ लेकर शहर का विकास किया जाएगा।"लेकिन नगर विकास आघाड़ी का आरोप है कि महज 24 घंटे के भीतर ही इस बयान के विपरीत घटना सामने आ गई। 24 जुलाई 2026 को नगर परिषद की ओर से नए शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का नामकरण समारोह जल्दबाजी में आयोजित किया गया, लेकिन इस कार्यक्रम के लिए नगर विकास आघाड़ी के नगरसेवकों और महिला नगरसेविकाओं को कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं दिया गया।आघाड़ी के पदाधिकारियों का कहना है कि जिन जनप्रतिनिधियों ने स्व. अजित दादा पवार के नाम का प्रस्ताव रखा, लगातार ज्ञापन दिए, उसका अनुसरण किया और परिषद की बैठक में प्रस्ताव पारित कराने के लिए प्रयास किए, उन्हीं जनप्रतिनिधियों को समारोह से जानबूझकर दूर रखा गया। उनका आरोप है कि यह पूरा कार्यक्रम केवल राजनीतिक श्रेय लेने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।नगर विकास आघाड़ी ने नगर परिषद प्रशासन पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मुख्याधिकारी ने शासकीय कार्यक्रमों में सभी नगरसेवकों को आमंत्रित करने की परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करते हुए विपक्षी नगरसेवकों को कार्यक्रम से बाहर रखा। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि मुख्याधिकारी पर सत्ताधारी पक्ष का राजनीतिक दबाव है।
आघाड़ी ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक में सभी को साथ लेकर चलने की बात करने वाले नगराध्यक्ष ने व्यवहार में विपक्षी जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर अपनी कथनी और करनी में बड़ा अंतर दिखाया है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को समान सम्मान और सहभागिता मिलनी चाहिए, लेकिन नगर परिषद प्रशासन ने विपक्षी नगरसेवकों का अपमान किया है।

रिपोर्टर : राजेश पंडित

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.